Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

सुख-दुख...

अपने जैसा सबको क्‍यों बता रहा है जी न्यूज!

 

जिस दिन बीईए (ब्रॉडकास्टर्स एडिटर एसोसिएशन) की जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट जारी की उसी दिन से जी न्यूज चैनल पर फिर अभियान छेड़ा गया। रिपोर्ट सुधीर चौधरी और समीर के विरूद्ध है। उन पर संपादकीय मर्यादा के उल्लंघन का दोष सिद्ध हो गया है। वह रिपोर्ट आंतरिक है। हर चैनल के संपादक के पास है। जी न्यूज जो अभियान चला रहा है वह है तो अपने बचाव में, लेकिन उससे चैनल ही गंभीर सवालों से बुरी तरह उलझता जा रहा है। 

 

जिस दिन बीईए (ब्रॉडकास्टर्स एडिटर एसोसिएशन) की जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट जारी की उसी दिन से जी न्यूज चैनल पर फिर अभियान छेड़ा गया। रिपोर्ट सुधीर चौधरी और समीर के विरूद्ध है। उन पर संपादकीय मर्यादा के उल्लंघन का दोष सिद्ध हो गया है। वह रिपोर्ट आंतरिक है। हर चैनल के संपादक के पास है। जी न्यूज जो अभियान चला रहा है वह है तो अपने बचाव में, लेकिन उससे चैनल ही गंभीर सवालों से बुरी तरह उलझता जा रहा है। 
 
बड़ा सवाल यही है कि क्या अपने संपादकों की करतूतों को न्यूज चैनल अपनी इज्जत का सवाल बनाएगा? उससे भी बड़ा सवाल यह है कि जो कुछ बचाव में दिखाया और सुनाया जा रहा है उससे पूरी मीडिया का चेहरा दागदार हो गया है। दर्शक समझ रहें हैं कि हर मीडिया यही कर रहा है। उसे समझाया भी यही जा रहा है कि जी ने कोई गलत काम नहीं किया। उसने मीडिया के जरिए कारोबार किया है। तो सवाल यह बना कि क्या सच है? इसका फैसला कौन करेगा?
 
चार साल पहले मुंबई विस्फोटों की चैनलों के कवरेज पर गंभीर सवाल उठे। सरकार तिलमिलाई। एक कानून बनाने की कसरत शुरू हुई। उसका प्रारूप देख चैनल वाले थर्रा गए। वे सोनिया गांधी के पास पहुंचे। जिससे वह रूक गया। तब आत्मनियमन और प्रेस की स्वतंत्रता को साधने के लिए चैनल मालिकों ने न्यूज ब्रॉडकास्टर्स ऐसोसिएशन (एनबीए) बनाया। उसी का ‘लोकपाल’ है- न्यूज ब्रॉडकास्टर्स स्टैंडर्ड ऑथरिटी। जिसके अध्यक्ष न्यामूर्ति जे.एस. वर्मा हैं। चैनल के संपादकों ने अपनी संस्था बनाई, बीईए। इस प्रकार चैनलों ने एक दोहरी नैतिक नियमन का सांचा बनाया।
 
जिंदल-जी न्यूज विवाद की जे.एस. वर्मा जांच जारी है। बीईए ने रिपोर्ट दे दी है। इसने आरोपित जी न्यूज के दोनों संपादकों की एसोसिएशन से सदस्यता खत्म कर दी है। इस प्रकार संपादकों की आधुनिक ‘खाप’ ने उन्हें अपने समाज से निकाल दिया है। यह निर्णय आधुनिक पद्धति से हुआ। गोपनीय मतदान से नतीजा निकला कि इस पर सब एकमत हैं। जांच में तीन पत्रकार थे- एन.के. सिंह, राहुल कमल और दिबांग। ‘आजतक’ के दफ्तर में जांच की प्रक्रिया चली। दोनों पक्षों के दावे और सबूतों को परखा गया। उस टेप को बार-बार सुना गया जिसमें सुधीर चौधरी और समीर अहलूवालिया जिंदल के अफसरों से सौदेबाजी करते हुए सौ करोड़ रुपए मांग रहें हैं। जांचकर्ताओं ने सुधीर से पूछा कि यह तो उल्टा हो गया। अगर आपका दावा सही है तो स्टिंग ऑपरेशन जी न्यूज को करना चाहिए था।
 
