इंडिया न्यूज नेशनल में कार्यरत मीडियाकर्मियों के लिए एक अच्छी खबर है. चैनल के रीलांचिंग की तैयारी चल रही है. चैनल का अपना लोगो टिकर वापस दिखने लगा है और उम्मीद जतायी जा रही है कि चैनल दोबारा शुरू होगा. लेकिन चैनल के मालिक कार्तिकेय शर्मा और प्रबंधन चैनल की रीलांचिंग के लिए उन्हीं लोगों पर भरोसा कर रहा है, जिन्होंने चैनल को डुबोया है यानी असाइनमेंट वाले राम कौशिक और आउटपुट के धर्मेंद्र त्रिपाठी.
राम कौशिक का न्यूज कौशल सिफर है जबकि धमेंद्र त्रिपाठी जब से सीनियर प्रोड्यूसर से एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूर बनाए गए, तब से उनके जिम्मे सिर्फ दो ही काम है. एक – कान में चोंगा लगाकर गाना सुनना और दूसरा राजनीति करके किसी भी तरह अपनी नौकरी सलामत रखना. धर्मेंद्र जी का एक फेविरेट कोटेशन सुनिए – जब मैं इंडिया टीवी में था या जब मैं बीबीसी में था. वन्स अपॉन ए टाइम में जीते हैं त्रिपाठी जी. उनके इस फेविरेट कोट ने इंडिया न्यूज नेशनल को जकड़ा, जिसके बाद नेशनल के पास दम तोड़ने के अलावा कोई चारा नहीं था.
धमेंद्र त्रिपाठी और राम कौशिक के अलावा इंडिया न्यूज में दो और मठाधीश है, रोहित सावल और इशरार शेख. इशरार आशिक मिजाज है और रोहित जी को ककहरा लिखने को बोल दीजिए तो शायद उन्हें परेशानी हो जाएगी. ग्रुप एडीटर रवीन ठुकराल की संस्थान से विदाई के बाद उनके पीछे-पीछे घूमने वाले रोहित की हालत पस्त हो चुकी है. रवीन ने उन्हें सबसे पहले हरियाणा चैनल की जिम्मेदारी दी, जब हरियाणा चैनल डूब गया तब उन्हें बिहार चैनल की जिम्मेदारी दी गई. बिहार चैनल को भी डूबोने में रोहित ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी. आखिरकार उन्हें यूपी का जिम्मा सौंपा गया. उसका हश्र क्या होगा, यह समझना मुश्किल काम नहीं है. रही बात इशरार की, वो इंडिया न्यूज के लव गुरू माने जाते हैं. हरियाणा चैनल की किसी लड़की से पूछ लीजिए, इशरार के चर्चे आम हो जाएंगे.
इंडिया न्यूज में एक और मठाधीश हैं जो वहां फैटू या चोटी के नाम से मशहूर हैं. वैसे तो टेक्निकल हेड हैं लेकिन टेक्निकल की स्पेलिंग शायद ही उन्हें आती हो. ये भी इशरार से रत्तीभर भी कम नहीं है. इंडिया न्यूज के ग्रुप एडीटर रवीन ठुकराल ने इन्हीं चार के कंधों पर जिम्मेदारी दे रखी थी और इन्हीं चारों ने रवीन को जमकर बेवकूफ भी बनाया. रवीन से मनमर्जी करवाते रहे. मनमर्जी इतनी कि इन सबसे मिलकर राजकुमार पाठक, अमरेश झा जैसे उन तमाम लोगों को संस्थान से बाहर का रास्ता दिखाया जो संस्थान के हित में काम करते थे. सुनने में तो यह भी आया है कि एक शख्स को तरक्की दी गई, उसकी सैलरी बढ़ाई गई थी, लेकिन इन चारों कानखजूरों ने रवीन के कान में इतनी खुजली मचाई की रवीन खुद एचआर में गए और उसे विदा करने का फरमान सुनाया. नतीजा यह हुआ कि एक-एक कर काम करने वाले तमाम लोगों को संस्थान ने गुड बाय बोल दिया.
ग्रुप एडीटर रवीन ठुकराल भी अब इंडिया न्यूज के साथ नहीं हैं. संस्थान को गुडबाय बोला या उन्हें निकाल दिया गया, यह इंडिया न्यूज की तरह ही रहस्य है. वैसे ठुकराल इंडिया न्यूज को फुटपाथ समझते हैं, जहां वो आते-जाते रहते हैं. विदाईनामा के अपने संदेश में उन्होंने चैनल से ब्रेक लेने की बात लिखी है, यानी उनकी वापसी हो सकती है. वैसे रवीन पूरी तरह आत्ममुग्धता का शिकार रहे हैं. विदाईनामे के मुताबिक इंडिया न्यूज ने उनके कार्यकाल में तरक्की की नई मिसाल पेश की और उन्होंने खुद को एक्सट्रीमली प्रॉडक्टिव बताया है, यह लिखा है कि उनके नेतृत्व में उनके रीजनल चैनल टीआरपी में नंबर वन रहे.
गजब के आत्मविश्वास से रवीन ठुकराल अपने मुंह मियां मिठ्ठू बने, हकीकत यह है कि इंडिया न्यूज को गर्त में ठकेलने में उनका सबसे बड़ा बड़ा हाथ है. जिन रीजनल चैनलों को रवीन ने नंबर वन बताया था, उनकी खबरें नेशनल के लोग बनाते थे. बहरहाल, रीलांचिंग के लिए अगर कोई भी दमदाम शख्स इंडिया न्यूज से जुड़ता है, हालांकि इसकी उम्मीद कम ही है, तो रवीन के कानखजूरों का खजूर पर टंगना तय है.
इंडिया न्यूज के एक पुराने कर्मचारी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.