Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal

दिल्ली

आरुषि के मां-बाप को गरियाना बंद करें प्लीज

Nadim S. Akhter : निचली कोर्ट के फैसले पर जो लोग आरुषि के मां-बाप को गरिया रहे हैं, वे ठीक वहीं कर रहे हैं, जब आरुषि हत्याकांड के रोज टीवी चैनल वाले कर रहे थे. कइयों ने तो पैकेज चला दिए थे कि —देखिए, इस शैतान-हैवान राक्षस हेमराज को, जो घर में अकेली मासूम लड़की का कत्ल करके भाग गया. शायद उसका रेप भी किया. वगैरह-वगैरह.—

Nadim S. Akhter : निचली कोर्ट के फैसले पर जो लोग आरुषि के मां-बाप को गरिया रहे हैं, वे ठीक वहीं कर रहे हैं, जब आरुषि हत्याकांड के रोज टीवी चैनल वाले कर रहे थे. कइयों ने तो पैकेज चला दिए थे कि —देखिए, इस शैतान-हैवान राक्षस हेमराज को, जो घर में अकेली मासूम लड़की का कत्ल करके भाग गया. शायद उसका रेप भी किया. वगैरह-वगैरह.—

लेकिन चंद दिनों में असलियत कुछ और सामने आई. हेमराज कहीं भागा नहीं था, बल्कि वह भी मार दिया गया था. और फिर पूरी कहानी ही पलट गई. टीवी चैनल वाले अब हेमराज को 'पीड़ित पक्ष' बताने लगे.

सो भाईयों, ये जो फैसला है, सीबीआई वाला. ये ऊपरी अदालतों में टिक नहीं पाएगा. Circumstantial evidence की कोर्ट में अहमियत होती है लेकिन इतनी भी नहीं कि आरुषि जैसे चर्चित मामले में इसी के आधार पर मां-बाप को दोषी करार दे दे. वैसे भी सीबीआई की थ्योरी थोथली है. उसमें वजन नहीं लगता. वे कातिल हो भी सकते हैं और नहीं भी. लेकिन सिर्फ शक के आधार पर मां-बाप को गुनाहगार नहीं ठहराया जा सकता.

अतः गुरुवरों से अपील है कि कृपया आरुषि मामले में थोड़ा ठंड रखें. उसके मां-बाप को गाली देना और अपशब्द कहना बंद करें. मामला अभी सुप्रीम कोर्ट तक जाएगा. जब इतने साल इंतजार किया है तो थोड़े साल और रुक जाएं. लेकिन साक्ष्यों के साथ इतनी लापरवाही पुलिस ने बरती है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी ऐतिहासिक टाइप का ही होगा, इसकी पूरी उम्मीद है.

आरुषि हत्याकांड भारतीय लोकतंत्र और पुलिस तंत्र के लिए एक केस स्टडी बन गया है अब. भावी पीढ़ियां इसका उदाहरण देकर या तो हम पर हंसेंगी, दुत्कारेंगी या फिर ये कहेंगी कि हां, हम लोगों ने समय रहते इससे सबक ले लिया और उन्हें शर्मिंदा होने से बचा लिया.

दरअसल आरुषि एक नहीं, कई हैं. हम सब के बीच. रोज हम उन्हें देखते हैं और इग्नोर करके आगे बढ़ जाते हैं. अगर तलवार दंपती वाली आरुषि से आपको सचमुच सहानुभूति है और उसका दर्द आप महसूस कर रहे हैं तो आपके पास मौका है. कई आरुषियों को बचाने का. उनकी मदद करने का. वो कीजिए. नेक काम है. पुण्य भी मिलेगा और दिल को सुकून भी. फेसबुक पर आरुषि के मां-बाप को गरियाने से कुछ नहीं मिलने वाला. किसी और की भड़ास क्यों आरुषि के मां-बाप पर निकाल रहे हैं?!

पत्रकार नदीम एस. अख्तर के फेसबुक वॉल से.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadas … मोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia  …

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...