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जनसंदेश टाइम्‍स, लखनऊ के हालात खराब, सैलरी को लेकर कर्मचारी भी नाराज

: पिछले पांच महीनों से कटी है बिजली : बसपा शासन काल में बसपा मुखपत्र माना जाने वाला जनसंदेश टाइम्‍स अखबार के हालात बहुत ही खराब हैं. हालात तो सभी यूनिटों के खराब हैं लेकिन ताजा खबर लखनऊ से है. बताया जा रहा है कि यहां पिछले कई महीने की सैलरी अब तक कर्मचारियों को नहीं मिली. उन्‍हें एडवांस के तौर पर कुछ कुछ करके पैसे दिए जा रहे हैं. नवम्‍बर महीने की सैलरी का इंतजार करते करते कर्मचारियों का सब्र भी टूटने लगा है. कारण अगर उन्‍हें नवम्‍बर माह की सैलरी नहीं मिली तो नया साल निश्चित रूप से बिगड़ने का अंदेशा जताने लगा है.

: पिछले पांच महीनों से कटी है बिजली : बसपा शासन काल में बसपा मुखपत्र माना जाने वाला जनसंदेश टाइम्‍स अखबार के हालात बहुत ही खराब हैं. हालात तो सभी यूनिटों के खराब हैं लेकिन ताजा खबर लखनऊ से है. बताया जा रहा है कि यहां पिछले कई महीने की सैलरी अब तक कर्मचारियों को नहीं मिली. उन्‍हें एडवांस के तौर पर कुछ कुछ करके पैसे दिए जा रहे हैं. नवम्‍बर महीने की सैलरी का इंतजार करते करते कर्मचारियों का सब्र भी टूटने लगा है. कारण अगर उन्‍हें नवम्‍बर माह की सैलरी नहीं मिली तो नया साल निश्चित रूप से बिगड़ने का अंदेशा जताने लगा है.

खबर है कि एडिटोरियल के लोग तो अभी विरोध करने की हिम्‍मत नहीं जुटा पा रहे हैं पर मशीन पर काम करने वाले कर्मचारियों का सब्र जवाब दे गया है. अगर सूत्रों की खबर पर भरोसा करें तो सैलरी ना मिलने से नाराज कर्मचारियों ने मशीन चलाने से इनकार कर दिया था. लगभग दो घंटे के हड़ताल के बाद प्रबंधन के लोगों के समझाने तथा आश्‍वासन देने के बाद कर्मचारी दुबारा मशीन चलाने को तैयार हुए. खबर है कि इन लोगों ने चेताया है कि अगर नए वर्ष से पहले सैलरी नहीं मिली से तो ये लोग मशीन को फिर से ठप कर देंगे.

वैसे भी भारी बिल बकाया होने के चलते अखबार के कार्यालय और प्रिंटिंग यूनिट की बिजली काट दी गई है. किसी तरह जनरेटर चलाकर काम चलाया जा रहा है. फोन और फैक्‍स भी जवाब दे चुके हैं. आफिस की लीज लाइन भी कटी हुई है. बताया जा रहा है कि पिछले कई दिनों से अखबार भी ठीक से प्रकाशित नहीं हो पा रहा है. कब तक अखबार इस तरीके से चलेगा बताया नहीं जा सकता. अखबार में ज्ञानेंद्र जी के इस्‍तीफा देने के बाद से किसी ने यहां पर संपादक के रूप में ज्‍वाइन भी नहीं किया. सीईओ का नाम ही संपादक के रूप में जा रहा है. हालात देखकर लगता है कि जल्‍द ही इस अखबार के कार्यालय पर ताला लग जाएगा.

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