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एमपी के वरिष्‍ठ पत्रकार प्रकाश उपाध्‍याय का निधन

मध्‍य प्रदेश के रतलाम से खबर है कि वरिष्‍ठ पत्रकार प्रकाश उपाध्‍याय उर्फ बाबूजी का बुधवार को निधन हो गया. वे 79 वर्ष के थे. इन दिनों वे पीटीआई से जुड़े हुए थे. वे पिछले कुछ समय से अस्‍वस्‍थ चल रहे थे. उनकी अंतिम यात्रा गुरुवार को होटल अजंता पैलेस के पास अरावली अपार्टमेंट, रतलाम स्थित निवास से निकली. उनका अंतिम संस्‍कार त्रिवेणी मुक्तिधाम श्‍मशान घाट पर किया गया. बाबूजी अपने पीछे दो पुत्रों का भरा पूरा परिवार छोड़कर गए हैं. इनके छोटे पुत्र भी पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं.

मध्‍य प्रदेश के रतलाम से खबर है कि वरिष्‍ठ पत्रकार प्रकाश उपाध्‍याय उर्फ बाबूजी का बुधवार को निधन हो गया. वे 79 वर्ष के थे. इन दिनों वे पीटीआई से जुड़े हुए थे. वे पिछले कुछ समय से अस्‍वस्‍थ चल रहे थे. उनकी अंतिम यात्रा गुरुवार को होटल अजंता पैलेस के पास अरावली अपार्टमेंट, रतलाम स्थित निवास से निकली. उनका अंतिम संस्‍कार त्रिवेणी मुक्तिधाम श्‍मशान घाट पर किया गया. बाबूजी अपने पीछे दो पुत्रों का भरा पूरा परिवार छोड़कर गए हैं. इनके छोटे पुत्र भी पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं.

प्रकाश उपाध्‍याय मध्‍य प्रदेश के वरिष्‍ठ पत्रकारों में से एक थे, जिन्‍हें एमपी के तमाम पत्रकार, राजनेता बाबूजी ने नाम से जानते थे. वे रतलाम में दैनिक जागरण और नई दुनिया के लम्‍बे समय तक ब्‍यूरोचीफ रहे. 'नईदुनिया' से पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले श्री उपाध्याय वर्तमान में पीटीआई-भाषा के संवाददाता थे. यद्यपि प्रकाश उपाध्याय का कार्य क्षेत्र मुख्यतः रतलाम रहा, लेकिन मप्र और खास कर मालवा-निमाड़ अंचल की हिन्दी पत्रकारिता में वे एक लोकप्रिय और प्रतिष्ठित पत्रकार तथा कुशल राजनीतिक विश्लेषक के रूप में जाने-पहचाने जाते थे.  राजनीतिक और प्रशासनिक क्षेत्र में उनकी खासी पकड़ थी. रतलाम का पत्रकार जगत और उनका बड़ा मित्र वर्ग उन्हें 'बाबूजी' संबोधित कर आदर व सम्मान देता था.

उनके संपर्क सूत्र इतने भरोसेमंद, जीवंत और व्यापक थे कि रतलाम स्टेशन से गुजरने वाली किसी भी ट्रेन में अगर कोई वीआईपी या वीवीआईपी सफर कर रहा हो तो उन्हें इसकी सूचना मिल जाती थी. प्रकाशजी तुरंत स्टेशन पहुँच कर उस अतिथि से अखबार के लिए बातचीत करने में पीछे नहीं रहते थे. कई बार तो उन्होंने चलती ट्रेन में बैठ कर ही इंटरव्यू लिए और कार्य पूरा होने पर अन्य ट्रेन से वापस रतलाम लौट आते थे. प्रकाशजी सालों तक पीटीआई (प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया) के संवाददाता भी रहे. वे रतलाम के विधि महाविद्यालय की संचालन समिति से भी जुड़े थे, इसी वर्ष प्रदेश के कुलाधिपति द्वारा विक्रम विवि की कार्य परिषद का सदस्य भी मनोनीत किया गया था.

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