उर्दू दैनिक इन्कलाब को शुरू हुए अभी एक साल का समय भी नहीं हुआ है लेकिन उस ने दिल्ली और यूपी के कई शहरों में पहला स्थान बना लिया है. इस कारण सहारा उर्दू में हड़कंप मच गया है. हर दिन वहां इन्कलाब में छपने वाली एक्सक्लूसिव खबरों को ले कर चर्चा होती है और फिर उन्हीं ख़बरों का फालोअप प्रकाशित करने की कोशिश की जाती है. स्थानीय समाचारों में बुरी तरह पिछड़ जाने की वजह से उर्दू सहारा ने कई लोगों को डेस्क से हटा कर रिपोर्टिंग में लगा दिया है.
सहारा की अनसोल्ड (बिना बिकी) कापियां जिस तरह से रोज़-रोज़ बढ़ रही हैं उस को लेकर नए संपादक बहुत चिंतित हैं. लेकिन बरनी के जाने के बाद जो गुटबाज़ी उर्दू सहारा में बढ़ी है उस का सीधा असर सहारा की घटती लोकप्रियता पर दिखाई पड़ रहा है. सुना जा रहा है कि प्रबंधन सम्पादक असद राजा की जगह किसी बाहरी व्यक्ति को उर्दू सहारा की कमान सौंपना चाहता है. वैसे सहारा ने हसन कमल जैसे वरिष्ट पत्रकार की सेवाएँ ली थीं लेकिन असद राजा ने उन को किनारे कर दिया है, जिस की वजह से उर्दू सहारा की मांग पर सीधा असर पड़ रहा है.
यह भी सुना गया है कि किसी समय अरब न्यूज़ से जुड़े सयेद फैसल अली को उपेन्द्र राय की ओर से लाने की कोशिश हो रही है. खुद उर्दू सहारा से जुड़े लोगों का मानना है कि बरनी के जाने के बाद उम्मीद की जा रही थी कि उर्दू सहारा आगे बढे़गा लेकिन उस के विपरीत उस की मांग दिन प्रति दिन घटती जा रही है. वैसे दिलचस्प बात यह है कि अभी तक उर्दू सहारा के संपादक पद से बरनी का नाम हटाया नहीं गया है. और असद राजा को संपादक का पद न दे कर हेड ऑफ़ उर्दू कहा जा रहा है.
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.





