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क्‍यों हिंदुस्‍तान को सताने लगी मुंगेर के विकास की चिंता?

मुंगेर। विश्वस्तरीय 200 करोड़ के दैनिक हिन्दुस्तान विज्ञापन फर्जीवाड़ा कांड में ज्यों-ज्यों अभियुक्तों की गर्दन की ओर कानून की तलवार बढ़ती जा रही है, अभियुक्तों की ओर से नया-नया ड्रामा शुरू कर दिया गया है। वर्ष 2001 के 03 अगस्त से दैनिक हिन्दुस्तान का भागलपुर और मुंगेर संस्करण शुरू हुआ। तब से आज तक मुंगेर जिले के विकास के लिए दैनिक हिन्दुस्तान के संपादकीय प्रबंधन ने कभी भी किसी प्रकार का विशेष आयोजन ‘मुंगेर के विकास‘ के मुद्दे पर नहीं किया।

मुंगेर। विश्वस्तरीय 200 करोड़ के दैनिक हिन्दुस्तान विज्ञापन फर्जीवाड़ा कांड में ज्यों-ज्यों अभियुक्तों की गर्दन की ओर कानून की तलवार बढ़ती जा रही है, अभियुक्तों की ओर से नया-नया ड्रामा शुरू कर दिया गया है। वर्ष 2001 के 03 अगस्त से दैनिक हिन्दुस्तान का भागलपुर और मुंगेर संस्करण शुरू हुआ। तब से आज तक मुंगेर जिले के विकास के लिए दैनिक हिन्दुस्तान के संपादकीय प्रबंधन ने कभी भी किसी प्रकार का विशेष आयोजन ‘मुंगेर के विकास‘ के मुद्दे पर नहीं किया।

पूरे 12 वर्षों तक दैनिक हिन्दुस्तान ने मुंगेर के विकास की सुधि नहीं लीं। परन्तु, जब 200 करोड़ के दैनिक हिन्दुस्तान विज्ञापन घोटाला में पुलिस जांच की कार्रवाई अंतिम चरण में चल रही है, तो आरोपियों की ओर से मुंगेर प्रमंडल मुख्यालय में 06 मार्च को अचानक ‘संवाद‘ कार्यक्रम के तहत सेमिनार आयोजित किया गया। इस सेमिनार में जिले के राजनीतिक दलों के प्रमुख, व्यवसायी संघ के प्रतिनिधियों और शिक्षाविदों को आमंत्रित किया गया और मुंगेर के विकास पर बोलने को कहा गया। दैनिक हिन्दुस्तान ने इस कार्यक्रम को मुंगेर संस्करण के प्रथम पृष्ठ पर शीर्षक ‘मुंगेर के विकास पर सीधा संवाद, तलाशे गए मुद्दे‘ प्रकाशित किया। अखबार ने मुंगेर संस्करण के पृष्ठ 05 पर भी विस्तृत रिपोर्ट शीर्षक ‘पर्यटन क्षेत्र में विकसित हो मुंगेर, प्रशासनिक अनदेखी हो बन्द‘ से प्रकाशित किया।

दैनिक हिन्दुस्तान की ओर से आयोजित इस संवाद कार्यक्रम में उपस्थित रहे दैनिक हिन्दुस्तान (पटना) के वरीय स्थानीय संपादक कृष्णकांत उपाध्याय और भागलपुर संस्करण के स्थानीय संपादक विश्वेश्वर कुमार। मुंगेर जिले के बुद्धिजीवी हतप्रभ हैं कि आखिर अचानक पटना के वरीय संपादक कृष्णकांत उपाध्याय और भागलपुर के स्थानीय संपादक विश्वेश्वर कुमार को मुंगेर के विकास के प्रति अचानक चिंता कैसे उमड़ पड़ी है? मुंगेर के विकास के नाम पर दैनिक हिन्दुस्तान के नामजद आरोपियों के पक्ष में वातावरण तैयार करने की कोई साजिश तो नहीं चल रही है, बुद्धिजीवी लोग आशंका कर रहे हैं?

प्रजातंत्र का हो रहा है मजाक : मुंगेर पुलिस की ओर से दैनिक हिन्दुस्तान के विज्ञापन फर्जीवाड़ा में पर्यवेक्षण टिप्पणी – वन एवं टू जारी हो जाने के बावजूद भी अभियुक्तों ने अवैध ढंग से प्रकाशित हो रहे मुंगेर संस्करण को बन्द नहीं किया है। मुंगेर के वर्तमान जिलाधिकारी कुलदीप नारायण ने भी पटना उच्च न्यायालय को भेजी अपनी रिपोर्ट में  मुंगेर के वर्तमान संस्करण को अवैध घोषित कर दिया है।

आर्थिक अपराधियों के हौसले बुलंद : पटना उच्च न्यायालय को भेजी रिपोर्ट में मुंगेर के जिलाधिकारी कुलदीप नारायण के द्वारा दैनिक हिन्दुस्तान के मुंगेर संस्करण को अवैध घोषित किए जाने के बाद भी अभियुक्तों की ओर से मुंगेर में दैनिक हिन्दुस्तान के संस्करण का वितरण करना, मुंगेर प्रमंडलीय मुख्यालय में अवैध ढंग से हिन्दुस्तान कार्यालय को संचालित करना और सार्वजनिक रूप से ‘संवाद‘ कार्यक्रम आयोजित करना संकेत देता है कि अभियुक्तगण देश के कानून का मजाक उड़ा रहे हैं। बिहार सरकार के मंत्रीगण और प्रशासनिक महकमे के लोग भी ‘बेसहारा‘ और ‘लाचार‘ इस मामले में नजर आ रहे हैं। यह भारतीय प्रजातंत्र की खूबियों में एक खूबी है?

मुंगेर से श्रीकृष्‍ण प्रसाद की रिपोर्ट. इनसे संपर्क मोबाइल नं. -09470400813 के जरिए किया जा सकता है.


हिंदुस्‍तान के इस विज्ञापन घोटाले के बारे में अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें – हिंदुस्‍तान का विज्ञापन घोटाला

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