धन्य है दैनिक जागरण की पत्रकारिता. गलत-सही काम करने, कर्मचारियों के शोषण करने के आरोप तो इस अखबार पर बराबर लगते रहते हैं लेकिन अब लग रहा है कि इस अखबार ने अपना गांडीव ही सपा सरकार के बैठक में टांग दिया है. अखबार सरकार की गड़बडि़यों की खबर तो प्रकाशित नहीं ही करता है अब मुख्यमंत्री या उनके परिवार से जुड़े अदालती नोटिस को भी प्रकाशित करने में दैनिक जागरण को शरम आने लगी है.
दैनिक जागरण से निष्पक्ष पत्रकारिता की तो उम्मीद नहीं की जाती है, पर एकदम सत्ता का चारण बन बैठेगा ये उम्मीद भी किसी को नहीं होगी. पर क्या करिएगा जो अखबार यूपी की पुलिस को अपनी लठैत की तरह इस्तेमाल कर रहा है आखिर उसे भी तो इन लठैतों का डर होगा ही. कहा जाता है कि शेर की सवारी बहुत खतरनाक होती है. सवारी करते रहेंगे तो भूखों मरेंगे और उतर गए तो शेर मार डालेगा. कुछ इसी तरह की स्थिति दैनिक जागरण की है.
अखबार ने या तो अब सरकार के खिलाफ लिखने-पढ़ने से तौबा कर ली है या फिर सरकार का एहसान चुका रहा है या फिर सरकार से ही डर गया है. इसी का परिणाम है कि हाई कोर्ट को भी इस अखबार के खिलाफ सख्त टिप्पणी करनी पड़ी. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिम्पल यादव के खिलाफ वोटर्स पार्टी इण्टरनेशनल के प्रत्याशी प्रभात पाण्डेय ने लोकसभा उपचुनाव को लेकर याचिका दायर कर रखी है. इस चुनाव में डिम्पल निर्विरोध निर्वाचित हुई थीं. प्रभात ने अपना अपहरण किए जाने का आरोप लगाते हुए यह मामला दायर किया है.
हाई कोर्ट ने इस मामले में एक नोटिस जारी किया था. इस नोटिस को छापने का पैसा लेने के बाद भी दैनिक जागरण ने इसका प्रकाशन नहीं किया, जिसके चलते हाई कोर्ट ने दैनिक जागरण को यह नोटिस प्रकाशित करने का निर्देश दिया है, साथ ही यह भी कहा है कि अगर दैनिक जागरण इस नोटिस को प्रकाशित नहीं करता है तो अगली सुनवाई पर उसके खिलाफ अवमानना का मामला दाखिल किया जाए. अब देखना है दैनिक जागरण सपा से अपनी यारी निभाता है या कोर्ट के आदेश का पालन करता है. इस मामले की अगली सुनवाई 22 नवम्बर को होगी. नीचे पार्टी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति.
सांसद डिम्पल यादव व दैनिक जागरण के खिलाफ हाईकोर्ट का सख्त आदेश
मुख्यमंत्री की पत्नी श्रीमती डिम्पल यादव व दैनिक जागरण के खिलाफ सुनवाई करते हुये आज 5 नवम्बर, 2012 को हाई कोर्ट इलाहाबाद के न्यायमूर्ति डी. पी. सिंह के न्यायालय ने सख्त आदेश जारी किया हैं। यह न्यायालय प्रभात पाण्डेय बनाम डिम्पल यादव के मुकदमें की सुनवाई कर रहा है। यह मुकदमा डिम्पल यादव का चुनाव रद्द करके कन्नौज में फिर से चुनाव कराने के लिये दायर किया गया है। क्योंकि मुकदमें में कहा गया है कि वोटर्स पार्टी इण्टरनेशनल के प्रत्याशी प्रभात पाण्डेय का लोकसभा उपचुनाव के दौरान गत 6 जून को अपहरण का लिया गया था।
गत 11 सितम्बर को याचिका स्वीकार करते हुये मुख्यमंत्री की पत्नी श्रीमती डिम्पल यादव के खिलाफ व कन्नौज की तत्कालीन जिलाधिकारी के खिलाफ नोटिस जारी करके जवाब मांगा था। अदालत ने प्रतिवादियों को 6 सप्ताह का समय देते हुये अगली सुनवाई के लिये 5 नवम्बर की तारीख तय की थी। वोटर्स पार्टी इण्टरनेशनल शुरू से ही कहती रही है कि उसके प्रत्याशी प्रभात पाण्डेय का लोकसभा उपचुनाव के दौरान 6 जून, 2012 को अपहरण का लिया गया था और मीडिया को पैसे देकर गलत खबर छपवा दी गई थी कि मुख्यमंत्री की पत्नी श्रीमती डिम्पल यादव के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिये कोई सामने ही नही आया और डिम्पल यादव चुनाव निर्विरोध जीतकर सांसद बन गईं।
आज 5 नवम्बर, 2012 को सुनवाई करते हुये न्यायमूर्ति श्री डी. पी. सिंह के न्यायालय ने सख्त आदेश जारी किया हैं। आदेश में कहा गया है कि –
1. इटावा जिले के जिला जज हाईकोर्ट की नोटिस को सैफई स्थित डिम्पल यादव के निवास पर चस्पा करवा दे और इसकी सूचना हाईकोर्ट को दें।
(क्योकि दैनिक जागरण द्वारा हाईकोर्ट की नोटिस न छापे जाने का बहाना लेकर श्रीमती डिम्पल यादव आज हाईकोर्ट में पेश नहीं हुई थी और मुकदमें पर अपना जवाब दाखिल नही किया।)
2. हाईकोर्ट इलाहाबाद के रजिस्टार दैनिक जागरण के सम्पादक को पहले से बुक की गई हाईकोर्ट की नोटिस को छापने का आदेश दें, यदि दैनिक जागरण ने फिर भी न छापा तो दैनिक जागरण के ऊपर अदालत की अवमानना का मामला अगली सुनवाई में पेश किया जाये।
3. अगली सुनवाई 22 नवम्बर को होगी।
