शुक्रवार को आगरा में अजीब नजारा देखने को मिला, जिसने पत्रकारिता की गिरती साख को ही परिभाषित किया. शहर में "फ्लोरेंस मिस यूपी 2012" सौंदर्य प्रतियोगिता का ऑडिशन चल रहा था. शहर के विभिन्न कथित प्रतिष्ठित अखबारों के छायाकार भी इस इवेंट को कवरेज करने गए थे. स्थिति यह हो गई कि इस इवेंट को कवर करने के लिए छायाकारों को कुर्सी तक नहीं दी गई. सभी को जमीन पर बैठाया गया. बेचारे अपना सा मुंह बनाए सभी छायाकार जमीन पर बैठे रहे.
दूसरी तरफ शहर के तथाकथित स्वयंभू समाजसेवी एवं प्रतिष्ठित लोग टेबुल-कुर्सियों पर बैठे थे, जबकि छायाकार उन्हीं के टेबल के नीचे. अजीब नजारा था. आप नीचे दी गई तस्वीर में भी साफ देख सकते हैं कि किस तरह छायाकार पालथी मारकर जमीन पर बैठे हुए हैं. अगर अब अपने सम्मान की रक्षा अगर ये पत्रकार-छायाकार बंधु खुद करना नहीं जानते हैं तो फिर इन जैसों के लिए कोई कुछ नहीं कर सकता है. वैसे भी कुकुरमुत्तों की तरह उग आए अखबारों और न्यूज चैनलों की बढ़ती तादाद से पत्रकारों तथा छायाकारों के सम्मान में काफी कमी आई है.







