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काली नहीं हुई लाइव इंडिया की दिवाली, सेलरी मिली

लाइव इंडिया 'लाइव' रहेगा कि नहीं, इसको लेकर संशय और रहस्‍य लगातार बरकरार है. दीप पर्व से एक दिन पहले सेलरी मिल जाने से यहां के कर्मचारियों की दिवाली काली होने से बच गई है. शूट बंद है. कर्मचारियों को पिक और ड्राप की सुविधा भी नहीं मिल रही है. किराए पर अपने साजो सामान, वाहन देने वाले अपने पैसे के लिए दवाब बनाए हुए हैं. वहीं लोगों का फोन ना उठाने तथा एसएमएस का जवाब ना देने वाले सुधीर चौधरी आफिस भले ही न आ रहे हों पर वे भी दीपावली धूमधड़ाके से मना रहे हैं. ऐसा उन्‍होंने खुद अपने ट्विटर पर लिख रखा है.

लाइव इंडिया 'लाइव' रहेगा कि नहीं, इसको लेकर संशय और रहस्‍य लगातार बरकरार है. दीप पर्व से एक दिन पहले सेलरी मिल जाने से यहां के कर्मचारियों की दिवाली काली होने से बच गई है. शूट बंद है. कर्मचारियों को पिक और ड्राप की सुविधा भी नहीं मिल रही है. किराए पर अपने साजो सामान, वाहन देने वाले अपने पैसे के लिए दवाब बनाए हुए हैं. वहीं लोगों का फोन ना उठाने तथा एसएमएस का जवाब ना देने वाले सुधीर चौधरी आफिस भले ही न आ रहे हों पर वे भी दीपावली धूमधड़ाके से मना रहे हैं. ऐसा उन्‍होंने खुद अपने ट्विटर पर लिख रखा है.

लाइव इंडिया के कर्मचारियों को पिछले दो महीनों से सेलरी नहीं मिली थी, जिससे यहां काम करने वाले कर्मचारियों ने हड़ताल की धमकी दी थी. बताया जा रहा है कि इसके बाद प्रबंधन ने दीपावली से पहले सभी कर्मचारियों को सेलरी दे दिया है. पर सीईओ कम चैनल हेड सुधीर चौधरी के कदम को लेकर अनिश्‍चय की स्थिति बरकरार है. सुधीर चौधरी का रुटीन ब्रेक हो चुका है. वे न प्राइम टाइम पर टीवी में नजर आते हैं और न ही पहले जैसा कामधाम देख रहे हैं, और ना ही किसी का फोन उठा रहे हैं. सूत्रों का कहना है कि एचडीआईएल के पार्टनर अब इस चैनल को बेचने की दिशा में भी सोच रहे हैं. दबी जुबान से चैनल में वित्‍तीय अनियमितताओं की भी बात कही जा रही है. पर खुल कर कोई बोलने को तैयार नहीं है. कुछ मुद्दों को लेकर पार्टनरों के बीच मनमुटाव है.

चैनल में सेलरी भले ही मिल गई हो पर कर्मचारी बेचैन हैं. उन्‍हें चैनल का भविष्‍य समझ में नहीं आ रहा है. चैनल में शूटिंग बंद हो गई है. रिपोर्टर भी बाहर नहीं जा रहे हैं. रिपोर्टिंग के लिए गाडि़या नहीं हैं. बस जैसे-तैसे यहां वहां से फीड काटकर चैनल चलाया जा रहा है. वेंडर भी हैरान-परेशान हैं. उनके लाखों रुपये चैनल पर बकाया हैं. चैनल पर हर महीने करोड़ों रुपये फूंकने वाले एचडीआईएल प्रबंधन को न्यूज चैनल खोलने का कोई लाभ नहीं दिख रहा है. जिन सरकारी और गैर-सरकारी विभागों के उत्पीड़न-उगाही से एचडीआईएल प्रबंधन पहले से परेशान था, वहां से वे लोग आज भी परेशान है. उल्टे कई नए दुश्मन पैदा हो गए हैं. आमदनी चवन्‍नी भी नहीं है और खर्च रुपैया भर हो रहा है.

चैनल के कर्मचारियों की दिवाली तो काली होने से बच गई पर उनका अगला त्‍यौहार ठीक रहेगा इसकी कोई गारंटी नहीं है. कर्मचारी दूसरे चैनलों में भी जगह तलाश रहे हैं. अपुष्‍ट खबरों में बताया जा रहा है कि खुद सुधीर चौधरी एक चैनल में अपनी इंट्री को लेकर बात कर रहे हैं. पर अभी उधर से कोई पॉजिटिव जवाब नहीं मिला है. लाइव इंडिया का क्‍या होगा इसको लेकर सस्‍पेंस लगातार बरकरार है.

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