इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकार अमृता चौधरी का सड़क हादसे में निधन

 

पंजाब की वरिष्ठ पत्रकार अमृता चौधरी का लुधियाना के पास एक सड़क हादसे में निधन हो गया। चौधरी इंडियन एक्सप्रेस की प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेन्ट थीं और रविवार रात चंडीगढ़ से वापस लौटते वक्त हाइवे पर उनकी टैक्सी की एक इनोवा कार से आमने-सामने टक्कर हो गयी थी।
 
40 वर्षीया अमृता चौधरी की कार रविवार रात करीब दो बजे लुधियाना से 35 किलोमीटर दूर कोहारा के पास टकराई थी। टैक्सी ड्राइवर और चौधरी के एक सहकर्मी को भी हादसे में चोटें आईं, लेकिन वो गंभीर नहीं थीं। सभी को लुधियाना के दयानंद मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां चौधरी की हालत बिगड़ती चली गयी।
 
अमृता चौधरी को निर्भीक पत्रकारिता के लिये जाना जाता था। चौधरी के परिवार में मात्र उनका ग्यारह वर्षीय पुत्र है। पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और कई अन्य राजनेताओं तथा पत्रकारों ने चौधरी के निधन पर दुख जताया है।

ट्रकों से वसूली में फर्जी पत्रकार समेत छह पुलिस के हत्‍थे चढ़े

बिजनौर : यूपी के बिजनौर के गंगा बैराज रोड पर देर रात कर रहे अवैध वसूली कर रहे फर्जी आरटीओ और एक फर्जी पत्रकार को बिजनौर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। बता दें कि यह फर्जी आरटीओ अपनी छह सदस्यी टीम और बोलेरो कार के साथ आए दिन रोड पर अवैध वसूली करता था। वहीं इस अवैध वसूली की घटना को अंजाम देने में एक फर्जी पत्रकार भी शामिल है। बहरहाल पुलिस ने इन छह लोगों को गिरफ्तार करके सलाखों के पीछे धकेल दिया है।

जानकारी के मुताबिक यह नकली आरटीओ उत्तरखंड के रुद्रपुर के रहने वाले थे और रोज़ रात के अँधेरे में अपनी कार से अवैध वसूली करने के लिए निकला करते थे। वहीं कल देर रात बिजनौर पीटीओ को फोन पर यह सूचना मिली कि कुछ फर्जी लोग अपने को आरटीओ बताकर ट्रक वालों से वसूली व मारपीट कर रहे हैं। अधिकारियों के मौके पर पहुंचने पर इनमें से एक ने अपने को पत्रकार बताते हुए पहले तो अधिकारी पर अपना रौब जमाना चाह लेकिन अधिकारी कौशलेंद्र यादव को इन पर शक होने पर पुलिस को सूचना दी और बिजनौर पुलिस ने इन अवैध वसूली करने वालों को गिरफ्तार कर देर रात सलाखों के पीछे धकेल दिया है।

इन आरोपियों के पास से एक पिस्टल, ६ कारतूस व हॉकी सहित कई डंडे भी बरामद हुए हैं। पुलिस ने इस फर्जी पत्रकार का नाम कुलदीप चौधरी बताया है जो अपने आप को टीवी-99 उत्तराखंड का प्रभारी बता रहा था। वहीं ट्रक ड्राइवर अशोक कुमार की माने तो यह लुटेरे अवैध वसूली के साथ साथ ट्रक लूटने जैसी घटनाओ को अंजाम दिया करते थे और कभी यह अपने को आर.टी.ओ व पत्रकार बताकर रौब गांठते थे। साभार : एनएनआई

टाइम टीवी से बसंत निगम का इस्‍तीफा, दिनेश चंद्रा बने नए स्‍टेट ब्‍यूरो हेड

टाइम टीवी, उत्‍तराखंड से खबर है कि स्‍टेट ब्‍यूरो हेड के रूप में कार्यरत बसंत निगम ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे टाइम टीवी से लगभग पांच सालों से जुड़े हुए थे. अब वे पूरी तरह नेटवर्क 10 से जुड़ गए हैं. बसंत पिछले कई सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वहीं पिछले दिनों नेटवर्क10 से इस्‍तीफा देने वाले दिनेश चंद्रा टाइम टीवी से जुड़ गए हैं. उन्‍हें टाइम टीवी ने स्‍टेट ब्‍यूरोचीफ बनाया है. बसंत की जगह अब दिनेश चंद्रा उत्‍तराखंड में चैनल की जिम्‍मेदारी संभालेंगे.

दिनेश चंद्रा ने अपने करियर की शुरुआत सन 80 में दैनिक आज, कानपुर के साथ की थी. छह साल यहां रहने के बाद दैनिक जागरण, आगरा से जुड़ गए. सन 90 में फिर दुबारा दैनिक आज, कानपुर वापस आ गए. यहां ढाई साल काम करने के बाद सन 93 में स्‍वतंत्र भारत, कानपुर का दामन थाम लिया. यहां से इस्‍तीफा देने के बाद इन्‍होंने कुछ समय तक स्‍वतंत्र पत्रकारिता की. इसके बाद इन्‍होंने एक अखबार का प्रकाशन भी किया. सन 94 में ये दुबारा दैनिक जागरण के साथ मेरठ में जुड़ गए. दो साल बाद ब्‍यूरोचीफ बनाकर इनका तबादला जागरण, देहरादून के लिए कर दिया गया. लगभग दस सालों तक ये देहरादून में ब्‍यूरोचीफ के रूप में अपनी सेवाएं देते रहे. सन 2005 में इनका तबादला दैनिक जागरण, नोएडा कर दिया गया. इनके आने के बाद ही यहां सेंट्रल डेस्‍क की स्‍थापना की गई. यहां पर एनई के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे. दैनिक जागरण से इस्‍तीफा देने के बाद नेटवर्क10 से जुड़े थे, परन्‍तु लांचिंग से पहले ही इन्‍होंने इस्‍तीफा दे दिया था.

विश्‍वविद्यालय के कर्मचारी ने की पत्रकार से अभद्रता, मामला दर्ज

आगरा में पत्रकारों के साथ बुरे बर्ताव का सिलसिला जारी है. मंगलवार को हिंदुस्‍तान एक्‍सप्रेस के पत्रकार नीरज सिंह से विश्‍वविद्यालय के कुलपति के यहां तैनात एक चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी ने अभद्रता कर दी, जिसके बाद एकजुट होकर पत्रकारों इसका विरोध किया है. नीरज सिंह किसी खबर को लेकर कुलपति का वर्जन लेने के लिए उनके कार्यालय गए थे. वो कुलपति के बारे में पूछताछ कर ही रहे थे कि यहां तैनात कर्मचारी विनोद अग्निहोत्री ने नीरज के साथ अभद्रता कर दी.

सूचना मिलने पर तमाम पत्रकार कुलपति कार्यालय पहुंचे उन्‍होंने कुलसचिव एवं कुलपति से मिलकर इसकी शिकायत की. पर विश्‍वविद्यालय के इन अधिकारियों ने पत्रकारों की नहीं सुनी तब पत्रकार आक्रोशित हो गए और उन्‍होंने हरिपर्वत थाने में जाकर कुल‍पति एवं दुर्व्‍यवहार करने वाले चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी विनोद अग्निहोत्री के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई. गौरतलब है कि आजकल आगरा विश्‍वविद्यालय में हालात बेकाबू हैं. विश्‍वविद्यालय में जमकर धांधली चल रही है, जिस पर अधिकारियों को जवाब देते नहीं बन रहा है. ऐसे ही एक खबर के सिलसिले में नीरज विश्‍वविद्यालय पहुंचे थे, जिस पर उनसे अभद्रता की गई. घटना के बाद कुलपति से मिलने वालों में पवन तिवारी, विशाल शर्मा, राहुल सिंघाई, डीके सिंह, नीरज सिंह समेत कई पत्रकार मौजूद रहे.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आध‍ारित.

मशहूर खेल पत्रकार सुभाष कुमार शाम का निधन

मुंबई : मशहूर खेल पत्रकार सुभाष कुमार शाम का सोमवार को दादर पारसी कालोनी स्थित अपने आवास पर निधन हो गया। वह 71 वर्ष के थे। उनके परिवार में उनकी पत्नी हैं। शाम की पत्नी लता ने बताया, ‘मैं सुबह छह बजे लाफ्टर क्लब की मीटिंग में गई थी जब वह सो रहे थे। मैंने लौटकर घंटी बजाई पर उन्होंने दरवाजा नहीं खोला। मैं भीतर गई तो उन्हें मृत पाया।’

शाम ने अपने 50 बरस के करियर में क्रिकेट विश्व कप, टेस्ट मैच, भारतीय टीम का 1985- 86 का ऑस्ट्रेलिया दौरा, दिल्ली एशियाई खेल 1982 और सोल ओलंपिक 1988 कवर किए थे। वह दो दशक तक मुंबई के फ्री प्रेस जरनल के खेल संपादक रहे। वह ‘न्यूज टाइम्स’, ‘इंडियन पोस्ट’ और ‘आब्जर्वर’ से भी जुड़े रहे। साभार : एजेंसी

राजस्थान के वरिष्ठ पत्रकार परमेश्वर द्विरेफ का निधन

झुंझुंनू। राजस्थान के वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार एवं कवि परमेश्वर द्विरेफ का शनिवार को निधन हो गया। वे 83 साल के थे तथा पिछले कुछ समय से वे बीमार चल रहे थे। शनिवार की सुबह तबीयत अधिक बिगडऩे पर उपचार के लिये उन्हें जयपुर ले जाते समय रास्ते में चौमू के पास उनका निधन हो गया। उनके निधन का समाचार मिलने के बाद पत्रकारों व साहित्यकारों में शोक की लहर दौड़ गई।

द्विरेफ ने हमेशा ईमानदारी पूर्वक पत्रकारिता की व पत्रकारों के अधिकारों के लिए सदैव संघर्षशील रहते थे। वो राजस्थान सरकार से अधिस्वीकृत पत्रकार थे। उनके द्वारा लिखी गयी पुस्तक मीरा महाकाव्य को राजस्थान व उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पुरस्कारों से नवाजा गया था। उनकी पुस्तक कमला नेहरू खण्ड महाकाव्य पर पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा उन्हें नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया था। उन्होने धूल के फूल, मरू के टीले सहित कई पुस्तकों की रचना की थी। उन्हें राजस्थान साहित्य अकादमी, जयपुर द्वारा विशिष्ट साहित्यकार सम्मान से भी सम्मानित किया गया था। राजस्थान दिवस समारोह समिति जयपुर की और से उन्हें ताम्र पत्र भेंट किया गया था। द्विरेफ के निधन पर झुंझुंनू प्रेस क्लब के पदाधिकारियों  सहित पत्रकारों व साहित्यकारों ने  गहरा शोक व्यक्त किया है। उनका अन्तिम संस्कार झुंझुंनू जिले के चिड़ावा कस्बे में किया गया। उनके अन्तिम संस्कार में काफी संख्या में पत्रकार व गणमान्य लोग शामिल हुये।

झुंझंनू से रमेश सर्राफ की रिपोर्ट.