इस प्रकार प्रतिवादियों को जवाब देने के लिये अदालत ने दो सप्ताह का और समय दे दिया। अब इस मामले में श्रीमती डिम्पल यादव के साथ-साथ दैनिक जागरण समाचार पत्र समूह भी घिर गया है। मीडिया के साथ अखिलेश सरकार का बर्ताव क्या है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कन्नौज में कई दर्जन लोगों के अपहरण की खबर किसी भी समचार पत्र में छपने नही दिया। चार महीने बीत जाने पर भी आज तक कोई एफ. आई. आर नही लिखा गया है। किसी की गिरफ्तारी आज तक नहीं हुई है। यहां तक कि हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति श्री डी. पी. सिंह की अदालत ने श्रीमती डिम्पल यादव के खिलाफ जब नोटिस जारी किया और उस नोटिस को नियमानुसार प्रकाशित करने के लिये सबसे बड़ा अखबार होने के कारण ने हाई कोर्ट ने दैनिक जागरण कानपुर को भेजा।
अखिलेश सरकार की मीडिया पर आतंक की कहानी कितनी भयावह है यह उस समय पता चला, जब दैनिक जागरण ने दिनांक. 10.10.2012 को 6188 रूपया जमा कराके नोटिस छापने के उक्त विज्ञापन की बुकिंग (सं.-10628104) तो कर लिया, किन्तु नाटिस छापने से मना कर दिया। आमतौर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव कहते है कि उनके राज में अपराधों पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। किन्तु घटनायें कुछ और ही बता रही हैं। गत 11 सितम्बर को जब हाई कोर्ट इलाहाबाद ने मुख्यमंत्री की पत्नी श्रीमती डिम्पल यादव के खिलाफ नोटिस जारी किया, तब लोगों को इस बात की जानकारी हुई कि डिम्पल यादव कन्नौज से निर्विरोध चुनाव नहीं जीती थी, अपितु सभी प्रत्यासियों का अपहरण करके उनको पर्चा नही भरने दिया गया था। यह बात वोटर्स पार्टी इण्टरनेशनल शुरू से ही कहती रही है कि उसके प्रत्याशी का अपहरण का लिया गया और मीडिया को पैसे देकर गलत खबर छपवा दी गई।
अखिलेश सरकार कानून व्यवस्था पर कितना ध्यान दे रही है इसका दूसरा उदाहरण स्वयं हाई कोर्ट इलाहाबाद के न्यायाधीश न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी का फैसला है। हाई कोर्ट इलाहाबाद के मुख्य न्यायाधीश ने न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की अदालत को श्रीमती डिम्पल यादव के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई के लिये अधिकृत किया था। मामले पर सुनवाई के लिये गत 8 अगस्त, 17 अगस्त, व 28 अगस्त का याचिका को सूचीबद्ध किया गया था। किन्तु 28 अगस्त को न्यायाधीश द्वारा सुनावई करने से मना कर दिया। बाद में मुकदमें को न्यायमूर्ति श्री श्री डी. पी. सिंह की अदालत में सुनवाई के लिये भेजा गया दौर न्यायालय ने मामले में नोटिस जारी करके 5 नवम्बर तक श्रीमती डिम्पल यादव से जवाब देने को कहा।
वोटर्स पार्टी इन्टरनेशनल के नीति निर्देशक श्री भरत गांधी ने मीडिया के प्रबंधकों से अपील की है कि वे सरकार के आतंक व धन के लोभ में पत्रकारों की इज्जत से न खेलें। क्योंकि झूठी खबरें छापने से जनता में जो आक्रोश पैदा होता है, उसका खामियाजा पत्रकारों को ही भुगतना पड़ता है, धन लेने वाले मीडिया मालिक जनता से दूर बने रहते हैं। उन्होने मीडिया के प्रबंधकों से अपील किया कि सरकार के आतंक का सामना करने के लिये अदालतों की शरण लें। उन्होंने ध्यान दिलाया है कि मीडिया के दुरुपयोग की घटना केवल सपा सरकार में ही नही घटी है, अपितु पहले की सरकारों में भी घटती रही है।
यह दिलचस्प होगा कि अगर यह साबित हो जाता है कि वर्तमान मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव की पत्नी डिम्पल यादव र्निविरोध चुनाव जीतने के लिए अन्य प्रत्याशियों का अपहरण कर लिया था और नामांकन नहीं करने दिया था तो कन्नौज का चुनाव रदद हो सकता है और वहां दोबारा चुनाव कराये जा सकते हैं। इससे समाजवादी पार्टी की आपराधिक छवि एक बार फिर चर्चा का विषय बनेगी। अगर उच्च न्यायानय अपहरण करने वालों को कठोर दण्ड की सिफारिश भी करता है तो राजनीति के अपराधिकरण को रोकने के अभियान में यह घटना एक मील का पत्थर साबित होगी। यह याचिका हाईकोर्ट के रजिस्टार के कार्यालय में 23 जुलाई, 2012 को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 81 के अंतर्गत प्रभात पाण्डे बनाम डिम्पल यादव के नाम से चुनाव याचिका के रूप में दर्ज की गई है। पार्टी ने पूरी याचिका को सुबूतों के साथ वेबाइट पर ऑन लाइन भी किया है, जिसे कोई भी पढ़ सकता है। (प्रेस रिलीज)