दैनिक जागरण, लखनऊ के लोकल रिपोर्टरों का असंतोष लगातार बढ़ता ही जा रहा है। हाल ही में लोकल इंचार्ज अजय श्रीवास्तव के व्यवहार से तंग आकर कई युवा पत्रकारों ने दैनिक जागरण से को अलविदा कह दिया। इसके बावजूद उनके व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं दिख रहा है। कई वरिष्ठों का हाथ सिर पर होने से जागरण में उनकी तूती बोल रही है। अजय श्रीवास्तव और अजय शुक्ला की आपसी अदावत रिपोर्टरों पर भारी पड़ रही है।
ताजा मामला है हाल ही में मेडिकल बीट की महिला पत्रकार का। पिछले दिनों मेडिकल की छपी एक खबर को देखकर लोकल इंचार्ज ने इस हद तक आपा खो दिया कि पत्रकार को मीटिंग हाल में ही रोना पड़ा। लोकल इंचार्ज ने मीटिंग में पत्रकार को हिंदी तक नहीं आने का ताना देते हुए खूब खरी खोटी सुनाई। इससे भी मन नहीं भरा तो उन्होंने कहा कि अब बेहतर है कि घर जाकर क ख ग लिखना सीखें। यह महिला पत्रकार पिछले दो साल से मेडिकल बीट को कवर कर रही है तथा काफी मेहनती पत्रकार मानी जाती है।
कुछ ही दिनों पहले का मामला है कि यहां पर कार्यरत पत्रकार अवंतिका को को भी कई बार लोकल इंचार्ज के इस प्रकार के घटिया रवैये के चलते मीटिंग और एडिटोरियल बोर्ड में रोना पड़ा था। सूत्रों का कहना है कि अजय श्रीवास्तव तथा अजय शुक्ला के बीच पत्रकार इसलिए पीस जाते हैं कि ये दोनों लोग चाहते हैं कि रिपोर्टर इन्हें रिपोर्ट करें। परेशान रिपोर्टर दोनों तरफ बैलेंस बनाए रखने की कोशिश में अपना असली काम भूल जाते हैं।






