सोते रहे नईदुनिया के संपादक और छूट गई खबर

'पहले लिखा था इतिहास अब लिखेंगे भविष्य' की पंच लाइन के साथ ग्वालियर में रीलांच हुए नईदुनिया अखबार के संपादक की नींद अखबार को भारी पड़ गई। रिपोर्टर से लेकर फोटोग्राफर तक उन्हें एक अहम खबर की सूचना देने और यह तय करने के लिए मोबाइल लगाते रहे कि यह खबर कहां लगेगी पर संपादक नींद में ऐसे डूबे रहे कि उन्होंने किसी का टेलीफोन ही नहीं अटेंड किया। कुछ अखबार अपने सिटी एडिशन के कुछ अखबारों में खबर ब्रेक कर चुके थे और नईदुनिया खबर होते हुए भी खबर से चूक गया।

असल में गुरुवार-शुक्रवार की रात लगभग दो बजे भोपाल की ओर से आकर दिल्ली जाने वाली जीटी एक्सप्रेस की दो बोगियों में आग लग गई। आग एयरकंडीशन बोगियों में लगी और आनन-फानन में जंजीर खींचकर रेल को सिथौली के पास रोका गया। मुसाफिरों ने किसी तरह रेल से कूदकर जान बचा ली पर उनका सामान खाक हो गया। खबर बड़ी थी। घटनास्थल ग्वालियर से सिर्फ 14 किलोमीटर था। खबर के शहर में पहुंचते ही अखबार वाले सक्रिय हो गए और मौके पर जा पहुंचे। जैसी व्यवस्था बनी, वैसी खबर छापने का इंतजाम किया गया।

नईदुनिया के रिपोर्टर अमरनाथ गोस्वामी, अरविंद पांडे भी फोटोग्राफर रवि उपाध्याय के साथ मौके पर पहुंच गए। खबर नईदुनिया के पास भी थी लेकिन छापने के लिए संपादक अनूप शाह की इजाजत की जरूरत थी। संपादक को जब मौके पर मौजूद फोटोग्राफर से लेकर रिपोर्टर तक ने फोन लगाया तो घंटी बजती रही पर संपादक जी की नींद नहीं खुली, जिसके चलते यह खबर नहीं लग पाई। संपादक की गहरी नींद की यह खबर जैसे ही इंदौर पहुंची, श्रवण गर्ग ने संपादक की क्लास लेने में देरी नहीं की।

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