शाहजहांपुर के पत्रकार शमिंदर सिंह को मातृशोक

शाहजहांपुर में महामंघा के जिला संवाददाता शमिंदर सिंह वेदी की माता श्रीमती कैलाश कौर का बीते मंगलवार को निधन हो गया। वह अस्‍सी साल की थीं तथा पिछले कुछ समय से सांस की बीमारी से पीडि़त थी। मृदुभाषी पत्रकार शमिन्दर सिंह की माता के निधन का समाचार सुनते ही पत्रकारों व उन के तमाम मिलने वालों में शोक की लहर दौड़ गई। बताते चले कि पत्रकार शमिंदर के पिता सुभाष चन्द्र बोस की आजाद हिन्द फौज के एक वरिष्ठ सैनिक के रूप में कार्य कर चुके हैं। 

श्रीमती कैलाश कौर अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गयी हैं। उनके बडे़ पुत्र रघुवीर सिंह तथा मझले पुत्र कमलजीत सिंह खेती का कार्य देखते है, जबकि रंजीत सिंह वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता हैं। उनकी पुत्रियां श्रीमती भूपेन्द्र कौर व बलविन्दर कौर जालंधर में शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं। श्रीमती कौर का अंतिम संस्कार बुधवार को खन्नौत स्थित मोक्षधाम पर किया गया। उनकी आत्मा की शांति हेतु उनके स्टेशन रोड स्थित निवास स्थान पर 1 दिसम्बर को अखण्ड पाठ रखा गया हैं, जिसका भोग व अंतिम अरदास श्री गुरुद्वारा गुरुनानक आश्रम कुटिया साहिब में 3 दिसम्बर को दोपहर 11 बजे सम्पन्न होगा।

उनके निधन पर उपजा के प्रदेश उपाध्यक्ष मो0 इरफान, अनूप बजापेई, अजय अवस्थी, अम्भुज मिश्रा, सौरभ दीक्षित, जागेन्द्र सिंह, दीप श्रीवास्तव, विनय पाण्डे, संजय श्रीवास्तव, अवनीश मिश्रा, सुदीप शुक्ला, सुशील शुक्ला, वरिष्ठ अधिवक्ता वीरपाल सिंह, अर्जुन श्रीवास्तव, राजबहादुर सिंह, रविन्दर सिंह, सतीश चन्द्रा, के0 दीपक सक्सेना, हेमंत डे, शरद राही सहित तमाम गणमान्य नागरिकों व तमाम संगठनों ने शोक व्यक्त किया है।

गोरखपुर जर्नलिस्‍ट प्रेस क्‍लब का हाल बेहाल, वेलफेयर फंड के पैसे में भी लूट

एक कहावत है कि जिस खेत को उसकी मेड़ ही खाने लगे, तो उस खेत का भगवान ही मलिक होता है। कुछ ऐसा ही गोरखपुर में गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब नामक संस्था में हो रहा है, जहां और कुछ हो या ना हो, पत्रकारों के हित पर डाका तो जोरदार पड़ रहा है। यहां अभी 16 अक्तूबर को चुनाव हुए हैं, पर नयी कार्यकारिणी अभी नया कुछ कर ही नहीं पायी, उसे तो पिछली कार्यकारिणी के कारनामों को ही भुगतना पड़ रहा है। तीन मामले ही पूरी कहानी बयां करने को काफी हैं।

नंबर एक : मामला कुछ यूं है। गोरखपुर में प्रेस क्लब के नाम से पहचानी जाने वाली गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब का चुनाव गत 16 अक्तूबर 2011 को हुआ। इसमें एसपी सिंह अध्यक्ष और अजीत यादव उपाध्यक्ष चुने गये। अघोषित पैनल बना कर लड़े गये इस चुनाव में मंत्री पद पर इनके सहयोगी प्रत्याशी मारकंडेय मणि त्रिपाठी चुनाव हार गये। दैनिक नई दुनिया, लखनऊ और इंडिया टुडे से खुद को फोटोग्राफर के रूप में जुड़ा बताने वाले श्री मारकंडेय मणि पिछली कार्यकारिणी में कोषाध्यक्ष थे। मामला इन्हीं से जुड़ा हुआ है। इस संस्था में सदस्य पत्रकारों के लिये वेलफेयर फंड का भी एक खाता है, हालां कि हर वर्ष लाखों की आमदनी के बाद भी इस फंड में धन के नाम पर कौड़ी भी नहीं होती। पिछली कार्यकारिणी में सदस्य रहे राष्ट्रीय सहारा के पत्रकार श्री पी.पी.एन. उपाध्याय के पेट का ऑपरेशन हुआ था, जिसकी मदद के नाम पर पिछली कार्यकारिणी ने चुनाव के पूर्व उन्हें 10 हजार का चेक दिया था, साथ ही उनसे यह भी कहा गया कि खाते में पैसा नहीं है, अभी चेक ना लगायें। यह बात श्री उपाध्याय को काफी नागवार गुजरी तो उन्हों ने चुनाव के एक दिन पूर्व 15 अक्तूबर को आन्ध्रा बैंक का चेक संख्या 860326 दिनांक 10.08.11 श्री मणि को वापस कर दिया।

श्री उपाध्याय के अनुसार श्री मणि ने उनसे कहा कि वो उसी दिन शाम तक नगद राशि दे देंगे। मंत्री पद के चुनाव में श्री मणि हार गये और श्री उपाध्याय ने मामला खतम समझ लिया। पर नवंबर में उन्हें वर्तमान कार्यकारिणी के मंत्री से पता चला कि उनके नाम से जारी चेक से पैसा तो 25 अक्तूबर को ही निकाल लिया गया। इस बात से अवाक श्री उपाध्याय ने संस्था को लिख कर जानकारी दी कि उन्हों ने श्री मणि को चेक वापस कर दिया था, पता किया जाये कि उनके नाम पर पैसा कैसे निकला? श्री उपाध्याय के पत्र पर राष्ट्रीय सहारा के ही वरिष्ठ पत्रकार श्री धूर्जटी भूत भावन मिश्र ने गवाही भी किया कि उनके सामने ही श्री उपाध्याय ने श्री मणि को चेक दिया था। मामला यहीं से गरम हो गया। हल्ला मचा तो जांच की प्रक्रिया चली, जिस पर बैंक से चेक की छायाप्रति निकली, तो उस पर हिन्दी में सीधे-सीधे पी.पी.एन. उपाध्याय लिखा था तथा हस्ताक्षर को श्री मणि और तत्कालीन अध्यक्ष श्री अशोक अज्ञात ने प्रमाणित भी किया था। श्री उपाध्याय हस्ताक्षर को सीधे-सीधे फ्राड बता रहे हैं। उधर पहले तो श्री मणि ने कहा कि पैसा श्री उपाध्याय ने ही निकाला है, पर पता चला है कि अब वे कह रहे हैं कि उन्हों ने श्री उपाध्याय के आवेदन को प्रमाणित करने वाले श्री मिश्र को चेक दे दिया था। यानी उनके अनुसार कहीं ना कहीं पैसा निकालने में श्री मिश्र भी जिम्मेदार हैं। तमाम कयासों के बीच यक्ष प्रश्न यह है कि अगर श्री उपाध्याय सच बोल रहे हैं कि उन्हों ने चेक श्री मणि को दिया, तो उसे किसने कैश कराया? साथ ही श्री मणि ने और श्री अज्ञात ने किसके हस्ताक्षर को प्रमाणित किया? 16 अक्तूबर को जब श्री मणि चुनाव हार गये, तो उन्हों ने संस्था को चेक वापस ना कर कथित तौर पर श्री भूत भावन मिश्र को क्यों दिया? फिलहाल यह मामला काफी गरम है, और क्लब ने अपना पल्ला झाड़ते हुए इसकी जांच के लिये 5 सदस्यीय कमेटी बना दी है, विडंबना है कि इस जांच कमेटी के एक सदस्य पर कई वर्ष पूर्व इसी संस्था से 10 हजार लेकर भुगतान ना देने का आरोप अभी भी जिन्दा है। श्री उपाध्याय इस बात पर जिद में हैं, और वे मामले में निष्पक्ष कार्रवाई ना होने पर मामले की प्राथमिकी भी दर्ज कराने पर आमादा हैं, हालांकि उन पर मामला वापस ले लेने का भरपूर दबाव भी पड़ रहा है।

नंबर दो : यह मामला भी पिछली कार्यकारिणी के समय का ही है। गोरखपुर मंडल में बाल जगत की पत्रकारिता के जनक बाल स्वर साप्ताहिक के संपादक श्री राजेश श्रीवास्तव को पिछले दिनों किडनी की परेशानी हो गई थी। मंहगे और काफी दिक्कतों के इस इलाज के लिये गोरखपुर की एक अन्य पत्रकार संस्था ने लगभग ढाई लाख की रकम जुटा कर उसे श्री श्रीवास्तव के स्टेट बैंक के खाते में जमा करा दिया। इसी क्रम में गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब ने भी कुछ धन जमा करने की घोषणा की। सदस्यों से कोषाध्यक्ष श्री मणि और अध्यक्ष श्री अशोक अज्ञात ने सदस्यों और शुभ चिन्तकों से सहयोग मांगा, धन देने वालों को कच्ची रसीद भी दी जा रही थी। कुछ लोगों के अनुसार 50 हजार की रकम एकत्र हुई, कुछ का दावा है कि 75 हजार आये, कौन सच कौन झूठ यह तो पता नहीं, पर कुछ धन तो एकत्र हुआ, और कटु सत्य तो यह है कि जानलेवा बीमारी से जूझ रहे श्री श्रीवास्तव को एक पैसा भी नहीं मिला। उन्हें इस संस्था से मात्र 10 हजार का एक चेक मिला, जिसे श्री श्रीवास्तव के नाम से श्री चित्रगुप्त सभा ने एकाउंट पेयी जारी किया था। चर्चा तो यह भी है कि अगर यह चेक भी बियरर होता, तो श्री श्रीवास्तव इसमें से भी कुछ नहीं पाते। अब पता चला है कि श्री श्रीवास्तव भी संस्था को लिख कर पूछने जा रहे हैं कि उनके नाम पर कितना धन आया, किसने एकत्र किया और वह राशि कहां है, उन्हें दी जाये।

