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चीन में प्रकाशित होता रहेगा विवादित अखबार

सरकारी सेंसरशिप के कारण पिछले दिनों सुर्खियों में आया चीनी साप्ताहिक गुरुवार को हर हफ्ते की तरह छपेगा. खबर है कि अधिकारियों और पत्रकारों के बीच समझौता हो गया है. गुआंगझू शहर से हफ्ते में एक बार छपने वाले लोकप्रिय उदारवादी समाचारपत्र के एक कर्मचारी ने नाम बताए बिना कहा है, "अखबार गुरुवार को सामान्य रूप से छपेगा." विवाद तब भड़क उठा जब साप्ताहिक साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट में नागरिक अधिकारों की सुरक्षा से संबंधित लेख की जगह सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी की तारीफ वाला लेख प्रकाशित कर दिया गया. इसके खिलाफ पत्रकार सड़कों पर उतर आए.

सरकारी सेंसरशिप के कारण पिछले दिनों सुर्खियों में आया चीनी साप्ताहिक गुरुवार को हर हफ्ते की तरह छपेगा. खबर है कि अधिकारियों और पत्रकारों के बीच समझौता हो गया है. गुआंगझू शहर से हफ्ते में एक बार छपने वाले लोकप्रिय उदारवादी समाचारपत्र के एक कर्मचारी ने नाम बताए बिना कहा है, "अखबार गुरुवार को सामान्य रूप से छपेगा." विवाद तब भड़क उठा जब साप्ताहिक साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट में नागरिक अधिकारों की सुरक्षा से संबंधित लेख की जगह सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी की तारीफ वाला लेख प्रकाशित कर दिया गया. इसके खिलाफ पत्रकार सड़कों पर उतर आए.

मूल लेख में अधिकारियों से संविधान को लागू करने की मांग की गई, जिसमें बोलने और सभा करने की आजादी की गारंटी है. प्रेस स्वतंत्रता पर खुले आम प्रदर्शन चीन में बिरले ही होते हैं. इस मामले को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नए नेतृत्व के लिए टेस्ट समझा जा रहा है. शी जिनपिंग को हाल ही में पार्टी का नया महासचिव चुना गया है. कुछ ही महीनों में वह देश के नए राष्ट्रपति बनेंगे.

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने कहा है कि गुआंगदोंग प्रांत के पार्टी प्रमुख हू चुनहुआ ने विवाद में मध्यस्थता की है. वे इस समय पार्टी के उभरते सितारे हैं. डाऊ जोंस समाचार एजेंसी ने साप्ताहिक के संपादक के हवाले से लिखा है, "मौखिक समझौता हुआ है. हालात फिर से सामान्य हो गए हैं, लेकिन हमें देखना होगा कि भविष्य में दोनों पक्ष एक दूसरे के प्रति कैसा बर्ताव करते हैं." समझौते के तहत प्रदर्शन में शामिल पत्रकारों को सजा नहीं दी जाएगी और प्रोपैगेंडा अधिकारी प्रकाशन से पहले विषय वस्तु में सीधे हस्तक्षेप नहीं करेंगे.

हॉन्ग कॉन्ग यूनिवर्सिटी में चीनी मीडिया के रिसर्चर डेविड बांदुर्स्की समझौते को पत्रकारों और सेंसर अधिकारियों के बीच काफी समय से चल रहे विवाद में छोटी जीत बताते हैं, "ये ठोस मायने में जीत है. यह रोजमर्रा के सेंसरशिप से वापसी है, जिसकी पत्रकारों को आदत लग गई थी." उनका कहना है कि इस हाई प्रोफाइल विवाद के बाद अधिकारी सेंसरशिप को और कड़ा न करने की सीख ले सकते हैं.

बुधवार को भी कुछ लोगों ने अखबार के दफ्तरों के सामने बैनर लेकर प्रदर्शन किए, जिनमें से एक में "डेमोक्रैटिक चीन" लिखा था. उनकी सरकारी समर्थक विरोधियों से हाथापाई भी हुई जो देशभक्ति वाले गाने गा रहे थे. विरोध प्रदर्शनों का चरम सोमवार को रहा जब जिसमें सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया. उन्हें सोशल मीडिया पर जबरदस्त समर्थन मिला.

राजधानी बीजिंग में प्रोपैगेंडा विभाग ने इस मामले में संपादकीय पेज पर एक लेख छापने के निर्देश के बाद बीजिंग न्यूज के प्रकाशक के इस्तीफे के बाद विवाद के भड़कने की खबरों का खंडन किया है. मॉर्निंग पोस्ट में विवाद शुरू होने के बाद सत्ताधारी पार्टी के साथ जुड़े ग्लोबल टाइम्स ने यह लेख छापी. इसमें कहा गया कि देश में पूरी तरह से आजाद मीडिया की संभावना नहीं है. साथ ही लिखा गया कि "मीडिया सुधार चीन की राजनीति के अनुरूप होना चाहिए."

मीडिया और ऑनलाइन पर आ रही रिपोर्टों के अनुसार बीजिंग न्यूज के दाई जीगेंग ने कमेंटरी न छापने पर अखबार को बंद किए जाने की धमकी मिलने के बाद प्रोपैगेंडा अधिकारियों से कहा है कि वे इस्तीफा दे रहे हैं. इस कमेंटरी का सारांश ग्लोबल टाइम्स के हवाले से बुधवार के अंक में पेज 20 पर छपा है. लेकिन बीजिंग में प्रोपैगेंडा दफ्तर के एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी एएफफी को बताया कि दाई जीगेंग अभी भी हमेशा की तरह काम पर हैं. खुली अवज्ञा दिखाते हुए बीजिंग न्यूज ने वेबसाइट पर दक्षिण दलिया के नाम से एक लेख छापा है जो मंडारिन में सुनने में दक्षिणी साप्ताहिक जैसा लगता है.

चीन में सभी मीडिया संगठनों को सरकारी प्रोपैगेंडा विभाग से निर्देश मिलते हैं जिसका काम कम्युनिस्ट पार्टी को नकारात्मक लगने वाली खबरों को दबाना है. लेकिन दक्षिणी साप्ताहिक के मामले में अधिकारियों ने असामान्य रूप से खुला हस्तक्षेप किया. अखबार की खोजी रिपोर्टों ने इसे चीन में सबसे ज्यादा बिकने वाले अखबारों में एक बना दिया है. 2009 में इसके संपादक को इसलिए पदावनत कर दिया गया था कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अखबार को एक्सक्लुसिव इंटरव्यू दिया था. चीन प्रेस स्वतंत्रता के मामले में 179 देशों में 174वें स्थान पर है. (डीडब्‍ल्‍यू)

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