यहां दो बातें समझनी जरूरी है। पहली यह कि किसी न्यूज चैनल को लाइसेंस कारोबार के लिए नहीं मिलता है। यहां आरोप जी न्यूज पर कारोबार के गोरखधंधे का है। दूसरा कि जब अखबारों पर पेड न्यूज के आरोप लगे तब उगाही में किसी संपादक और मालिक का नाम नहीं आया। रिपोर्टर और मैनेजर पर आरोप लगे। यहां आरोप संपादक और मालिक पर हैं। इससे जो धारणा बनी है वह पूरी मीडिया के लिए कलंक है कि संपादक अपने मालिक को मुनाफा कमाने का गुर सिखा रहा है। जहां इस पर जी न्यूज को माफी मांगनी चाहिए वहां वह जांच करने वाले पर आरोप लगाने की धृष्टता कर रहा है, जैसे दिबांग पर। जी न्यूज और जिंदल में अब मानहानि का मुकदमा चलेगा। क्या उससे कोई फर्क पड़ेगा?
 
जी न्यूज के कदम प्रतिक्रिया में उठते जा रहे हैं। बचाव के लिए दूसरों पर हमला उसी का हिस्सा है। वह दूसरे चैनलों की भी लानत-मनामत कर रहा है। उन पर आरोप लगा रहा है कि वे चुप हैं। भ्रष्टाचार पर तलवार लेकर जी न्यूज की तरह निकल क्यों नहीं रहे हैं? वह अपनी ही संस्था को खारिज भी कर रहा है। जिस पर आरोप है वही जी न्यूज का चेहरा बन गया है। ऐसी भ्रमपूर्ण स्थिति में हर नागरिक अंधेरी सुरंग में असहाय खड़ा है। उसे रोशनी कौन दिखाए? वह जानना चाहता है कि पत्रकारिता की नीति-नैतिकता क्या है?
 
जिंदल के बारे में किसी को कोई भ्रम नहीं है। वह जैसा कारोबारी घराना है उसे पत्रकार और राजनीति के खिलाड़ी कम से कम 1987 से भलि-भांति जानते हैं। तब के हरियाणा चुनाव में वह देवीलाल के साथ था। इस समय कोयला ब्लॉक की आवटंन की रिपोर्ट बताती है कि यह घराना अपने ईमान में शिया के साथ शिया और सुन्नी के साथ सुन्नी है। जिसने जी न्यूज पर दो सौ करोड़ रुपए की मानहानि का दावा कर दिया है। लेकिन जी न्यूज तो एक मीडिया समूह है। उसे सतीश के. सिंह ने एक साख दिलाई थी। जिसे वह अब संतोष हेगड़े और अन्ना हजारे की बाइट से बचाने का प्रयास कर रहा है। सुना है कि सुभाष चंद्रा ने अरविंद केजरीवाल से बात की है। अरविंद केजरीवाल अपने अनुभव से अगर जाएंगे तो वे इस फंदे में नहीं पड़ेंगे। सवाल जी न्यूज का नहीं है, पूरी मीडिया की साख का है। मीडिया में ईमानदार पत्रकारों की कोई कमी नहीं है। वे विपरीत वातावरण में भी कोई भी कुर्बानी देकर मीडिया को बचाएंगे। यही समय है जब यह साफ हो जाना चाहिए कि एक चैनल मात्र पूरी मीडिया का प्रतिनिधित्व नहीं करता। जैसी खबर छपी है उससे तो लगता है कि टाइम्स ऑफ इंडिया भी जी न्यूज पर मुकदमा करने वाला है।
 
लेखक रामबहादुर राय देश के जाने माने वरिष्ठ पत्रकार हैं. उनका यह लिखा प्रथम प्रवक्ता मैग्जीन में प्रकाशित हो चुका है.
Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...