और चलते चलते : गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब की वर्तमान कार्यकारिणी के एक पदाधिकारी पर चुनाव जीतने के बाद शहर के प्रमुख बाजार गोलघर स्थित एक गेस्ट हाउस में शराब पीकर हंगामा मचाने का मामला कैण्ट थाने में दर्ज है, हालांकि यहां भी मामला दबाने का काफी प्रयास हुआ था, दुर्भाग्य से पूरा प्रकरण सीसी टीवी में कैद हो गया था। पर जुगाड़ के माहिर पत्रकारों ने मामले को अखबार मे आने से रोक कर अपनी थोड़ी सी भद तो बचा ही ली। अब देखना है कि संस्था के संविधान के अनुसार किसी आपराधिक मामले में अभियुक्त बनने के बाद यहां ना केवल पद से इस्तीफे का प्रावाधान है, वरन मामला सच पाये जाने पर प्राथमिक सदस्यता से भी हटाये जाने का प्रावधान है। यहां क्या होता है? क्या संविधान का पालन होगा, या संविधान बदला जायेगा? साथ ही अब यह भी देखना है कि इसी संस्था के मंच से बड़ी-बड़ी बातें करने वाले यहां के तमाम दैनिक अखबारों के संपादक अपनी इस संस्था को बेदाग बनायेंगे, या भ्रष्टाचार मिटाने यहां भी किसी अन्ना को आना पड़ेगा।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

पत्रकारिता विश्‍वविद्यालय के छात्र-कर्मचारी में मारपीट का मामला दर्ज

रायपुर। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में 23 नवम्‍बर कर्मचारी और छात्र के बीच हुई मारपीट में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इसमें दोनों पक्षों की ओर से थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसमें विवि के कुलसचिव की रिपोर्ट पर दो छात्रों के खिलाफ मारपीट, गाली-गलौज व शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने का मामला टिकरापारा थाने में दर्ज किया गया है। वहीं पीएचडी के छात्र कमल ज्योति की रिपोर्ट पर अजाक थाने में शिकायत दर्ज कर जांच चल रही है।

गौरतलब है कि बुधवार की दोपहर बाद पीएचडी में अध्ययनरत छात्र कमल ज्योति व अन्य एक छात्र जितेन्द्र सोनकर सूचना के अधिकार के तहत किसी जानकारी को प्राप्त करने कुलसचिव कार्यालय पहुंचे थे। जहां कुलसचिव के निजी सचिव कमल मरकाम, कर्मचारी भुनेश्वर चौधरी व कार्यालय सहायक भागवत नायक काम कर रहे थे। इसमें कर्मचारी नायक ने छात्रों से कहा कि वह कम्प्यूटर में काम कर रहे हैं, जिसे पूरा करने के बाद आवेदन को स्वीकार करेंगे। छात्र उनसे आवेदन रिसीव करने को कहने लगे। इसके बाद इन लोगों में विवाद हो गया। जिसमें कमल ज्‍योति को चोटें आईं। कमल ज्‍योति ने अनुसूचित जाति थाने में अपनी शिकायत दर्ज कराई। बाद में कुलसचिव ने शुक्रवार को टिकरापारा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। इसमें पुलिस आरोपी छात्र जितेन्द्र सोनकर व कमल ज्योति के खिलाफ मारपीट, गाली-गलौज सहित शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने का अपराध दर्ज कर जांच कर रही है।

इधर अजाक थाने में छात्र कमल ज्योति ने कुलसचिव डीएन वर्मा तथा कर्मचारी आकाश चंद्रवंशी के खिलाफ मारपीट व गाली-गलौज करने की शिकायत दर्ज कराई है, जिसे संज्ञान में लेकर जांच की जा रही है। लेकिन छात्र की रिपोर्ट पर प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। बताया गया है कि मारपीट की घटना में छात्र कमल ज्योति को पीठ-पेट में गंभीर मार लगी है, जिसे उपचार के लिए अंबेडकर अस्पताल के ट्रामा यूनिट में भर्ती कराया गया है। जहां छात्र की स्थिति व स्थिर बताई गई है। पुलिस का कहना है कि छात्र का मुलाहिजा कराया गया है, जिसमें मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद आगे कार्रवाई की जाएगी। खबर है कि छात्र कमल ज्योति विवि के हॉस्टल में निवास करता है, जो मूलत: कोरबा का रहने वाला है। छात्र हॉस्टल की अव्यवस्था को लेकर आपत्ति व शिकायत दर्ज कराने कुलसचिव के पास पहुंचा था। इसी के चलते मारपीट की घटना हुई।

आदिवासी प्रदेश के विवि में आदिवासियों के लिए जगह नहीं

: रायपुर के कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विवि के पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में सामने आयी गडबड़ी : इसे विवि की लापरवाही कहिये या फिर शासन की कमजोरी कि आदिवासी बाहुल्य वाले राज्य छत्‍तीसगढ़ में आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को अपने ही प्रदेश में संविधान में वर्णित आरक्षण का लाभ नहीं मिल पा रहा है। शासन द्वारा विशेष वर्गों में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के तमाम प्रयासों पर किस तरह पानी फेरा जा रहा है इसका उदाहरण पत्रकारिता विवि में पीएचडी कोर्स के  प्रवेश में बरती गई लापरवाही से सामने आ रही है। आरक्षित वर्ग के अनेक अभ्यर्थियों ने पीएचडी प्रवेश में आरक्षण रोस्टर का पालन नहीं करने के साथ धांधली का आरोप लगाया है। चयन से वंचित छात्रों ने छग राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग और राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग में मामले की शिकायत की है।

कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विवि में हाल ही में शुरू किए गए पीएचडी कोर्स विवादों में घिर गया है। आरक्षित वर्गों के छात्रों ने विवि प्रशासन पर आरोप लगाया है कि पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में यूजीसी द्वारा निर्धारित नियमों की अनदेखी कर चयन सूची जारी किया गया है। छ.ग. के अभ्यर्थियों की बजाय आरक्षित सीटों में बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ देने का भी आरोप लगाया हैं। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विवि नियुक्ति संबंधी मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ हैं कि जनसंचार विभाग में हाल ही में शुरू किया गया पीएचडी कोर्स को लेकर विवाद सामने आने लगा हैं।

विवि में पिछले तीन वर्षों से पीएचडी प्रवेश की प्रक्रिया जारी थी। यूजीसी मापदंडों के अनुरूप तथा अन्य कई खामियों की वजह से 2011 में उक्त प्रक्रिया पूरी हो पाई। इसके लिए प्रवेश परीक्षा का आयोजन भी किया गया। प्रवेश से वंचित छात्रों में निलीमा मिंज, जितेन्द्र सोनकर और नरेश कुमार साहू ने बताया कि विवि ने आरक्षण रोस्टर को दरकिनार कर दिया है। अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग आयोग को किए गए शिकायत में उनका कहना हैं कि यूजीसी द्वारा समस्त विवि में पीएचडी व एमफिल में प्रवेश के लिए गजट प्रकाशित करने का नियम बनाया हैं, यूजीसी 2009 नियम का जिक्र करते हुए छात्रा नीलिमा मिंज ने बताया कि उक्त नियम में स्पष्ट उल्लेख हैं कि पीएचडी के लिए संबंधित विवि राज्य के आरक्षण नियम का पालन करें और निर्धारित सीट का प्रचार प्रसार कर उतनी ही सीट पर प्रवेश दें, लेकिन विवि प्रशासन ने सभी नियमों को ताक पर रख दिया और प्रवेश के दौरान आरक्षण सीट का उल्लेख नहीं किया।

शिकायतकर्ताओं का यह भी कहना हैं कि विवि ने आराक्षित सीट में अन्य राज्य के अभ्यर्थियों को प्रवेश दिया हैं, कुछ आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी ऐसे भी हैं जिनके अंक अधिक होने के बावजूद सामान्य वर्ग में उन्हें प्राथमिकता नहीं दी गई। शिकायतकर्ता ने छ.ग. में खासकर कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विवि में आरक्षित वर्ग के साथ अन्याय का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की हैं। इधर अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग में भी शिकायत करते हुए छात्र जितेंद्र सोनकर, नरेश कुमार साहू ने कहा है कि पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में चहेतों को जान बूझकर लाभ पहुंचाया गया है। बताया गया कि ओबीसी की सीट पर अन्य राज्य के अभ्यर्थी को प्रवेश देकर छत्‍तीसगढिय़ों के हित को मार दिया गया है। जनसंचार विभाग से जब 6 सीट पर विज्ञापन जारी किया गया, जिसमें आरक्षण उल्लेख होना चाहिए था लेकिन अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए 10 सीट में प्रवेश दिया गया हैं। सूचना का अधिकार से प्राप्त दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद अनुसूचित जाति के छात्र मनोज ने कहा कि अनुसूचित जाति के उम्मीदवार का अंक अधिक होने पर उसे सामान्य वर्ग में रखा जाना चाहिये था लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

छात्रा नीलिमा का कहना हैं कि जनसंचार विभाग में पीएचडी के लिए कुल 59 अभ्यर्थी परीक्षा के लिए नामांकित किए गए थे, जिसमें से आदिवासी उम्मीदवारों में अनुसूचित जनजाति की वह अकेली उम्मीदवार थी। पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में विवि द्वारा यदि परीक्षा से पूर्व आरक्षण रोस्टर बना लिया जाता तो उनका दाखिला सुनिश्चित हो जाता। विवि ने परीक्षा में शामिल कर लिया, पर प्रवेश परीक्षा में फेल कर अनुसूचित जनजाति वर्ग के सीट को विलोपित करने जैसा काम किया। चूंकि इस वर्ग की वह अकेली छात्रा थी इस लिहाज से उसका प्रवेश बिना परीक्षा के निर्विरोध होना था, नहीं तो आरक्षित वर्ग की सीट रिक्त रखने चाहिए थी।

