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एनबीएसए ने उत्‍पीड़न के मामलों में चैनलों को कवरेज के लिए गाइडलाइन जारी किया

नयी दिल्ली : ‘न्यूज ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड ऑथरिटी’ (एनबीएसए) ने समाचार चैनलों से यौन उत्पीड़न के मामलों की रिपोर्टिंग करते समय संवेदनशील रहने की अपील करते हुए कहा है कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को ऐसे दृश्य या ब्योरे नहीं दिखाने चाहिए जो पीडि़तों को दोबारा आहत करते हो या उनकी पहचान का खुलासा करते हो। उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति जेएस वर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में एनबीएसए ने आज चैनलों को यौन उत्पीडऩ के मामलों की रिपोर्टिंग करने के लिए दिशानिर्देश जारी किये।

नयी दिल्ली : ‘न्यूज ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड ऑथरिटी’ (एनबीएसए) ने समाचार चैनलों से यौन उत्पीड़न के मामलों की रिपोर्टिंग करते समय संवेदनशील रहने की अपील करते हुए कहा है कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को ऐसे दृश्य या ब्योरे नहीं दिखाने चाहिए जो पीडि़तों को दोबारा आहत करते हो या उनकी पहचान का खुलासा करते हो। उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति जेएस वर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में एनबीएसए ने आज चैनलों को यौन उत्पीडऩ के मामलों की रिपोर्टिंग करने के लिए दिशानिर्देश जारी किये।

न्यायमूर्ति वर्मा सरकार द्वारा नियुक्त उस समिति का भी नेतृत्व कर रहे हैं जो अब महिलाओं के खिलाफ अपराध से निपटने वाले कानून पर गौर कर रही है। एनबीएसए ने यौन उत्पीडऩ के मामलों की रिपोर्टिंग से जुड़े दिशानिर्देश पर चैनलों को पीडि़त और परिवार की निजता के अधिकार तथा जन हित के बीच संतुलन बनाने को कहा है। एनबीएसए ने यह भी कहा है कि समाचार चैनलों को यह अवश्य ही सुनिश्चित करना चाहिए कि यौन उत्पीडऩ, हिंसा के पीडि़त या इस तरह की किसी घटना के गवाह का किसी खबर या कार्यक्रम में उस व्यक्ति की पहचान छिपाये बगैर जिक्र नहीं हो।

एनबीएसए का दिशानिर्देश खास मायने रखते हैं क्योंकि 23 वर्षीय छात्रा के साथ दिल्ली में हुए सामूहिक बलात्कार की घटना के बाद महिलाओं के खिलाफ अपराध की घटनाओं के प्रति मीडिया अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है। दिशा-निर्देश में कहा गया है कि महिलाओं, बच्चों से यौन दुराचार से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग करते समय तस्वीर और अन्य जानकारी प्रसारित नहीं करनी चाहिए जिससे पीडि़त की पहचान जाहिर होती हो तथा उसके परिवार की पहचान का भी खुलासा नहीं हो। एनबीएसए ने कहा है कि पीडि़त के किसी भी दृश्य को अवश्य ही पूरी तरह से कंप्यूटर पर बदला हुआ होना चाहिए।

उधर, दिल्ली गैंग रेप के पीडि़ता के पिता ने एक विदेशी अखबार 'संडे पीपुल' से कहा है कि वह अपनी बहादुर बेटी का नाम का खुलासा करना चाहते हैं और उन्होंने उस अखबार से बेटी के नाम का खुलासा किया भी। उनके मुताबिक गलत काम उन्होंने या उनके बेटी ने नहीं किया है। फिर वह क्यों अपना मुंह छिपायें। मुंह तो उन दरिंदों को छुपाना चाहिए, जिसने उनके बेटी का ऐसा हाल किया। हालांकि कानून के मुताबिक बलात्कार पीडि़ता के मर जाने पर उसके अभिभावक की सहमति से पीडि़ता का नाम उजागर किया जा सकता है। आईपीसी की धारा-228 तो कम से कम यही कह रहा है। (पंजाब केसरी)

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