दैनिक जागरण, बनारस में काम का तनाव इस कदर बढ़ गया है कि कर्मचारियों को इसकी कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है. बताया जा रहा है दैनिक जागरण से तीस सालों से अधिक समय से जुड़े विज्ञापन विभाग के कर्मचारी डीपी श्रीवास्तव काम के तनाव से अटैक के शिकार हो गए. बताया जा रहा है कि डीपी श्रीवास्तव बीते शुक्रवार को दैनिक जागरण, बनारस के कार्यालय में काम कर रहे थे. तनाव के चलते कार्यालय में ही उनको अटैक पड़ गया.
डीपी श्रीवास्तव की हालत खराब होते देख अन्य कर्मचारी भी सहम गए. आनन फानन में उन्हें कौडिया अस्पताल ले जाया गया. जहां हालत गंभीर होने पर डाक्टरों ने उन्हें बीएचयू स्थित सर सुंदर लाल चिकित्सालय के लिए रेफर कर दिया. यहीं पर रविवार की भोर में डीपी श्रीवास्तव ने अंतिम सांस ली. बताया जा रहा है कि वे अगले साल जनवरी में दैनिक जागरण से रिटायर होने वाले थे, परन्तु तनाव ने रिटायर होने से पहले ही उनकी जिंदगी छीन ली. गौरतलब है कि इसके पहले कौशाम्बी में भी एक संपादकीयकर्मी मोहम्मद शाहिद की मौत ऐसे ही कारणों से हो चुकी है.
डीपी श्रीवास्तव का अंतिम संस्कार बनारस के मर्णिकर्णिका घाट पर किया गया. वे मूल रूप से जौनपुर के रहने वाले थे. जागरण ने अपनी खबर में कहीं इस बात का जिक्र नहीं किया है वे गंभीर रूप से बीमार कहां पड़े, जबकि वे बीमार दैनिक जागरण के कार्यालय में काम के तनाव की वजह से ही पड़े थे. नीचे आप भी पढि़ए कुछ लाइनों में निपटा दिए गए तीस साल तक संस्थान को अपना सब कुछ देने वाले डीपी श्रीवास्तव की मौत की खबर को.
डीपी श्रीवास्तव नहीं रहे
वाराणसी : लगभग तीन दशक से भी अधिक समय से दैनिक जागरण परिवार के सदस्य रहे देवी प्रसाद श्रीवास्तव का रविवार की भोर में सर सुंदर लाल चिकित्सालय में निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार मणिकर्णिका घाट पर किया गया। शुक्रवार को सायंकाल अचानक वे गंभीर रूप से बीमार पड़ गए। उन्हें तत्काल बीएचयू स्थित सर सुंदर लाल अस्पताल ले जाया गया, जहां रविवार को भोर में लगभग 4.30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। 59 वर्षीय देवी प्रसाद अत्यंत मृदुभाषी व सरल व्यक्तित्व के थे। जौनपुर निवासी जोखइ लाल श्रीवास्तव के पुत्र देवी प्रसाद दैनिक जागरण के विज्ञापन विभाग में कार्यरत रहे। उनके एक पुत्र व पुत्री हैं। जागरण कार्यालय में हुई शोकसभा में स्व.देवी प्रसाद के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।





