हरे प्रकाश उपाध्याय के उपन्यास ‘बखेड़ापुर’ को ज्ञानपीठ नवलेखन पुरस्कार

भारतीय ज्ञानपीठ का वर्ष-2013 का नव लेखन पुरस्कार हरे प्रकाश उपाध्याय को उनके उपन्यास 'बखेड़ापुर' पर देने की घोषणा हुई है। भारतीय ज्ञानपीठ की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार नौंवी नवलेखन प्रतियोगिता उपन्यास विधा पर केंद्रित थी, जिसके लिए उपाध्याय के उपन्यास 'बखेड़ापुर' को सर्वश्रेष्ठ कृति के तौर पर चुना गया।

पुरस्कार स्वरूप उपन्यासकार को एक लाख रुपये की राशि और प्रमाण पत्र दिये जाएंगे। इस पुरस्कार के निर्णायक मंडल के अध्यक्ष थे वरिष्ठ कथाकार-नाटककार असगर वजाहत। अन्य निर्णायकों में रवींद्र कालिया, लीलाधर मंडलोई, अखिलेश, अजय तिवारी, माधव कौशिक और जितेंद्र श्रीवास्तव शामिल थे।

'बखेड़ापुर' नब्बे के दशक के बाद भारतीय गाँवों की बदलती स्थितियों और पारंपरिक जकड़नों के द्वंद्व को खूबसूरत तरीके से उजागर करता है। साथ ही समकालीन राजनीति और संस्कृति की विडंबनाओं को भी सामने लाता है। प्रतियोगिता में चुने गये बखेड़ापुर सहित पाँचों उपन्यासों को भारतीय ज्ञानपीठ प्रकाशित भी करेगा। पुरस्कृत उपन्यास के अतिरिक्ति प्रकाशन के लिए अनुशंसित उपन्यासों में पत्रकार उमा का उपन्यास जन्नत जाविदाँ, प्रदीप जिलवाने का आठवां रंग पहाड़ गाथा, विमलेश त्रिपाठी का कैनवास पर प्रेम व इंदिरा दांगी का हवेली सनातनपुर शामिल है।

ज्ञानपीठ नवलेखन पुरस्कार के लिए चुने गये उपन्यासकार हरे प्रकाश उपाध्याय लखनऊ में रहकर पत्रकारिता करते हैं। इनका एक कविता संकलन- खिलाड़ी दोस्त तथा अन्य कविताएं भी भारतीय ज्ञानपीठ से प्रकाशित हो चुका है।

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