हिंदुस्‍तान विज्ञापन घोटाला : जज अंजना प्रकाश ने सरकारी अधिवक्‍ता की लापरवाही की शिकायत बार काउंसिल को भेजी

पटना : (बिहार)। पटना उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति अंजना प्रकाश ने विश्व के 200 करोड़ के सनसनीखेज दैनिक हिन्दुस्तान विज्ञापन घोटाले की सुनवार्इ में सरकारी अधिवक्ता की लापरवाही से जुड़े मुंगेर के वरीय अधिवक्ता और पत्रकार काशी प्रसाद के आवेदन को बार काउनसिल के चेयरमैन के पास उचित कार्रवाई हेतु भेजने का आदेश अपने 08 अक्टूबर, 12 के आदेश में दिया है। पूरे विश्व में संभवत: यह पहली घटना है जिसमें उच्च न्यायालय ने विश्व व्यापी भ्रष्टचार के मामले में सरकारी अधिवक्ता की लापरवाही की शिकायत को काफी गंभीरतापूर्वक लिया है और समुचित काररवार्इ के लिए बार काउंसिल के चेयरमैन के पास आवेदन को भेज दिया है।

 
08 अक्टूबर,12 को पटना उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति अंजना प्रकाश के न्यायालय में सरकारी अधिवक्ता (ए0पी0पी0) आरबी राय 'रमण' ने न्यायालय को बताया कि मुंगेर के अधिवक्ता और पत्रकार काशी प्रसाद ने र्इ-मेल भेजा है जिसमें दुर्भाग्यपूर्ण टिप्पणियां ए0पी0पी0 और इस न्यायालय के संबंध में की गर्इ है। विश्व के र्इ-पाठकों की मांग पर पटना उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति अंजना प्रकाश के इस मामले से संबंधित आदेश के अंश को हू-बहू प्रकाशित किया जा रहा है।
 
 
इस बीच, बिहार सरकार के महाधिवक्ता रामबालक महतो ने दूरभाष पर बताया कि अधिवक्ता काशी प्रसाद की लिखित शिकायत पर जांच का आदेश जारी कर दिया गया है। जांच-रिपोर्ट की प्रतीक्षा की जा रही है। इस बीच, बिहार सरकार ने पटना उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति अंजना प्रकाश के न्यायालय में दैनिक हिन्दुस्तान के 200 करोड़ के सरकारी विज्ञापन फर्जीवाड़ा की प्राथमिकी मुंगेर कोतवाली कांड संख्या-445/2011 को रद्द करने से संबंधित प्रमुख अभियुक्त श्रीमती शोभना भरतिया की रिट याचिका (कि्र0मि0 नं0-2951/2012) की सुनवार्इ में सरकारी पक्ष मजबूती के साथ रखने का आदेश जारी कर दिया है।
 
काशी प्रसाद के आवेदन में आखिर क्या है?
 
विश्व के सनसनीखेज दैनिक हिन्दुस्तान के दौ सौ करोड़ के सरकारी विज्ञापन घोटाले के प्रमुख अभियुक्त व मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड की अध्यक्ष शोभना भरतिया को पटना उच्च न्यायालय में क्रिमिनल मिससेलैनियम नं0-2951/2012 में न्यायमूर्ति माननीय अंजना प्रकाश के न्यायालय में राज्य सरकार के अधिवक्ता के द्वारा सरकारी पक्ष को साक्ष्य के साथ न्यायालय में सही ढंग से नहीं प्रस्तुत करने की शिकायत मुंगेर के वरीय अधिवक्ता व पत्रकार काशी प्रसाद ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, महाधिवक्ता (बिहार) रामबालक महतो, मुख्य सचिव, गृह सचिव को लिखित रूप में फैक्स और र्इ-मेल भेज कर की है (मुख्य मंत्री) और महाधिवक्ता (बिहार) को भेजे र्इ-मेल और फैक्स में काशी प्रसाद ने आरोप लगाया है कि जब गत 18 सितम्बर, 12 और पूर्व की तिथियों पर पटना उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति माननीय अंजना प्रकाश के न्यायालय में दैनिक हिन्दुस्तान के 200 करोड़ के सरकारी विज्ञापन घोटाले की सुनवार्इ मुंगेर कोतवाली कांड संख्या-445/2011 को रदद करने के बिन्दु पर हुर्इ, सरकारी अधिवक्ता ने इस देश के महत्वपूर्ण आर्थिक अपराध से जुड़े मुकदमे में सरकारी पक्ष सही ढंग से नहीं प्रस्तुत किया, जिससे न्यायमूर्ति अंजना प्रकाश के 18 सितंबर, 2012 के आदेश में अभियुक्त शोभना भरतिया के पक्ष में वह कानूनी बातें आ गर्इं जो भागलपुर के जिलाधिकारी के ऐफिडेविट में लिखा हीं नहीं गया था।
 