पत्रकारिता विवि में लंबे समय से पीएचडी प्रवेश की प्रक्रिया जारी थी, जिसके लिए अनेक छात्रों ने तैयारी की थी। खास बात यह है कि कुषाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विवि के उन डिग्रीधारियों छात्रों का दाखिला यहां नहीं हो सका जिन्हों ने यहां रहकर पढ़ाई किया जबकि अन्य राज्य के ओपन विवि से एक वर्षीय मास्टर डिग्री दूरवर्ती मोड से परीक्षा पास करने वाले ही विवि द्वारा आयोजित पीएचडी प्रवेश परीक्षा में पास हो सके हैं, जिनका दाखिला हुआ है उनका संम्बंध पहले से विवि से है। छात्रों का संदेह प्रवेश प्रक्रिया में धांधली का है।

पत्रकारिता विश्वविद्यालय में पीएचडी कोर्स के लिए दस उम्मीदवारों का चयन किया गया। सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी से खुलासा हुआ कि यूजीसी के निर्देशों और आरक्षण नियमों को ताक पर रख विश्वविद्यालय में प्रभाव रखने वाले पत्रकारों और अफसरों के रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाया गया है। कीर्ति सिसोदिया सामान्य वर्ग – मप्र, संजय कुमार ओबीसी- बिहार, राजेश कुमार ओबीसी- बिहार, राकेश कुमार पाण्डेय सामान्य- उप्र, उदय नारायण त्यागी एससी- मप्र, कमल ज्योति जाहिरे एससी- छग, विभाष कुमार झा- सामान्य छग, नृपेन्द्र कुमार शर्मा सामान्य- छग, राजेन्द्र मोहंती – सामान्य,उड़ीसा व रश्मि वर्मा एससी- दिल्ली के निवासी का चयन हुआ है। जबकि नियमों के तहत राज्य के संस्थानों में नौकरी और उच्च शिक्षा के लिए राज्य के आरक्षण रोस्टर का पालन करना अनिवार्य है।

छह लोगों ने बारह घंटे तक किया महिला पत्रकार का यौन शोषण

काहिरा :  मिस्र में रिपोर्टिंग के लिए गई एक अमेरिकी मूल की पत्रकार ने अपने साथ यौन शोषण की बात उजागर की है। मोना एल्टाहावी नाम की इस महिला पत्रकार का दावा है कि काहिरा में मिश्र सुरक्षा बल ने बुधवार रात को उन्हें जबरदस्ती कैद में रखा और उनका यौन शोषण किया। मोना पिछले दिनों से भड़के विद्रोह की रिपोर्टिंग के लिए काहिरा आई हुई हैं। मोना ने बताया कि उन्हें 12 घंटे तक आंतरिक मंत्रालय और मिलिट्री इंटेलिजेंस ने हिरासत में रखा। इस दौरान उनके साथ पांच से छह आदमियों ने उनका यौन शोषण किया।

"लगभग 5-6 आदमी मुझे घेरे हुए थे और मेरे जननांगों को छूने का प्रयास कर रहे थे। उन्होंने मेरी आंखों पर पट्टी बांध रखी थी। वो पिछले 12 घंटे बहुत भयावह और दर्द भरे थे," मोना ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर कहा। मोना ने अपनी ट्वीट में बताया, "12 घंटे तक प्रताड़ना देने के बाद उन्होंने मुझे सॉरी कहा और रिहा कर दिया। उन्होंने मुझे हिरासत में क्यों रखा था इसका कारण उन्होंने नहीं बताया। अस्पताल में जांच करवाने के बाद मुझे पता चला की मेरे दोनों हाथों में गंभीर चोटें आई हैं।" एल्टाहावी न्यूयॉर्क की एक फ्रीलांस जर्नलिस्ट हैं । उन्होंने द गार्जियन, द वाशिंगटन पोस्ट और द इंटरनेशनल हेराल्ड ट्रिब्यून जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के लिए लेख लिखे हैं। साभार : भास्‍कर

ओबामा के नाम पर न्‍यूज एंकर ने किया अश्‍लील इशारा

लंदन. एक रूसी न्यूजरीडर ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का नाम लेते समय अभद्र इशारा कर सनसनी मचा दी है। अपनी इस हरकत से जानीमानी पत्रकार तात्याना लिमानोवा ने एक संदेश दिया है। तात्याना रूसी टीवी चैनल रेन टीवी की मशहूर पत्रकार हैं। उन्होंने एशिया पेसिफिक इकॉन्मिक कोऑपरेशन सम्मेलन पर खबर पढ़ते समय जब बराक ओबामा का नाम लिया, तो साथ ही अपनी मिडिल फिंगर दिखाकर अश्लील इशारा भी किया।

रूसी राष्ट्रपति दिमित्रि मेदवेदेव इस सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे, इस बात को कहते हुए तात्याना नीचे देख रही थीं। नीचे देखते हुए ही जब ओबामा का नाम खबर में आया तो उन्होंने अपनी उंगली दिखाते हुए अश्लील इशारा किया। उल्लेखनीय है कि पिछले सम्मेलन की अध्यक्षता अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा ने की थी। लिमानोवा के टीवी चैनल ने उनकी इस हरकत पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।

रूस में मीडिया सरकार के नियंत्रण में रहता है। लेकिन रेन टीवी एकमात्र ऐसा न्यूज चैनल है जो सबसे ज्यादा स्वतंत्र और उदारवादी है। डेली मेल में छपी रिपोर्ट के मुताबिक तात्याना पर इस हरकत के लिए टीवी चैनल द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। ओबामा और मेदवेदेव के बीच संबंध कुछ खास अच्छे नहीं रहे हैं। साभार : भास्‍कर

पत्रकार को जान से मारने की धमकी, पुलिस ने नहीं की कार्रवाई

झाबुआ : पेटलावद पत्रकार संघ सदस्य प्रवीण बसेर को घुघरी उपस्वास्थ्य केंद्र में तैनात एएनएम व उसके पुत्र ने जान से मारने की धमकी दी। श्री बसेर ने सारंगी चौकी पर 4 नवम्बर को इसके लिए आवेदन दिया था, किंतु आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस संबंध में तहसील पत्रकार संघ ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन अनुविभागीय अधिकारी विष्णु कमलकर को सौंपा। इस मौके पर जिला पत्रकार संघ के महासचिव हरिशंकर पंवार, तहसील पत्रकार संघ अध्यक्ष वीरेंद्र भट्ट सहित बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

जेलर ने पत्रकारों को गरियाया और फंसाने की धमकी भी दी

देवघर (झारखण्ड) जेल के जेलर ब्रजेश मिश्रा ने समाचार पत्रों के प्रतिनिधियों को हड़काया. हड़काया क्या गाली-ग्‍लौज और मारपीट करने की धमकी भी दी. मामला कुछ यूँ है. देवघर जेल में मौजूद अनियमितताओं, कैदियों को घटिया खाना परोसने और ईलाज के अभाव में एक कैदी की मौत को लेकर स्‍थानीय अखबारों ने काफी कुछ लिखा, जिसके बाद पूरे जेल में हडकंप मच गया. इसी मामले की जांच करने के लिए एक प्रशासनिक टीम का गठन किया गया था.

जब यह टीम जांच के लिए जेल पहुंची, तभी समाचार संकलन के उद्देश्य से कुछ पत्रकार भी पहुँच गए. इन पत्रकारों को देखकर जेलर 'साब' का पारा गर्म हो गया. उन्होंने वहीँ पर पत्रकारों को गाली देना शुरू कर दिया और तत्काल ही मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों को यह भी आदेश दिया की पत्रकारों को धक्के देकर बाहर निकाल दें. जेलर के व्यवहार से हतप्रभ पत्रकारों ने जब इस घटना का विरोध किया तब जेलर ने उन्हें झूठे केस में फंसाने की धमकी दे डाली. जांच टीम के पहुंचने के समय प्रभात खबर समेत कुछ अन्‍य अखबारों के चार पत्रकार मौजूद थे.

पत्रकारों ने घटना की जानकारी देवघर जिला प्रशासन को दे दी. वहीँ स्थानीय पत्रकारों ने एक बैठक कर घटना की निंदा की है. बैठक में मुख्य रूप से संजय मिश्र, धनंजय भारती, जीतेन्द्र कुमार सिंह, संजीत मंडल, शैलेन्द्र मिश्र, राकेश पुरोहितवार, आशीष कुंदन व मनोज केशरी मुख्य रूप से उपस्थित थे.

एमपी के वरिष्‍ठ पत्रकार प्रकाश उपाध्‍याय का निधन

मध्‍य प्रदेश के रतलाम से खबर है कि वरिष्‍ठ पत्रकार प्रकाश उपाध्‍याय उर्फ बाबूजी का बुधवार को निधन हो गया. वे 79 वर्ष के थे. इन दिनों वे पीटीआई से जुड़े हुए थे. वे पिछले कुछ समय से अस्‍वस्‍थ चल रहे थे. उनकी अंतिम यात्रा गुरुवार को होटल अजंता पैलेस के पास अरावली अपार्टमेंट, रतलाम स्थित निवास से निकली. उनका अंतिम संस्‍कार त्रिवेणी मुक्तिधाम श्‍मशान घाट पर किया गया. बाबूजी अपने पीछे दो पुत्रों का भरा पूरा परिवार छोड़कर गए हैं. इनके छोटे पुत्र भी पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं.

