चंदौली में राष्ट्रीय सहारा समाचार पत्र को पढ़कर कोई भी सहज अन्दाजा लगा सकता है कि अखबार को स्वयं सहारे की आवश्यकता है। लगभग चार माह से राष्ट्रीय सहारा समाचार पत्र के चंदौली पृष्ठ पर लगातार हो रही त्रुटियों को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि वह दिन दूर नही जब त्रुटियों के लिए राष्ट्रीय सहारा गिनीज बुक की सुर्खियों पर होगा। हिन्दी समाचार पत्र में हो रही अशुद्धियों की वजह से चंदौली के पाठकों की हिन्दी भी खराब हो रही है।
खबरों के अंदर गलती तो आम बात हो गई है। कुछ खबरों की हेडिंग में भी गल्तियां देखने को मिल रही हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि यह गलती एक या दो बार नहीं बल्कि बार बार हो रही है। अगर चंदौली से गलती जा रही है तो बनारस में बैठे लोग क्या कर रहे हैं, जिनके जिम्मे पेज को एडिटर करने और सही करने की जिम्मेदारी है। ऐसा लगता है कि जानबूझकर ये गल्तियां की जा रही हैं। क्योंकि गलती एक बार होती है, बार बार नहीं। लोगों का कहना है कि बनारस-चंदौली में सारे सिफारिशी लोग भर दिए गए हैं तो ऐसा तो होना ही है।
राष्ट्रीय सहारा वैसे ही अपने उठा पटक के लिए मशहूर रहता है, पर जब से नए यूनिट हेड आए हैं तब से गलतियों का सिलसिला और बढ़ गया है। शायद गलतियां करने वालों को किसी कार्रवाई का डर नहीं रह गया है। आप भी देखें राष्ट्रीय सहारा प्रकाशित बड़ी गल्तियों को और समझिए राष्ट्रीय सहारा के पत्रकारों की कार्यक्षमता को।












