वाह रे सहारा! गोरखपुर के राष्ट्रीय सहारा के संपादकीय विभाग में कैसे काम होता है इसका एक नमूना शनिवार को और दूसरा रविवार को देखने को मिला. संपादक ने शनिवार को चेकिंग की तो संपादकीय विभाग के 11 में से 8 बंदे गायब मिले. संपादक मनोज तिवारी ने गायब मिले आठों पर रेड लगा दिया, मतलब लेट आए तो अनुपस्थित हो गए. काम किये लेकिन उस दिन की तनख्वाह नहीं बनेगी. लेकिन वही संपादक रविवार को इतने नार्मल हो गये कि लोगों को विश्वास ही नहीं हुआ.
सिटी डेस्क के भुत्भवन मिश्रा दो घण्टे लेट आये तो उनके इन्तजार में मीटिंग देर से शाम को छह बजे की बजाय आठ बजे शुरू हुई. अब लोग कह रहे है कि अचानक संपादक के तेवर में चौबीस घंटे में इतना परिवर्तन कैसे आ गया. कहा जा रहा है कि सहारा में किसी का नहीं चलता है, इसिलिए लोग कार्रवाई करने में डर रहे हैं. संपादक का तेवर भी ज्यादा दिन तक नहीं चल पाएगा.
एक पत्रकार द्वारा भेजा गया पत्र.