प्रकाश उपाध्‍याय मध्‍य प्रदेश के वरिष्‍ठ पत्रकारों में से एक थे, जिन्‍हें एमपी के तमाम पत्रकार, राजनेता बाबूजी ने नाम से जानते थे. वे रतलाम में दैनिक जागरण और नई दुनिया के लम्‍बे समय तक ब्‍यूरोचीफ रहे. 'नईदुनिया' से पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले श्री उपाध्याय वर्तमान में पीटीआई-भाषा के संवाददाता थे. यद्यपि प्रकाश उपाध्याय का कार्य क्षेत्र मुख्यतः रतलाम रहा, लेकिन मप्र और खास कर मालवा-निमाड़ अंचल की हिन्दी पत्रकारिता में वे एक लोकप्रिय और प्रतिष्ठित पत्रकार तथा कुशल राजनीतिक विश्लेषक के रूप में जाने-पहचाने जाते थे.  राजनीतिक और प्रशासनिक क्षेत्र में उनकी खासी पकड़ थी. रतलाम का पत्रकार जगत और उनका बड़ा मित्र वर्ग उन्हें 'बाबूजी' संबोधित कर आदर व सम्मान देता था.

उनके संपर्क सूत्र इतने भरोसेमंद, जीवंत और व्यापक थे कि रतलाम स्टेशन से गुजरने वाली किसी भी ट्रेन में अगर कोई वीआईपी या वीवीआईपी सफर कर रहा हो तो उन्हें इसकी सूचना मिल जाती थी. प्रकाशजी तुरंत स्टेशन पहुँच कर उस अतिथि से अखबार के लिए बातचीत करने में पीछे नहीं रहते थे. कई बार तो उन्होंने चलती ट्रेन में बैठ कर ही इंटरव्यू लिए और कार्य पूरा होने पर अन्य ट्रेन से वापस रतलाम लौट आते थे. प्रकाशजी सालों तक पीटीआई (प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया) के संवाददाता भी रहे. वे रतलाम के विधि महाविद्यालय की संचालन समिति से भी जुड़े थे, इसी वर्ष प्रदेश के कुलाधिपति द्वारा विक्रम विवि की कार्य परिषद का सदस्य भी मनोनीत किया गया था.

डॉ. मधुकर तिवारी को पं. तीर्थराज तिवारी स्मृति पत्रकारिता सम्मान

जौनपुर में पी.टी.आई. के संवाददाता डॉ.मधुकर तिवारी को बुधवार को समरस फाउण्डेशन मुम्बई द्वारा पं. तीर्थराज तिवारी स्मृति पत्रकारिता सम्मान प्रदान किया गया। यह पत्रकारिता सम्मान जौनपुर में 35 वर्षो तक पी.टी.आई. के संवाददाता रहे स्व. पं. तीर्थराज तिवारी की स्मृति में हर वर्ष समरस फाउण्डेशन द्वारा दिया जाता है। सम्मान समारोह स्व.पं. तीर्थराज तिवारी के जन्मभूमि व कर्मभूमि घनश्‍यामपुर, जौनपुर में आयोजित किया गया, जिसमें क्षेत्रीय नागरिकों के अलावा पत्रकारों ने भाग लिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व सांसद कमला प्रसाद सिंह ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि स्व.पं. तीर्थराज तिवारी ने जीवन पर्यन्त पत्रकारिता के जरिए समाज के सच को उजागर किया और हर सम्भव लोगों की मदद किया। उन्होंने अपने निश्‍चल व्यक्तित्व से समाज में अपना अलग स्थान बनाया। पं. तीर्थराज तिवारी स्मृति पत्रकारिता सम्मान के लिए समरस फाउण्डेशन, मुम्बई के शिवपूजन पाण्डेय सहित सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए जौनपुर के पी.टी.आई. के संवाददाता डॉ. मधुकर तिवारी ने कहा कि पं. तीर्थराज तिवारी पत्रकारों के लिए आईना थे। उनकी लेखनी हर वर्ग को न्याय दिलाने और जनसमस्याओं को उजागर करने के लिए जीवन पर्यन्त चलती रही। उनके कार्यों से उनकी लोकप्रियता इस कदर थी कि वह जिस भी समाज में जाते वहां के ही हो जाते थे।

वरिष्‍ठ पत्रकार चंद्रेश मिश्र ने सम्मानित हुए पत्रकार डॉ. मधुकर तिवारी को संस्कार मूर्ति की संज्ञा देते हुए कहा कि इस सम्मान के अनुकूल ही व्यक्ति का चयन हुआ है। उन्होंने पंडित तीर्थराज तिवारी का स्मरण करते हुए कहा कि उनकी पहचान से पी.टी.आई. को जौनपुर में जाना गया। लोग उन्हें प्यार से पीटीआई गुरु कहा करते थे। इस अवसर पर पूर्व ब्लाक प्रमुख ओमप्रकाश सिंह, प्रधानाचार्य शशि भूषण मिश्र आदि ने संबोधित किया। संचालन कार्यक्रम के संयोजक समरस फाउण्डेशन मुम्बई के शिवपूजन पाण्डेय ने किया। इस अवसर पर बदलापुर और खुटहन के आंचलिक पत्रकारों को शाल देकर सम्मानित किया गया।

ज्ञात हो कि समरस फाउण्डेशन, मुम्बई द्वारा पं. तीर्थराज तिवारी स्मृति पत्रकारिता सम्मान के लिए इस वर्ष चयनित हुए पत्रकार डॉ. मधुकर तिवारी दैनिक अमर उजाला और हिन्दुस्तान के जौनपुर में ब्यूरो चीफ रहे हैं। वह आकाशवाणी के भी संवाददाता भी रहे हैं। पं. तीर्थराज तिवारी के निधन के बाद उनको पी.टी.आई. का जौनपुर का संवाददाता बनाया गया। वह जौनपुर पत्रकार संघ के महामंत्री भी रहे हैं। जौनपुर के पत्रकारों में उनकी गिनती एक अच्छे व्यक्तित्व के रुप में होती है। प्रेस विज्ञप्ति

अनिल द्विवेदी चंदूलाल चंद्राकर पत्रकारिता पुरस्‍कार से सम्‍मानित

रायपुर। छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार अनिल द्विवेदी को इस वर्ष का ‘चंदूलाल चंद्राकर पत्रकारिता पुरस्कार’ दिया गया है. चार सदस्यीय जूरी ने उनके नाम पर मुहर लगाई और ‘राज्योत्सव’ के समापन अवसर पर राजधानी रायपुर में पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरलीमनोहर जोशी, मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने उन्हें सम्मानस्वरुप राज्य अलंकरण, श्रीफल-शाल तथा पचास हजार रूपए देकर सम्मानित किया.

अनिल द्विवेदी को जिस प्रकाशित स्टोरी पर इनाम मिला है, उसके मुताबिक बस्तर की गरीब आदिवासी बच्चियां, अपने माता-पिता को नक्सली हमलों में खोने के बाद भी साहस और धैर्य के साथ आगे बढ़ रही हैं और कई क्षेत्रों में कीर्तिमान रच रही हैं. अनिल द्विवेदी, देश की प्रतिष्ठित समाचार पत्रिका ‘द सन्डे इंडियन’ जो चौदह भाषाओँ में प्रकाशित होती है- के छत्तीसगढ़ में विशेष संवाददाता हैं.

देश विदेश के पांच सौ से अधिक पत्रकार कुशीनगर पहुंचे

: भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण मंदिर का दर्शन किया : गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी सांसद एवं हिन्दू युवा वाहिनी के संरक्षक योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में देश-विदेश के 500 से अधिक पत्रकारों का एक दल कुशीनगर पहुंचा और यहां भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण मंदिर, रामाभार स्तूप का दर्शन किया। इस अवसर पर योगी आदित्यनाथ ने महापरिनिर्वाण मंदिर स्थित भगवान बुद्ध की लेटी प्रतिमा पर चीवर भी चढ़ाया और कहा कि बुद्ध के उपदेशों को आत्मसात करने वाले व्यक्ति का सर्वत्र मंगल ही होगा।

सोमवार को लगभग 12 बजे योगी आदित्यनाथ के साथ पत्रकारों के वाहनों का काफिला कुशीनगर पहुंचा और सीधे रामाभार स्तूप गया। यहां योगी आदित्यनाथ सहित अन्य वरिष्ठ पत्रकारों ने रामाभार स्तूप के महत्व आदि की जानकारी ली और स्तूप की परिक्रमा की। इसके उपरान्त ये सभी मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर आए, जहां योगी आदित्यनाथ, इंडियन फेडरेशन आफ वर्किग जर्नलिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष के. विक्रम राव, रामकोला विधायक अतुल सिंह एवं पत्रकारों द्वारा तथागत की लेटी प्रतिमा पर चीवर भिक्षु शीलप्रकाश उर्फ चश्मा बाबा के निर्देशन में चढ़ाया गया। यहां भिक्षु शील प्रकाश ने योगी आदित्यनाथ को तथागत की लेटी प्रतिमा का दर्शन विभिन्न कोणों से कराते हुए उन्हें यह जानकारी दी कि हर कोण से तथागत की प्रतिमा का अलग भाव दिखाई पड़ता है।

योगी आदित्यनाथ सहित सभी पत्रकारों ने तथागत की प्रतिमा के पैर में बने चक्र को देखा और अभिभूत हुए बिना नहीं रह सके। बाहर निकलने पर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भगवान राम और भगवान बुद्ध भारत की पहचान हैं। भगवान बुद्ध ने सनातन धर्म की रूढ़ियों एवं विसंगतियों को दूर करने के लिए नये धम्म के मार्ग को सुझाया। बुद्धम् शरणम् गच्छामि का अर्थ विवेक की शरण में जाना। धम्मम् शरणम् गच्छामि का अर्थ धर्म के शरण में जाना। संघम् शरणम् गच्छामि का अर्थ संगठन द्वारा शक्ति को बनाना। इन तीनों सूत्रों को अपनाकर वर्तमान समय की तमाम समस्याओं और विसंगतियों से मुकाबला किया जा सकता है।