सरकारी अधिवक्‍ता की शिकायत करने वाले काशी प्रसाद
 
माननीय न्यायमूर्ति अंजना प्रकाश ने 18 सितंबर 12 के अपने आदेश में पैरा-।। में लिखा है कि आवेदिका (शोभना भरतिया) दैनिक हिन्दुस्तान के मुंगेर संस्करण को भागलपुर में मुद्रित करने की अनुमति भागलपुर के जिलाधिकारी से प्राप्त कर ली है और यह तथ्य जिलाधिकारी के द्वारा न्यायालय में दाखिल ऐफिडैविट से स्पष्ट होता है।
 
It has been submitted on behalf of the petitioner(Shobhana Bharatiya) that the grievance of the informant is that her newspaper concern was printing Hindi edition of ''Hindustan' in Munger without permission of the District Magistrate,Munger, whereas fact situation is that even the Munger Hindi edition of 'Hindustan' is being printed in Bhagalpur, for which permission has been obtained by the District Magistrate,Bhagalur as is evident from the counter affidavit filed by him.'
 
जबकि भागलपुर के जिलाधिकारी की ओर से इस मुकदमें में पेश ऐफिडेविट में जिलाधिकारी के द्वारा भागलपुर स्थित प्रिंटिंग प्रेस से दैनिक हिन्दुस्तान के मुंगेर संस्करण के मुद्रण की स्वीकृति देने से संबंधित कोर्इ बात कही ही नहीं गर्इ है। अभियुक्त ने जिलाधिकारी भागलपुर के समक्ष केवल घोषणा पत्र जमा किया है। किसी भी अखबार के मुद्रण और प्रकाशन की अनुमति केवल प्रेस रजिस्ट्रार (नर्इ दिल्ली) ही दे सकता है। तभी डीएम या एसडीएम प्रकाशक के द्वारा दायर घोषणा-पत्र को प्रमाणीकृत कर सकते हैं।
 
मुख्यमंत्री और महाधिवक्ता, बिहार को भेजे र्इ-मेल में अधिवक्ता काशी प्रसाद ने आगे लिखा है कि -'' यदि 200 करोड़ के दैनिक हिन्दुस्तान के सरकारी विज्ञापन घोटाले जैसे आर्थिक अपराध की प्राथमिकी पटना उच्च न्यायालय में सरकार की लापरवाही, खासकर सरकारी अधिवक्ता की लापरवाही, से रद्द हो जाती है, तो बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जो आर्थिक अपराधियों के विरूद्ध युद्ध चलाने की घोषणा की है, उस सरकारी मुहिम को जबर्दस्त धक्का लगेगा और आर्थिक अपराधियों का राज्य में मनोबल बढ़ेगा।
 
