ज़ी न्यूज समूह के चर्चित न्यूज चैनल जी न्यूज उत्तर प्रदेश को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है। यहां आउटपुट डेस्क से 1 दिन के भीतर 5 लोगों ने इस्तीफा दे दिया है। अचानक हुए इन इस्तीफों से जी न्यूज प्रबंधन पूरी तरह हिल गया है। ऊपर से नीचे तक खलबली मची हुई है। हैरत की बात ये है कि इस्तीफा देने वालों में प्रोड्यूसर से लेकर ट्रेनी तक शामिल हैं।
वासिंद्र मिश्रा की मनमानी और पूरी तरह गैर पेशेवर कार्यशैली को इसकी अहम वजह माना जा रहा है। चैनल के भीतर वासिंद्र से जुड़े किस्से इस समूह के दूसरे चैनलों में भी चर्चा का विषय हैं। लेकिन चैनल की झोली में अपनी दलाली कला का इस्तेमाल कर मोटी कमाई डालने की गारंटी के कारण जी न्यूज प्रबंधन ने तमाम आरोपों के बावजूद अब तक वासिंद्र को बरकरार रखा है।
अब चैनल से विधानसभा चुनाव से ऐन पहले एंकर और सीनियर प्रोड्यूसर प्रत्यूष खरे, अनिल कुमार वर्मा और अमित कुमार ने इस्तीफा दे दिया है। ये तीनों डेस्क के सबसे अनुभवी लोगों में थे, कई चैनलों में काम कर चुके ये लोग अब तक वासिंद्र के आतंकराज के बावजूद यहां डटे हुए थे लेकिन आखिरकार इन लोगों ने भी चैनल से किनारा कर लिया। इनके साथ ही इंटरटेनमेंट डेस्क से हेमा पोखरिया और न्यूज डेस्क से शिवम ने इस्तीफा दे दिया है। शिवम ने महज कुछ महीने पहले चैनल ज्वाइन किया था। लेकिन काम के नाम पर लगातार हो रहे शोषण ने इन्हें भी इस्तीफे पर मजबूर कर दिया। ये लोग कहां जाएंगे इसके बारे में कई चर्चा आम है। लेकिन अभी कोई अपने पत्ते नहीं खोल रहा।
एचआर ये जानने की कोशिश में है कि आखिरकार एक साथ इतने लोगों ने इस्तीफे का फैसला क्यों किया। इस लिए सबको बुलाकर उनसे लगातार उनका पक्ष पूछा जा रहा है। लेकिन अंदरुनी सूत्रों के मुताबिक कोई अपना फैसला बदलने को तैयार नहीं। हाल ही में भरे न्यूज रूम में एक प्रोड्यूसर ने वासिंद्र की क्लास लगा दी थी और उसे तमीज से पेश आने को लेकर खुले लहजों में सावधान किया था। इसके बाद से वासिंद्र कई लोगों के पीछे पड़ा हुआ था। चैनल में चल रही चर्चा के मुताबिक अभी दस और लोग अगले महीने भर में चैनल से अलविदा कहने की तैयारी में हैं।
हालात संभालने में अब वासिंद्र से लेकर एचआर डिपार्टमेंट तक के हाथ पांव फूल रहे हैं। हालत ये है कि मीडिया में काम करने वाले अनुभवी लोग वासिंद्र की असलियत जानने के बाद यहां आना नहीं चाहते, ऐसे में चैनल चलाने वाले काबिल लोग जुटाने मे एचआर परेशान है। ऊपर से ये गारंटी भी नहीं कि आखिर नए लोग कब तक वासिंद्र की गालियां बर्दाश्त करेंगे। अप्रैल 2009 में लॉंच किए गए इस चैनल से अब तक 40 से भी ज्यादा लोगों ने सिर्फ आउटपुट से इस्तीफा दिया है। जबकि इस चैनल के आउटपुट में कुल सदस्यों की संख्या भी करीब इतनी ही है। यानी ढाई साल के भीतर करीब-करीब पूरी टीम ही इसे छोड़कर चली गई। इसमें 20 से ज्यादा महिला पत्रकार रही हैं, जिनमें से ज्यादातर गंदी हरकतों को चैनल छोड़ने की वजह बताया। कई ने अपने आरोप लिखित तौर पर एचआर के पास जमा किया था।
हैरत की बात ये रही कि इतना सब होने के बावजूद एचआर डिपार्टमेंट ने इस हालत का नोटिस नहीं लिया। हाल ही में एक निजी संस्थान से बेस्ट एचआर का अवार्ड हासिल करने का जश्न मनाने वाले इस संस्थान के नीतिनियंता वासिंद्र मिश्रा पर कोई कार्रवाई करने से हिचकते हैं। वासिंद्र इसी वजह से कर्मचारियों पर धौंस जमाने में जुटे रहते हैं। मालिकों से अपनी करीबी का बार-बार हवाला देने वाले ज़ी समहू के यूपी के इस क्षेत्रीय चैनल के संपादक ट्रेनी से लेकर आउटपुट हेड तक को अपने जूते के नीचे रखने की कोशिश करता है। हर हफ्ते एक डेस्क को भंग करने वाला यह संपादक पूरे समूह की आंख की किरकिरी है, लेकिन तमाम अराजकता के बावजूद वो अपने पद पर कायम है।