इस दौरान वरिष्ठ पत्रकार परमानन्द पाण्डेय, के. तिवारी, योगेन्द्र मिश्र, श्रीलंका के पत्रकार दामिनी रणसिंघे, दया परेरा, अनिल लसाथ परेरा, इस्टैनली पतिराज आदि पत्रकारों के अलावा ई. रवीन्द्र प्रताप, विधायक विजय बहादुर यादव, विशाल सिंह, डा. विभ्राटचन्द कौशिक, हियुवा प्रदेश प्रभारी राघवेन्द्र प्रताप सिंह, प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह, प्रदेश महामंत्री रामलक्ष्मण, महेन्द्रपाल सिंह, गोरख सिंह, आनन्द शाही, अरूणोश शाही, महंथ रवीन्द्रनाथ, वैभव श्रीवास्तव, गजेन्द्र प्रताप सिंह, श्रवण सिंह, गिरधारी प्रजापति, राकेश बघेल, ओमप्रकाश वर्मा, अजय गोविन्द राव शिशु, चन्द्रप्रकाश यादव चमन, पप्पू पाण्डेय, राजेर सिंह, राणा प्रताप राव, सुनील वर्मा, प्रमिल गुप्ता, सुबोध राव, सुशील भारती, अमरचन्द हिन्दुस्तानी, दिनेश सिंह सैंथवार, ई. अशोक शाही, दुर्गेश बजाज, बृजेश यादव, शशांक वर्मा, अवधेश सिंह, मोनू सिंह, डंडा बाबा सहित पत्रकार हियुवा एवं विहिम के कार्यकर्ता व पदाधिकारी मौजूद रहे।

इसी क्रम में गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में कुशीनगर भ्रमण करने आये पत्रकारों के दल में शामिल उड़ीसा के एक उर्दू अखबार के संवाददाता हाफिज अहमद अली ने तथागत के महापरिनिर्वाण मंदिर सहित अन्य स्थानों के दर्शन के बाद कहा कि योगी आदित्यनाथ सहित पूर्वांचल के लोगों में अतिथियों के प्रति जो भावना है उसको शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।

एमपी में टीवी पत्रकार को गोली मारी गई, हालत गंभीर

मध्‍य प्रदेश के रतलाम शहर में एक हिस्‍ट्रीशीटर ने सोमवार की रात एक न्‍यूज चैनल के पत्रकार को गोली मारी दी. इस गोलीबारी में पत्रकार के दो साथी भी घायल हुए हैं. घायल पत्रकार का इलाज इंदौर मेडिकल कालेज में चल रहा है, जहां उसकी हालत गंभीर लेकिन स्थिर बताई जा रही है. पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है परन्‍तु हिस्‍ट्रीशीटर अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर है. घटना आपसी रंजिश का परिणाम बताया जा रहा है.

बताया जा रहा है कि खबर भारती के लिए काम करने वाले करणधीर बड़गोतिया सोमवार की रात कार से अपने चचेरे भाई अडडू और दोस्‍त इम्तियाज उर्फ गब्‍बू के साथ कहीं से आ रहे थे. वे लोग जैसे ही गांधी नगर के पास पहुंचे, हिस्‍ट्रीशीटर गुगरा सहित उसके चार साथी सामने आकर फायरिंग कर दी. एक गोली करण के दाहिने तरफ सीने पर लगी. उनके साथ के दोनों लोगों को छर्रे लगे. साथ के लोग तत्‍काल करण को रतलाम जिला सिविल अस्‍पताल ले गए, जहां प्राथमिक उपचार करने के बाद करण को इंदौर रेफर कर दिया गया.

घटना की सूचना पर एडीशनल एसपी राजेश व्‍यास एवं सीएसपी गजेंद्र सिंह वर्धमान भी सिविल अस्‍पताल पहुंच गए तथा घायलों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी प्राप्‍त की. बताया जा रहा है कि तीन दिन पहले किसी बात को लेकर करण और गुगरा के बीच विवाद हुआ था. इसके बाद करण और उसके परिजन औद्योगिक क्षेत्र थाने में इसकी शिकायत की थी. लोगों का कहना है कि किसी लेनदेन को लेकर इन लोगों के बीच काफी लंबे समय से विवाद चल रहा है. पुलिस ने गुगरा और उसके साथियों के खिलाफ जानलेवा हमला का मामला दर्ज कर लिया है.

इधर इंदौर से खबर है कि करण के सीने में 312 बोर के कट्टे से गोली मारी गई थी. डाक्‍टरों ने करण के सीने से गोली निकाल दी है. उनकी हालत अभी भी गंभीर किंतु स्थिर बनी हुई है. इस घटना को लेकर रतलाम के पत्रकारों में नाराजगी है. करण ने कुछ समय पहले ही खबर भारती न्‍यूज चैनल ज्‍वाइन किया है. इसके पहले वे इंडिया न्‍यूज से जुड़े हुए थे.

आगरा का सांसद कुछ नहीं समझता पत्रकारों को!

आगरा का सांसद पत्रकारों की कुछ भी इज्‍जत नहीं समझता। इसका प्रमुख कारण है कि आगरा का सांसद पत्रकारों की औकात को भली-भांति जानता है। उसे अच्‍छी तरह पता है कि आगरा के पत्रकारों की हैसियत क्‍या है। आगरा के सांसद हैं प्रोफेसर राम शंकर कठरिया, जो कि पहले आगरा विश्‍वविद्यालय में तैनात थे। उस समय आगरा के चंद पत्रकार अपने लाभ के लिए इनसे मिलने जाया करते थे।

इसमें बड़े बैनर के वो पत्रकार भी शामिल थे, जो कि अपनी दलाली धंधे के लिए आगरा यूनिवर्सिटी में अंक तालिका में नंबर बढ़वाने या फ़ेल को पास कराने आदि का काम करते थे। इनका सीधा पाला तब राम शंकर कठरिया से पड़ता था। तभी से उनको भली-भांति पता है कि आगरा के पत्रकारों की औकात क्या है। समय का दौर बदला और प्रोफेसर रमाशंकर कटेरिया को बीजेपी ने टिकट दे दिया और प्रोफेसर सांसद बन गये।

अब वर्तमान में जो स्थिति है, वह बहुत ही नकारात्मक है। क्योंकि एक तो सांसद पत्रकारों की बखत नहीं समझता और ऊपर से दलाल टाइप के पत्रकारों ने और पोताम्बरी करके सांसद के भाव बढ़ा दिए हैं। अभी हाल में ही आगरा आए वरुण गांधी की सुरक्षा में लगे जवानों ने जब पत्रकारों से अभद्रता कर दी तब सांसद को पीछे से यह कहते सुना गया कि ये इसी लायक हैं। बरहाल यहां के पत्रकारों की स्थिति बहुत ही दयनीय हो चुकी है।

आगरा से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

फोन हैकिंग मामले में सन अखबार का पत्रकार गिरफ्तार

ब्रिटेन की मीडिया एवं राजनीति में तूफान लाने वाले फोन हैकिंग प्रकरण में पुलिस ने सन अखबार के एक पत्रकार को गिरफ्तार किया है. जांच करने वाले पुलिस अधिकारियों को संदेह है कि इस पत्रकार ने पुलिस को रिश्‍वत दी थी. इसे शुक्रवार की सुबह गिरफ्तार किया गया. उससे लंदन के एक पुलिस स्‍टेशन में पूछताछ की जा रही है. उल्‍लेखनीय है कि सन अखबार भी मीडिया मुगल माने जाने वाले रुपर्ट मर्डोक का है.

इसके पहले फोन हैकिंग मामले में ही मर्डोक को 168 साल पुराना अखबार न्‍यूज ऑफ द वर्ल्‍ड को बदं करना पड़ा था. इस मामले में भी जांच चल रही है. पुलिस पता लगा रही है कि ब्रिटेन की किन किन हस्तियों के फोन हैक किए गए थे.

कोर्ट में च्‍यूइंगम खाने पर महिला पत्रकार के ऊपर भड़के जज

: पुलिस से कहा कोर्ट से बाहर ले जाएं और एफआईआर दर्ज करें : माफी मांग कर पत्रकार ने बचाई जान : BANGALORE : A woman journalist working for a news agency was pulled up by Justice B V Pinto of the Karnataka high court on Thursday for chewing gum inside the court hall. The judge asked the police to take her away and instructed them to register an FIR against her.

The incident took place during the afternoon session, when the arguments began on the bail petitions filed by former chief minister B S Yeddyurappa and his former cabinet colleague Ess Enn Krisshnaiah Setty.

When there was noise outside the courthall, the judge instructed his staff to clear out those causing the disturbance . Then he turned his attention to the journalist who was in the court hall chewing gum. He asked her to stand up.

"I've been watching you since afternoon. You are chewing gum inside the courthall . It is an insult to the court,'' the judge said. The reporter offered an apology, but the judge asked the sentry to take her away. Later, she went to the judge's chamber and said sorry. No case was filed. Courtesy : TOI

चीनी अंबेसडर ने भारतीय पत्रकार को कहा ‘शट अप’

नई दिल्ली : चीन के राजदूत झांग यान आज भारत के गलत मानचित्र को लेकर सवाल किए जाने पर एक पत्रकार से उलझ गए और गुस्से में उन्होंने मीडियाकर्मी को ‘शट अप’ तक कह दिया। चीन की सरकारी कंपनी टीबीईए ने एक व्यापारिक कार्यक्रम में भारत का मानचित्र वितरित किया था जिसमें कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्से शामिल नहीं थे। कार्यक्रम में झांग के अलावा चीन के शिनजियांग प्रांत के गवर्नर और विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

मानचित्र के बारे में लगातार सवाल पूछे जाने से नाराज झांग ने संवाददाता को चुप रहने को कह दिया। इसके बाद संवाददाता ने आपत्ति जताते हुए कहा, ‘अगर आप जवाब नहीं देना चाहते तो जवाब नहीं दीजिए, लेकिन आप चुप रहने को नहीं कह सकते।’ बाद में चीनी दूत ने पत्रकार को स्पष्टीकरण देने का प्रयास किया और कहा कि भारतीय अधिकारी पहले ही यह मुद्दा उनके ध्यान में ला चुके हैं और इसपर गौर किया जा रहा है।

चीनी दूत ने संवाददाता से कहा, ‘यह एक तकनीकी मुद्दा है। हम इस मुद्दे पर गौर कर रहे हैं। आपके संयुक्त सचिव ने इस बारे में जिक्र किया है और मैंने कहा कि हम इस पर गौर करेंगे। मैंने अपने लोगों से इस बारे में बातचीत की है..।’ झांग ने कहा कि चुप रहने को कहना ऐसी कोई बात नहीं है जिससे ऐसे मुद्दे की प्रकृति बदल जाए क्योंकि हम इस पर दोस्ताना तरीके से गौर कर रहे हैं।’ साभार : एजेंसी

पत्रकारों से चिढ़े हुए हैं फिरोजाबाद के अधिकारी, एक के खिलाफ मुकदमा

फिरोजाबाद में प्रशासन इन दिनों पत्रकारों से काफी चिढ़ा हुआ है. मामला ढूंढ-ढूंढकर पत्रकारों को फंसाने की कोशिश की जा रही है. ताजा मामला यह है कि बुधवार को बीएड की सैकड़ों छात्राओं ने अपनी मांगों को लेकर नेशनल हाइवे संख्‍या दो को जाम कर दिया था. पुलिस के समझाने के बाद भी छात्राएं बिना मांग पूरी हुए हटने को तैयार नहीं थीं. प्रशासन के कई अधिकारी पत्रकारों से इस घटना की कवरेज ना करने को कहा. इसके बावजूद पत्रकार अपना काम करते रहे.