स्मरणीय है कि अभियुक्त शोभना भरतिया ने पटना उच्च न्यायालय में मुंगेर के दैनिक हिन्दुस्तान विज्ञापन घोटाले से जुड़ी पुलिस प्राथमिकी को रदद करने के लिए रिट दायर किया है जिसका क्रिमिनल मिससेलैनियस नं0- 2951/2012 है। मुख्यमंत्री और महाधिवक्ता को भेजे र्इ-मेल में श्री प्रसाद ने आगे आरोप लगाया है कि ''भागलपुर के जिलाधिकारी की ओर से इस मुकदमे में माननीय न्यायमूर्ति अंजना प्रकाश के न्यायालय में जो ऐफिडेविट दाखिल किया गया है, उसमें अभियुक्त शोभना भरतिया और अन्य अभियुक्तों को बचाने की कोशिश की गर्इ है। जिलाधिकारी (भागलपुर) ने ऐफिडेविट में दैनिक हिन्दुस्तान के सरकारी विज्ञापन घोटाले से जुड़े दस्तावेजी साक्ष्य जैसे वित्त अंकेक्षण विभाग (बिहार सरकार) की रिपोर्ट और साक्ष्यों को न्यायालय में दाखिल ऐफिडेविट में कोर्इ जगह नहीं दिया है जिसकी उच्चस्तरीय जांच की आवश्यकता है।
 
श्री प्रसाद ने मुख्यमंत्री और महाधिवक्ता से अनुरोध किया है कि चूंकि इस मुकदमे में अंतिम सुनवार्इ अगले सोमवार के बाद किसी भी दिन पटना उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति अंजना प्रकाश के न्यायालय में होगी, मुख्यमंत्री और महाधिवक्ता (बिहार) के कार्यालय से ऐसी व्यवस्था की जाए कि सरकारी अधिवक्ता न्यायमूर्ति अंजना प्रकाश के न्यायालय में सरकारी पक्ष जैसे मुकदमे में आरक्षी उपाधीक्षक और आरक्षी अधीक्षण की पर्यवेक्षण टिप्पणी और अन्य दस्तावेजी साक्ष्य को, जो 200 करोड़ के सरकारी विज्ञापन घोटाले को प्रमाणित करते हैं, को न्यायालयके समक्ष जोरदार ढंग से रखें जिससे न्यायालय को सही निर्णय लेने में मदद मिल सके।
 
श्री प्रसाद ने यह भी मांग की है कि भागलपुर के जिलाधिकारी को निर्देश दें कि वे पुन: रिज्वाइंडर न्यायालय में पेश करें और विज्ञापन घोटाले से संबंधित दस्तावेजी साक्ष्य जैसे अखबार ने किस प्रकार पटना संस्करण की निबंधन संख्या वर्षो वर्ष तक जालसाजी और धोखाधड़ी करके मुंगेर हिन्दुस्तान संस्करण में  लिखता रहा और जब जांच शुरू हुर्इ, तो अखबार ने आवेदित लिखना शुरू किया। श्रीप्रसाद ने मुख्यमंत्री और महाधिवक्ता को न्यायमूर्ति अंजना प्रकाश के न्यायालय के 18 सितंबर, 12 के आदेश और जिलाधिकारी, भागलपुर के ऐफिडेविट की प्रतियां भी अवलोकन के लिए भेजा है।
 
पटना उच्च न्यायालय ने काशी प्रसाद के जिस आवेदन को बार काउनिसल के चेयरमैन के पास आवश्यक काररवार्इ के लिए भेजने का ऐतिहासिक आदेश दिया है, श्री प्रसाद के उस आवेदन को मैं यहां हू-बहू प्रकाशित कर रहा हूं। श्री प्रसाद के आवेदन से यह उजागर हो जाता है कि पटना उच्च न्यायालय में सरकारी अधिवक्ता की लापरवाही के कारण किस प्रकार सरकार महत्वपूर्ण सरकारी मुकदमों को हार जाती है और सरकार को फजीहत का सामना करना पड़ता है। 
 
श्रीकृष्ण प्रसाद की रिपोर्ट. इनसे संपर्क मोबाइल नं0- 09470400813 के जरिए किया जा सकता है. 


 

हिंदुस्‍तान के विज्ञापन घोटाले के बारे में और जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कर सकते हैं- हिंदुस्‍तान का विज्ञापन घोटाला 
 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *