सैलरी एक ऐसी जरूरी चीज है, जिसके बलबूते कर्मचारी अपना घर चलाते हैं लेकिन ये समय पर न मिले तो सोचो कितनी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कुछ ऐसी ही दयनीय स्थिति बनी है हमार टीवी में। यहां के कर्मचारियों को एक तो पहले ही एक महीने की सैलरी रोक कर मिल रही थी लेकिन हालात अब ये हैं कि जो रोक कर मिल रही थी वो भी नहीं दी जा रही है। सारे कर्मचारी बेहद परेशानी में है लेकिन इससे मालिक को कोई फर्क नहीं पड़ता।
कई कर्मचारी ऐसे हैं जो कि किराए के मकान में रहते हैं, कुछ बेहद दूर से आते हैं। सभी को परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। खाना-पीना, आना-जाना, बच्चों की पढ़ाई, घर के खर्चे, आखिर इस महंगाई के जमाने में कैसे जी पाएंगे हमार टीवी में काम करने वाले कर्मचारी। ऑफिस न आओ तो मुसीबत, घर पर फोन पहुंच जाता है क्यों नहीं आए..? अब इस कंपनी को क्या इतना भी ज्ञान नहीं है कि कर्मचारियों के पास ऑफिस आने-जाने के लिए भी पैसे नहीं बचे हैं। अगर कर्मचारियों को सैलरी मुहैया नहीं करा सकते थे तो कंपनी खोली ही क्यों..?
काम तो करवा लिया जाता है और सेलरी के नाम पर ठेंगा दिखा दिया जाता है जैसे कि दूसरे इंसान का कोई महत्व ही नहीं, उसके समय और धैर्य का कोई मूल्य ही नहीं। कंपनी के मालिक को इस पर संज्ञान लेना बेहद आवश्यक है। नहीं तो अंजाम बुरा भी हो सकता है। कृप्या मेरा नाम और ई-मेल आईडी न छापी जाए। आपकी अति कृपा होगी। क्योंकि ये लेख कर्मचारियों के भले के लिए लिखा गया है। शायद इस लेख से कुछ भला हो जाए। धन्यवाद।
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.