खबरें कई जगहों पर चलने के बाद प्रशासन की काफी छीछालेदर हुई. किसी तरह छात्राओं को हटाया-बढ़ाया गया. इसके बाद पुलिस ने ढाई सौ छात्राओं और पांच अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है. पुलिस का कहना है कि पत्रकारों के उकसाने पर ही छात्राओं ने जाम लगाया. पत्रकारों को अपरोक्ष रूप से धमकी भी दी जा रही है कि जांच होने के बाद जिन पत्रकारों की संलिप्‍तता पाई जाएगी उनके खिलाफ कार्रवाई होगी. इधर पत्रकारों में इस बात को लेकर चर्चा है कि कहीं पांच अज्ञातों के खिलाफ दर्ज मुकदमा पत्रकारों को निशाना बनाने के लिए ही तो नहीं लिखा गया है.

गौरतलब है कि पुलिस एवं प्रशासन इन दिनों पत्रकारों को हड़काने और फंसाने में जुटा हुआ है. दिवाली से पहले पुलिस पटाखों को लेकर छापेमारी कर रही थी. ऐसे ही एक स्‍थान पर उसने छापामारी की, जिसके बाद कुछ स्‍थानीय लोग पुलिस से उलझ गए. पुलिस ने अन्‍य दूसरे लोगों के साथ अमर उजाला के पत्रकार विजेंद्र के खिलाफ भी सिरसागंज थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया, जबकि उनका इस मामले से कुछ भी लेना देना नहीं था. फिर भी पुलिस ने आरोप लगाया कि विजेंद्र भी इसमें शामिल थे. उनके खिलाफ भी गैर जमानती धाराओं में मुकदमा दर्ज करा दिया गया है.

सड़क हादसे में घायल वरिष्‍ठ पत्रकार का निधन

केरल के त्रिसुर जिले के वरिष्‍ठ पत्रकार सी बालाराम का बुधवार को निधन हो गया. वे 78 वर्ष के थे. बालाराम 20 सितम्‍बर को हुए एक सड़क हादसे में घायल हो गए थे. उनके सिर में गंभीर चोट आई थी. तभी से उनका इलाज चल रहा था. वे अपने पीछे पत्‍नी और तीन पुत्रियों का भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं.

बालाराम लम्‍बे समय तक त्रिसुर ब्‍यूरो के रूप में मातृभूमि दैनिक एवं टेलीग्राफ इवनिंग से जुड़े रहे थे. इसके पहले वे इंडियन एक्‍सप्रेस को भी अपनी सेवाएं दे चुके थे. 

भारतीय खेल पत्रकार ने कहा वीना मलिक फिक्सिंग रैकेट की सरगना

नई दिल्ली। पाकिस्तान की हॉट एक्ट्रेस वीना मलिक एक बार फिर सुर्खियों में हैं। भारत के खेल पत्रकार धीरज दीक्षित ने एक निजी चैनल से बातचीत में वीना मलिक को फिक्सिंग रैकेट की सरगना करार दिया है। धीरज के मुताबिक जब वीना मलिक को यह जानकारी हुई कि मेरे संपर्क तमाम क्रिकेटरों, अंपायरों और क्रिकेट के प्रशासकों से हैं तो वो मेरे संपर्क में आई तथा फिक्सिंग कराने के लिए पीछे पड़ गई।

धीरज ने बताया कि एक बार जब वह ढाका में थे तो वीना पाकिस्‍तान से फोन कर कहा था कि मैं खिलाडि़यों को मैनेज कर रही हूं, आप भारत से कोई बड़ा कारोबारी लेकर आएं, जो मैच फिक्सिंग में पैसा लगा सके। खेल पत्रकार ने कहा कि पाकिस्‍तानी क्रिकेट में अब भी मैच फिक्‍सर मौजूद हैं। इमरान फरहत पाकिस्‍तान का सबसे ज्‍यादा सक्रिय मैच फिक्‍सर था। इमरान पूरी टीम को ऑपरेट करता था और लंदन में रहने वाला उसका रिश्‍तेदार फिक्सिंग का पैसा एकत्र करता था।

टीवी पत्रकार की गोली मारकर हत्‍या

बैरकपुर। पश्चिम बंगाल में 24 परगाना जिले के सोधपुर क्षेत्र में अज्ञात हमलावर ने बुधवार को एक टीवी पत्रकार की गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस ने बताया कि अनिर्बन मजूमदार (25 वर्ष) को उस समय गोली मारी गई जब वे अपनी मोटरसाइकिल से कहीं जा रहे थे। हत्‍या के कारणों का पता नहीं चल सका है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। इस घटना को लेकर पत्रकारों में रोष है।

स्‍थानीय लोगों ने पुलिस को बताया कि छह बजे के आसपास उन लोगों ने गोली चलने की आवाज सुनी। जब वे लोग मौके पर पहुंचे तो अनिर्बन जमीन पर पड़े हुए थे तथा दो युवक बाइक से भाग रहे थे। जिस समय पत्रकार को गाली मारी गई उस समय वहां आसपास कोई मौजूद नहीं था तथा वहां पर अंधेरा छाया हुआ था। पत्रकार के सिर और सीने में गोली मारी गई थी। उनकी मौके पर ही मौत हो गई। ग्रामीण की सूचना के बाद घटनास्‍थल पर पहुंची पुलिस ने पत्रकार की बाइक, पहचान पत्र, पैन कार्ड अपने कब्‍जे में ले लिया है। पुलिस ने शव को पोस्‍टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस हत्‍या के कारणों का पता लगाने में जुटी हुई है। निमता निवासी अनिर्बन कुछ समय पहले एक न्‍यूज चैनल से जुड़े हुए थे। लगभग छह महीने पहले उन्‍होंने यह नौकरी छोड़ दी थी। इन दिनों वे कोई दूसरी नौकरी कर रहे थे।

जिम मालिक और पत्रकारों में मारपीट

हल्‍द्वानी से खबर है कि पत्रकारों और एक स्‍थानीय व्‍यक्ति के बीच मारपीट हो गई, जिसमें उसने पत्रकारों पर मुकदमा दर्ज करा दिया है. अमर उजाला और जागरण ने इस खबर को दो गुटो में मारपीट बताकर छापा है. पूरा मामला यह है कि कुछ पत्रकार शनिवार को सीआरपीएफ के आई की प्रेस कांफ्रेंस में गए हुए थे. इस दौरान ये लोग डहरा में क्षतिग्रस्‍त पुल देखने गए.

इस दौरान डहरा गांव में मुनीश कुमार सक्‍सेना ने किराए पर मकान लेकर प्रोजेक्‍ट कार्यालय खोल रखा है तथा जिम बना रखा है. कुछ पत्रकार वहां पहुंच गए तथा पूछताछ शुरू कर दी. किसी बात को लेकर पत्रकार तथा जिम मालिक में बहस हो गई. मालिक ने तीन पत्रकारों से मारपीट की तथा बंधक बना लिया. इसकी सूचना जब अन्‍य पत्रकारों को हुई तो वे मौके पर पहुंच गए तथा जिम मालिक को पीट दिया. सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने मामले को शांत कराया.

गुडगांव निवासी जिम मालिक ने किसी वरिष्‍ठ व्‍यक्ति से एसएसपी को फोन कराके अज्ञात लोगों के खिलाफ बलवा, लूटपाट तथा जान से मारने की धमकी देने का मुकदमा दर्ज करवा दिया. पत्रकारों की तरफ से मुकदमा दर्ज नहीं कराया गया है. पत्रकारों के संस्‍थानों ने भी अपने पत्रकारों की एक नहीं सुनी और घटना को दो पक्षों में झगड़ा बताकर छाप दिया. नीचे अमर उजाला में प्रकाशित खबर. जागरण ने भी ऐसी ही खबर प्रकाशित की है.

अमृतपुर में दो पक्षों में झगड़ा

हल्द्वानी। अमृतपुर स्थित डहरा गांव में शनिवार दोपहर दो पक्षों में झगड़ा हो गया। पुलिस ने एक पक्ष की ओर से अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया है। जबकि दूसरे पक्ष की ओर से अभी तक पुलिस को तहरीर नहीं सौंपी गई है।

जानकारी के मुताबिक हल्द्वानी के कुछ लोग अमृतपुर स्थित क्षतिग्रस्त डहरा पुल देखने गए थे। डहरा गांव में ही मुनीश कुमार सक्सेना निवासी पोडसी, गुड़गांव ने किराए पर मकान लिया है। मकान में प्रोजेक्ट कार्यालय खोला है और बाहर से जिम का सामान रखा है। मकान की दीवारों पर बेहद आकर्षक रंगों से डिजायन बना है। दीवारों पर आकर्षक डिजायन एवं व्यायामशाला को देखकर लोग वहां रुक गए और व्यायामशाला के बारे में पूछताछ करने लगे। इसी बीच व्यायामशाला संचालक ने उनके साथ गाली गलौज एवं मारपीट शुरू कर दी। अभद्रता होने पर कुछ लोग बाहर निकल आए, जबकि तीन लोगों को व्यायामशाला के अंदर ही बंधक बना दिया। बाहर निकले लोगों ने पुलिस की मदद से अपने बंधक साथियों को बाहर निकलवाया। व्यायामशाला संचालक के साथ हाथापाई हो गई। इसी बीच पुलिस मौके पर पहुंच गई। व्यायामशाला संचालक ने अज्ञात लोगाें के खिलाफ भीमताल थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया है। एसएसपी अनंत राम चौहान ने बताया कि मुनीश कुमार एनजीओ चलाता है और डहरा में उसका प्रोजेक्ट चल रहा है। किसी बात को लेकर दो पक्षों में कहासुनी और मारपीट हो गई।

नवीन जिंदल ने गिफ्ट बांटने में किया भेदभाव, कई पत्रकारों ने मिठाई वापस लौटाई

सम्पादक, भड़ास4मीडिया मैं आपके माध्यम से बताना चाहता हूं कि दिवाली पर इस बार कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र से सांसद नवीन जिन्दल के कार्यालय द्वारा किस तरह पत्रकारों के साथ भेदभाव किया गया. यह काम किसके द्वारा किया गया इसके बारे में तो कोई जानकारी नहीं है, लेकिन कई पत्रकारों को अपमानित करने का काम सांसद कार्यालय द्वारा जरूर हुआ. सांसद नवीन जिन्दल द्वारा जो दिवाली गिफ्ट कैथल और पुडरी में पत्रकारों को भेजे गये, उनमें पत्रकारों के चेहरे देखकर भेदभाव किए गए. 

