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जनसंदेश टाइम्‍स का जनरेटर खराब, चोरी की बिजली से चल रहा है काम

जनसंदेश टाइम्‍स, लखनऊ में मुश्किलों से जूझ रहा है. नैतिकता का लबादा ओढ़ने वाला मीडिया किस तरीके से अनैतिक हो रहा है, जनसंदेश टाइम्‍स उसका उदाहरण बन गया है. सूत्रों का कहना है कि जनसंदेश टाइम्‍स अब चोरी की बिजली से काम चला रहा है. यह काम पिछले तीन दिनों से चल रहा है. जनसंदेश टाइम्‍स पर बिजली विभाग का तेइस लाख रुपये से ज्‍यादा बकाया है. लिहाजा कई महीने पहले लेसा ने बकाया बिल जमा नहीं किए जाने पर बिजली काट दी थी. बिजली बिल का बकाया जनसंदेश टाइम्‍स के कसमांडा स्थित कार्यालय एवं सरोजनीनगर स्थि‍त प्रिंटिंग यूनिट दोनों पर था, इसलिए दोनों जगहों की बिजली काटी गई थी.

जनसंदेश टाइम्‍स, लखनऊ में मुश्किलों से जूझ रहा है. नैतिकता का लबादा ओढ़ने वाला मीडिया किस तरीके से अनैतिक हो रहा है, जनसंदेश टाइम्‍स उसका उदाहरण बन गया है. सूत्रों का कहना है कि जनसंदेश टाइम्‍स अब चोरी की बिजली से काम चला रहा है. यह काम पिछले तीन दिनों से चल रहा है. जनसंदेश टाइम्‍स पर बिजली विभाग का तेइस लाख रुपये से ज्‍यादा बकाया है. लिहाजा कई महीने पहले लेसा ने बकाया बिल जमा नहीं किए जाने पर बिजली काट दी थी. बिजली बिल का बकाया जनसंदेश टाइम्‍स के कसमांडा स्थित कार्यालय एवं सरोजनीनगर स्थि‍त प्रिंटिंग यूनिट दोनों पर था, इसलिए दोनों जगहों की बिजली काटी गई थी.

बिजली कटने के बाद प्रबंधन बकाया बिल जमा करने की बजाय कसमांडा तथा सरोजनी नगर में जनरेटर के माध्‍यम से काम चला रहा था. सरोजनी नगर में तो बस काम के समय जनरेटर चलता था, परन्‍तु कसमांडा स्थित कार्यालय में शाम छह बजे जनरेटर चलाया जाता था. दिन में किसी तरीके से कम खपत में काम चल रहा था. सूत्रों का कहना है कि अचानक तीन दिन पहले कसमांडा स्थित कार्यालय का जनरेटर खराब हो गया, जिससे प्रबंधन के हाथ पांव फूल गए. जनरेटर की उसी समय व्‍यवस्‍था संभव नहीं थी और बिजली कटी हुई थी.

बताया जा रहा है कि तत्‍काल कोई व्‍यवस्‍था ना होते देख प्रबंधन ने बिजली चोरी करने का उपाय सोच लिया. आनन-फानन में लाइन मैन से मिलकर चुपके से कटिया लगा दिया गया. पहले दिन कर्मचारियों ने किसी तरह काम निपटा लिया, पर दूसरे दिन जब लगातार बिजली मिली तो उनका माथा ठनका कि आखिर प्रबंधन इतना मेहरबान कैसे हो गया. इसके बाद जब खोजबीन शुरू हुई तो पता चला कि ये चोरी के बिजली की महिमा है. आज बिजली चोरी का तीसरा दिन है. अब कब तक प्रबंधन यह सुविधा उठाएगा कहा नहीं जा सकता है.

वैसे भी अखबार के ज्‍यादातर कर्मचारियों को सितम्‍बर माह के बाद से सैलरी नहीं मिला है. बेचारे कर्मचारियों का बड़ा दिन और नया साल बुरा गुजरा अब उन्‍हें लगने लगा है कि उनकी मकर संक्रांति भी ठीक से नहीं बीतने वाली. कर्मचारी परेशान हैं कि जो प्रबंधन बिल भरकर कनेक्‍शन चालू करवाने की बजाय बिजली चोरी करने पर उतारू है वो उनका पैसा क्‍या इतनी आसानी से दे देगा. सूत्रों का कहना है कि गोरखपुर में भी ऐसी स्थिति है. कर्मचारियों को वहां भी अनियमित सैलरी ने परेशान कर रखा है.  

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