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जनसंदेश टाइम्‍स, लखनऊ में भी सैलरी नहीं मिलने से कर्मचारी परेशान

जनसंदेश टाइम्स, लखनऊ से भी खबर है‍ कि यहां कर्मचारियों को सैलरी के लाने पड़े हुए हैं. पिछले लगभग दो महीने से एडिटोरियल छोड़कर अन्‍य विभागों के लोगों को सैलरी नहीं मिली है. कर्मचारी परेशान हैं क्‍योंकि होली सिर पर है और पैसों का कोई अता-पता नहीं है. सूत्रों का कहना है कि प्रबंधन कुछ स्‍पष्‍ट नहीं बता रहा है कि कब वो कर्मचारियों का बकाया सैलरी उपलब्‍ध कराएगा. एडिटोरियल को छोड़कर सभी विभागों के कर्मचारी मुश्किल में हैं.

जनसंदेश टाइम्स, लखनऊ से भी खबर है‍ कि यहां कर्मचारियों को सैलरी के लाने पड़े हुए हैं. पिछले लगभग दो महीने से एडिटोरियल छोड़कर अन्‍य विभागों के लोगों को सैलरी नहीं मिली है. कर्मचारी परेशान हैं क्‍योंकि होली सिर पर है और पैसों का कोई अता-पता नहीं है. सूत्रों का कहना है कि प्रबंधन कुछ स्‍पष्‍ट नहीं बता रहा है कि कब वो कर्मचारियों का बकाया सैलरी उपलब्‍ध कराएगा. एडिटोरियल को छोड़कर सभी विभागों के कर्मचारी मुश्किल में हैं.

कर्मचारियों को सबसे ज्‍यादा परेशानी इस बात से हो रही है कि कोई यह स्‍पष्‍ट करने को तैयार नहीं है कि उनकी सैलरी कब और किस तिथि को दी जाएगी. पिछले कुछ महीनों में जनसंदेश टाइम्‍स के लखनऊ ऑफिस से कई लोगों की छंटनी हुई, कई लोगों ने खुद इस्‍तीफा दे दिया, कई लोग दूसरे संस्‍थानों में ज्‍वाइन कर लिया. इसके बाद भी यहां की आर्थिक संकट दूर नहीं हो पाई. बताया जा रहा है कि अपर लेबल पर आंतरिक तनाव के चलते भी कर्मचारियों को सैलरी मिलने में दिक्‍कत हो रही है.

लखनऊ में भी ज्‍यादातर कर्मचारी दूसरे संस्‍थानों में नौकरी की तलाश कर रहे हैं. पहले भी जनसंदेश टाइम्‍स, लखनऊ तमाम विवादों के चलते चर्चा में रहा है. चाहे बिजली कटने का मामला हो या फिर संपादक पर पर किसी पत्रकार के न रहने का मामला. यह अखबार बस जैसे तैसे चल रहा है. सूत्रों का कहना है कि अगर कर्मचारियों को होली से पहले सैलरी नहीं मिली तो विरोध स्‍वरूप काम ठप कर सकते हैं. इसके पहले बनारस में भी कई पेजीनेटर ऐसे हालात पैदा कर चुके हैं.

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