उरई में सपा नेता राकेश पटेल पर प्राणघातक हमले के आरोप में 307 धारा में जेल में बंद अमर उजाला के कस्बाई पत्रकार शशिकांत तिवारी को निर्दोष बताने पर तुले हैं जनपद के पत्रकार संगठन। जिंदगी और मौत से जूझ रहे एक आदमी की परवाह किए बिना पत्रकार संगठन शशिकांत को निर्दोष साबित करने पर तुले हैं। अमर उजाला के अनिल शर्मा, हिन्दुस्तान के बृजेश मिश्रा और दैनिक आज के अरविंद द्विवेदी पत्रकारिता के मूल्यों को दरकिनार कर अपनी जातीय भावना से प्रेरित होकर न्यायाधीश बने बैठे और सीधे-सीधे शशिकांत तिवारी को निर्दोष साबित करने पर तुल गए।
पहले सत्ताधारी नेताओं को दवाब में लेने का प्रयास किया गया फिर अधिकारियों को। इसके बाद ऐसे लोगों ने जिनका पत्रकारिता से दूर-दूर तक कोई वास्ता फरमान जारी किया कि अगर सत्ताधारी नेता शशिकांत तिवारी से 307 हटाने में मदद नहीं करते तो उनकी फोटो और खबरें नहीं छापी जाएंगी। जब इससे भी काम न बना तो बैठ गए धरना प्रदर्शन करने। शशिकांत तिवारी को जेल में बंद हुए 15 दिनों से ऊपर हो चुके हैं। लेकिन ब्राह्मणवादी पत्रकारों का धरना प्रदर्शन चल रहा है। अगर समाचार पत्र दावा करते हैं कि शशिकांत तिवारी निर्दोष हैं तो वह बताएं कि घटना के समय़ क्या वह इनमें से किसी के साथ बैठकर दारु पी रहा था क्या?
अब इन तथाकथित पत्रकार संगठनों का एक नया फर्जी अलाप सामने आया है। 10 दिनों से अधिक से उरई में धरने पर बैठे पत्रकार आरोपी शशिकांत तिवारी और विकास तिवारी को न्यायधीश बनकर निर्दोष कह रहे थे। लेकिन इस राग अलापने से कुछ हासिल नहीं हुआ। इस बीच राज्य सरकार ने उरई के एसपी एसपी आरपी चतुर्वेदी को निलंबित कर दिया। मामला कुछ और था लेकिन पत्रकारों को लगा कि अंधे के हाथ बटेर लग गई, सो सब राग अलापने लगे कि पत्रकारों के धरना प्रदर्शन से एसपी का निलंबन हुआ है। जबकि कल तक यही एसपी महोदय 307 के आरोपी को छोड़ने का आदेश देकर पत्रकार संगठनों के हीरो बने हुए थे। उनका निलंबन होते ही सबमें होड़ लग गई अपनी औकात दिखाने की।
नीरज पटेल
सब एडिटर
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