जी समूह के सभी चैनलों में सप्ताह में 2 दिन की छुट्टी है लेकिन इस चैनल में ज़ी समूह का कानून नहीं वासिंद्र मिश्रा का कानून चलता है। खबरों को लेकर भी हाल यही है। बंदर और नागिन का खेल नहीं दिखाने का दावा करने वाले जी समूह का नेशनल चैनल जहां मायावती सरकार के खिलाफ खबरें दिखाने में नहीं हिचकता और उसका रवैया आक्रामक है तो वहीं वासिंद्र की अगुवाई वाला इसी समूह का जी यूपी चैनल बीएसपी से जुड़ी हर खबर को सेंसर करता है। यहां पूरी तरह सेंसरशिप लागू है। यहां तक कि पिछले दिनों प्रखंड स्तर के बीएसपी के कुछ नेताओं पर लगे बलात्कार के गंभीर आरोपों की खबर को भी संपादक के आदेश पर दबा दिया गया। लखनऊ में सालों के अपने जी हुजूरी के अनुभव के कारण वासिंद्र एक छोटे से नेता या अधिकारी से भी इस कदर भय खाता है कि वो चल रही खबर को भी उतरवा देता है, चाहे किसी विक्षिप्त नाबालिग के साथ बलात्कार की पुख्ता और संवेदनशील खबर क्यों नहीं हो।
अहम बात ये भी है कि भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण निशंक के उत्तराखंड के सीएम पद से विदा होने के बाद से वासिंद्र की चैनल के अंदर हैसियत काफी कम हो गई है। वासिंद्र ने निशंक से अपने करीबी संबंधों का फायदा दिलाकर उत्तराखंड में जी ग्रुप के विश्वविद्यालय को हरी झंडी दिलवाई थी, जिसको लेकर निशंक पर कई तरह के आरोप लगे थे। निशंक के जाने के बाद वासिंद्र खंडूरी पर डोरे डाल रहे है, लेकिन फूंक-फूंक कर कदम रख रहे खंडूरी वासिंद्र के एजेंटों को काम से काम रखकर लगातार टरका रहे हैं। हाल ही में चैनल के वरिष्ठ पत्रकार की देहरादून में सरेआम हुई बेइज्जती भी खासी चर्चा में है।
वहीं यूपी में बीएसपी पर तमाम कोशिशों के बाद भी अपना असर डालने में नाकाम वासिंद्र से समाजवादी पार्टी के नेता भी खफा हैं। इसी वजह से वासिंद्र ने कांग्रेस और बीजेपी के नेताओं के आगे हाजिरी लगाकर अपनी अहमियत कायम रखने की कोशिश की है। पीआर एक्सरसाइज के तहत दोनों दलों के नेताओं के प्रायोजित इंटरव्यू चैनल पर दिन में कई दफा प्रसारित हो रहे हैं। छपास और दिखास रोग के शिकार वासिंद्र इसको लेकर खुद सक्रिय हैं। और वो खुद इन कार्यक्रमों की एंकरिंग में जुटे हैं। इन इंटरव्यू का न्यूजरूम में ही मजाक बन रहा है लेकिन वासिंद्र की धमक के आगे कोई खुलकर इसकी चर्चा नहीं करता।
हालांकि ताजा मामले के बाद चर्चा है कि वासिंद्र के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का मन बनाने को लेकर दबाव झेल रहा जी न्यूज का एचआर डिपार्टमेंट इस्तीफा देनेवालों से अंदर की कहानी को ऑन रिकार्ड दर्ज कर रहा है। कहा ये भी जा रहा है चुनाव से ऐन पहले चैनल की डूबती नैया को संभालने के लिए वासिंद्र पर गाज गिराई जा सकती है। अब तक जी न्यूज समूह के किसी चैनल में कर्मचारियों के इस्तीफे का इतने बड़े पैमाने पर ये अकेला मामला है। अपने कर्मचारियों के साथ घरेलू रिश्ते रखने के लिए जाना जानेवाला यहां का एचआर वासिंद्र के नाम पर हर बार ढीला पड़ता रहा है। लेकिन इस बार पानी सिर से ऊपर जाने की बात कही जा रही है।
हाल ही में चैनल में मालिक के दौरे के दौरान वासिंद्र के खिलाफ शिकायतों का पुलंदा पेश किया गया था। इनमें बिल्डरों से बड़े पैमाने पर दलाली खाने के साथ ही कई नेताओं की तरफ से आई ढेऱों शिकायतें भी शामिल थीं। वहीं पिछले दिनों मुंबई में जी न्यूज समूह के कुछ आलाधिकारियों का पत्ता साफ करने की कार्रवाई के बाद अब वासिंद्र को समूह में अगला निशाना माना जा रहा है। हो सकता है चुनाव से पहले ही इन्हें जी यूपी से किनारे कर दिया जाए।
यह खबर एक मेल से आई है. इस खबर की पुष्टि आधिकारिक सूत्रों से नहीं हो पाई है, जिससे कमी-बेसी संभव है. अगर इस संदर्भ में किसी को अपनी बात कहनी है या जी न्यूज के अंदर-बाहर का हाल बताना है तो नीचे कमेंट बॉक्स या bhadas4media@gmail के जरिए अपनी बात कह सकता है. पक्ष-विपक्ष में आने वाले तथ्यों को प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा.