सांसद की तरफ से कई खास पत्रकारों को तो मिठाई के साथ एक-एक कंबल दिया गया, पर ज्‍यादातर पत्रकारों को महज एक-एक मिठाई का डब्बा भेजा गया, जिससे कई पत्रकारो ने इसे अपनी निरादर ही समझा. तमाम पत्रकारों ने तो सांसद के मिठाई के डिब्‍बे वापस भिजवा दिये हैं, क्योंकि जिन पत्रकारों के साथ भेदभाव किया गया वो सभी पत्रकार सक्रिय पत्रकार बताये जाते हैं. इनमें से कई पत्रकार तो चैनलों से जुडे़ हैं. इस बात को लेकर कई पत्रकारों में रोष है कि जिस तरह पत्रकारों से भेदभाव किया गया है, वह अनुचित है. नाराज पत्रकार अब सांसद कार्यालय की खबरों को प्रमुखता ना देने का मन बना रहे हैं.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

पत्रकार आबिद सुहेल को मिलेगा इस साल का मौलाना अबुल कलाम आजाद पुरस्‍कार

उत्‍तर प्रदेश उर्दू अकादमी ने उर्दू के प्रख्‍यात उपन्‍यासकार एवं पत्रकार आबिद सुहैल को 2011-12 के प्रतिष्ठित मौलाना अबुल कलाम आजाद पुरस्‍कार के लिए चुना है. श्री सुहेल का चयन उर्दू साहित्‍य तथा पत्रकारिता में उनके योगदान के लिए किया गया है. इस पुरस्‍कार के तहत उन्‍हें पांच लाख रुपये तथा प्रशस्‍ति पत्र प्रदान किया जाएगा. लखनऊ निवासी आबिद सुहेल ने करियर की शुरुआत अंग्रेजी दैनिक द नेशनल हेराल्‍ड के साथ की थी. 

आबिद ने उर्दू भाषा में 15 से जयादा किताबों का लेखन किया है, जिसमें महशूहर उपन्‍यास 'गुलाम गर्दिश' और 'सबसे छोट गम' भी शामिल है. इनकी ऑटोबायोग्राफी पर दिल्‍ली उर्दू अकादमी इन्‍हें फेलोशिप भी प्रदान कर चुकी है.

ट्रेन की चपेट में आने से पत्रकार की मौत

नीमच के पत्रकार सुखवंत सिंह चौहान की शुक्रवार को एक ट्रेन की चपेट में आ जाने से मौत हो गई. जीआरपी से मिली जानकारी के अनुसार शुक्रवार की दोपहर नीमच रेलवे स्‍टेशन से तीन किलोमीटर दूर बिसलवास कलां सिग्‍नल के पास सुखवंत एक ट्रेन से टकरा गए. बताया जा रहा है कि वह उस समय पटरी पार कर रहे थे कि अचानक ट्रेन की चपेट में आ गए.

ट्रेन के चालक ने स्‍टेशन पर घटना की सूचना दी. मौके पर जब पुलिस पहुंची तब सुखवंत का शव पटरी के बीच में पड़ा था. उनके सिर में गंभीर चोटें थीं. सुखवंत सिंह कई स्‍थानीय एवं प्रादेशिक समाचार पत्रों से लम्‍बे समय तक जुड़े रहे. सुखवंत के निधन से पत्रकारों में शोक है.

आगरा में गंदा हो गया है मीडिया का धंधा

: दिवाली में कइयों का निकाला दिवाला : आगरा में पत्रकारिता का हाल बहुत बुरा हो गया है। रहिमन तेरे देश में… जैसी हालत यहां के मीडिया में चल रही है। एक और जहां दिन प्रतिदिन आगरा के अंदर समाचार पत्रों की संख्‍या  बढ़ती जा रही हैं वहीं दूसरी ओर यहां की मीडिया के लोगों का स्‍तर भी गिरता जा रहा है। अपने अखबारों के लिए विज्ञापन जुटाने हेतु आगरा में पत्रकारों की एक बड़ी फौज खड़ी हो गयी हैं जो कि दिन भर विज्ञापन पार्टियों के पास पड़ी रहती हैं।

वैसे भी आगरा के कई मीडिया संस्थान में तो स्‍पष्‍ट आदेश है कि अगर फील्ड में काम करना हैं तो आगरा के लालाओं के दरवाजों पर दरबार लगानी पड़ेगी, आगे आपकी मर्जी। इस खेल में वो अखबार भी शामिल हैं जो अपने आप को देश का नंबर एक, दो और तीन का अखबार बताते हैं। मामला मंगलवार का ही ताजातरीन हैं। आगरा के एक मशहूर उद्योगपति, जिनका नाम पूरन डावर हैं, डावर इंडस्ट्रीज़ का संचालन करते हैं। आगरा के दो बड़े पत्रकार, जो कि एक बड़े समाचार पत्र से ताल्लुक रखते हैं, आगरा के इस उद्योगपति के संस्थान डावर शूज पर पहुंचे और वहाँ से दिवाली का गिफ्ट लेने पहुँच गए, जबकि यह गिफ्ट पत्रकारों के लिए कोई अनिवार्य नहीं होता हैं।

इस मामले में सबसे बड़ी बात यह हैं कि आगरा में मीडिया की पोजिशन इतनी बुरी हो गयी हैं कि आगरा के पत्रकार इस तरह से त्‍यौहारी मांगने लगे हैं, जैसे कि किसी घर में साफ सफाई करने वाले, धोबी या अन्‍य कोई काम करने वाले परजुनिया लोग मांगते हैं। जैसे ये लोग घर घर डोलते हैं उसी तरह से आगरा के पत्रकार दीपावली के मौके पर आगरा के हर विधायक, मंत्री, अधिकारियों के यहां जाकर गिफ्ट की मांग करते हैं। सभी लोग इन पत्रकारों से त्रस्‍त हो गए हैं। इतना ही नहीं अभी हाल ही में आगरा में चार नए अखबार आने के लिए बेताब पड़े हैं, जाहिर हैं कि यह भीखमंगई और अधिक बढ़ेगी। जिस तरह की स्थिति दिवाली पर दिख रही है उससे यह तो तय है कि अब आगरा की मीडिया का भगवान ही मालिक है। जिस तरह का माहौल है उसमें यह कहना अतिश्‍योक्ति नहीं होगा कि आगरा में मीडिया का धंधा बाजारू औरत को भी पीछे छोड़ देगा।

एक पत्रकार द्वारा भेजा गया पत्र.

मीडिया एक्‍शन फोरम के संयुक्‍त सचिव बने दीपाली भारद्वाज और तनेराज सिंह

राजस्थान मीडिया एक्‍शन फोरम के प्रदेश संयुक्त सचिव के पद पर जोधपुर की पत्रकार दीपाली भारद्वाज और बाड़मेर के तनेराज सिंह को नियुक्त किया गया है। राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम की महासचिव शकुन्तला सरूपरिया ने बताया कि फोरम के अध्यक्ष अनिल सक्सेना ने प्रदेश के संयुक्त सचिव पद पर अभियान राजस्थान अखबार जोधपुर की प्रबंध संपादक दीपाली भारद्वाज और दैनिक मरू पत्रिका बाड़मेर के संपादक तनेराज सिंह को नियुक्त किया है।

उन्होंने बताया कि शीघ्र ही प्रदेश के सभी जिलों के जिला अध्यक्षों की घोषणा की जाएगी। साथ ही प्रदेश में होने वाले मीडिया एक्‍शन फोरम के कार्यक्रमों की घोषणा की जाएगी। उल्लेखनीय है कि दीपाली पूर्व में एचबीसी न्यूज चैनल के साथ जुड़कर कार्य कर रही थी और तनेराज सिंह पूर्व में कई वर्षों से विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं से जुड़कर पत्रकारिता कर रहे थे। वर्तमान में दोनों  संपादन का कार्य कर रहे हैं।

पत्रकारों के लिए पांचवां सबसे खतरनाक है यह देश

पत्रकारों के लिए विश्व में मैक्सिको पांचवां सबसे खतरनाक स्थान है। संयुक्त राष्ट्र और ऑर्गनाइजेशन ऑफ अमेरिकन स्टेटस की संयुक्त रिपोर्ट के मुताबिक, मैक्सिको में वर्ष 2000 से अब तक कुल 70 पत्रकारों की हत्या हो चुकी है। रिपोर्ट के मुताबिक, मैक्सिको में 2011 में ही अब तक 13 पत्रकार अपनी जान गंवा चुके हैं। पत्रकारों की हत्या के पीछे जहां बहुत सारी वजहें हैं। सबसे प्रमुख कारण मादक द्रव्य तस्करों के बीच खूनी हिंसा है।

अभिव्यक्ति की स्वंतत्रता पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के अन्वेषक फ्रैंक ला एई ने उन चार देशों का खुलासा नहीं किया है, जो पत्रकारों के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक है, लेकिन अन्य मीडिया समूहों ने पाकिस्तान और इराक के बाद इस मामले में मैक्सिको को तीसरे स्थान पर रखा है। मध्य अमेरिकी देश होंडुरास भी पत्रकारों की हत्या के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई। मैक्सिको के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की सूची के मुताबिक, भी वर्ष 2000 से देश में 70 पत्रकारों की हत्या हुयी है। साथ ही 13 पत्रकार लापता हैं। साभार : हिंदुस्‍तान