सौ कुत्‍ते मिलकर भी एक शेर का शिकार नहीं कर सकते

भड़ास4मीडिया के संचालक-संपादक यशवंत सिंह को नोयडा पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। उनकी गिरफ्तारी एक राष्ट्रीय न्यूज चैनल के प्रबंध संपादक की लिखित शिकायत पर की गई थी। शिकायत में यशवंत पर रंगदारी मांगने, भय फैलाने तथा जान से मारने जैसे गंभीर आरोप लगाये गये हैं। सवाल यह है कि जिस यशवंत भाई को हजारों कायर मिलकर नहीं डरा पाए, जिसकी कलम से ही अच्छे-अच्छों की हवा निकल गई, उस व्यक्ति को भला किसी डरे को डराने की क्या जरुरत? पुलिस तो अपने आकाओं की गुलाम है ही ये तो सब ही जानते हैं की पुलिस का पहला निशाना "पत्रकार" ही होते हैं। खैर, यहाँ बात यशवंत भाई को झूठे मामले में फ़ंसाने की हो रही है।

वस्तुत: यह मुकदमा टीवी एवं प्रिंट मीडिया क्षेत्र में अधिकार जमाये कारपोरेट घरानों और नई मीडिया यानी वेब मीडिया के बीच टकराव का नतीजा है। हालिया समय मे वेब मीडिया ने पूरी दुनिया में अपनी निष्पक्षता और बेबाकी के कारण एक अलग पहचान कायम किया है। मीडिया के सभी रूपों में मात्र वेब न्यूज पोर्टल ही हैं, जो एक दूसरे की खामियों को भी उजागर करते हैं। किसी भी चैनल पर दूसरे चैनल की खामिया तो दूर रही, नाम तक नहीं दिखाया जाता। वही हाल अखबारों का है। अखबार प्रेस एंड रजिस्ट्रेशन आफ़ बुक एक्ट १८६७ की धाराओं का रोज उल्लंघन करते हैं लेकिन उनके उपर कोई कार्रवाई नहीं होती है। ठीक उसी प्रकार टीवी चैनल ड्रग एंड मैजिक रिमेडी (ओबजेकशनेबल एडवर्जटाईजमेंट) एक्ट १९५४ की विभिन्न धाराओं का उल्लंघन करते हुये भ्रामक तथा चमत्कार दिखाने वाले अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाले विज्ञापन प्रकाशित करते हैं परन्तु उनके उपर कोई कार्रवाई नही होती है।

वेब मीडिया ने टीवी तथा प्रिंट मीडिया के पाखंड तथा गलत कार्यों को प्रकाशित करने का कार्य किया है। टीवी पर आने वाले अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों की आलोचना हमेशा भड़ास पर आई है। उसी का परिणाम है कि बदले की भावना से प्रेरित होकर यशवंत सिंह के उपर यह झूठा मुकदमा किया गया है। वेब मीडिया ने भी इसे धर्म युद्ध के रुप मे लड़ने का निश्चय किया है। इस धर्म युद्ध में एक तरफ़ सत्य पर कायम वेब मीडिया है तो दूसरी तरफ़ अधर्म की लड़ाई लड़ने वाली कौरव सेना के रुप में शोषणकारी टीवी चैनल हैं। हम इस युद्ध को अंजाम तक पहुंचायेंगे। यसवंत भाई की गिरफ्तारी 100 कुत्ते मिलकर भी एक शेर का शिकार नहीं कर सकते।

लेखक शेख शकील तेज न्‍यूज डाट काम के संपादक हैं.


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