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अपना चैनल शुरू करने के लिए सरकार ने ट्राई से मांगा सुझाव

नई दिल्ली : विभिन्न राज्य सरकारों और मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एचआरडी) द्वारा अपना टेलीविजन चैनल शुरू करने की योजना के बीच सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) से यह सुझाव मांगा है कि केंद्र या राज्य सरकार या उसकी इकाई किस तरह से प्रसारण क्षेत्र में प्रवेश कर सकती है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि मंत्रालय के सचिव ने इस आशय का पत्र ट्राई के अध्यक्ष को लिखा था।

नई दिल्ली : विभिन्न राज्य सरकारों और मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एचआरडी) द्वारा अपना टेलीविजन चैनल शुरू करने की योजना के बीच सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) से यह सुझाव मांगा है कि केंद्र या राज्य सरकार या उसकी इकाई किस तरह से प्रसारण क्षेत्र में प्रवेश कर सकती है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि मंत्रालय के सचिव ने इस आशय का पत्र ट्राई के अध्यक्ष को लिखा था।

पत्र में कहा गया है कि कई राज्य सरकारों और मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा टेलीविजन चैनल शुरू करने का प्रस्ताव किया गया है लेकिन 12 नवंबर 2008 की ट्राई की एक सिफारिश के कारण ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है। टेलीविजन चैनल की अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग किसी ऐसी कंपनी को प्रदान की जा सकती है जो कंपनी अधिनियम के तहत पंजीकृत हो। केंद्र के समक्ष गुजरात, पंजाब और आंधप्रदेश सरकार की ओर से अपना टेलीविजन चैनल शुरू किए जाने के बारे में प्रस्ताव आया है।

शिक्षा के प्रचार प्रसार के लिए 1000 शैक्षणिक चैनल शुरू करने के बारे में मानव संसाधन विकास मंत्रालय का प्रस्ताव भी पिछले करीब चार सालों से फाइलों में जूझ रही हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय इस उद्देश्य के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) से दो ट्रांसपांडर किराए पर ले चुकी है। राष्ट्रीय सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी शिक्षा मिशन के तहत मानव संसाधन विकास मंत्रालय को दो जनवरी 2009 को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति से डायरेक्ट टू होम (डीटीएच) के माध्यम से 1000 शैक्षणिक चैनल शुरू करने की स्वीकृति मिली थी।

काफी कुछ काम होने के बाद अंतिम समय में यह परियोजना सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में अटक गई। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि इस विषय पर सचिवों की समिति की एक बैठक हुई है और दूसरी बैठक अगले साल जनवरी में होने की संभावना है । इसके बाद ही कोई निर्णय हो सकता है। तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने 11 जून 2012 को इस विषय पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखा और इस परियोजना के उद्देश्यों को पूरा करने में सहयोग देने का आग्रह किया।

सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मिली जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस विषय में दखल देते हुए इस पर विचार करने के लिए कैबिनेट सचिव को 25 जून 2012 और 12 जुलाई 2012 को नोट भेजा और 15 दिनों में सिफारिश देने को कहा था। प्राप्त जानकारी के अनुसार, कैबिनेट सचिवालय में निदेशक आर आनंद ने 18 जुलाई 2012 को कहा कि उच्च शिक्षा विभाग से 29 जून 2012 को सचिवों की समिति के समक्ष विचार के लिए नोट भेजने का आग्रह किया गया था।

उच्च शिक्षा विभाग ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय की मंजूरी से नौ जुलाई 2012 को संंबंधित विभागों की मंजूरी के लिए सचिवों की समिति के विचारार्थ मसौदा नोट तैयार किया। गौरतलब है कि राष्ट्रीय सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी शिक्षा मिशन के तहत 1000 शैक्षणिक चैनल शुरू करने की योजना पर अमल करते हुए 2010 में तय किया गया कि प्रारंभ में 50 चैनल शुरू किए जाएंगे। जनवरी 2011 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इसके लिए आवेदन किया था।

मंत्रालय के अनुरोध पर फरवरी 2012 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शैक्षणिक चैनल शुरू करने के लिए जीसैट 8 उपग्रह से दो के यू बैंड ट्रांसपांडर आवंटित किए थे जिसके लिए हर महीने 80 लाख रुपए किराया तय किया गया। इन चैनलों के लिए उपग्रह ट्रांसपांडर से डायरेक्ट टू होम प्रसारण के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की अनुमति जरूरी होती है। ट्रांसपांडर मिलने के बाद जब मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाणपत्र देने को कहा, तब जवाब आया कि नियमों के तहत चैनल चलाने की अनुमति केवल कंपनी अधिनियम 1956 के तहत पंजीकृत कंपनियों को ही दी जा सकती हैं और इस प्रकार अनापत्ति प्रमाणपत्र नहीं मिल सका।

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