देश की बेदिल राजधानी दिल्ली में एक मेडिकल छात्रा की अस्मत लूट ली गयी। छह लोगों ने चलती बस में इस दरिंदगी को अंजाम दिया। पूरा देश इस घटना से स्तब्ध और शर्मसार है। सड़क से लेकर संसद तक मामले की गूंज सुनाई दे रही है। हर पार्टी घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रही है लेकिन कुछ ऐसे लोग भी हैं जो इतनी बड़ी घटना को लेकर शायद उतने संवेदनशील नहीं हैं। या कहें तो वे हद दर्जे के बेशर्म हैं। उन्हें इंसानियत की बोटियां नोचने वाले इस हैवानियत से तनिक भी फर्क नहीं पड़ता है। शायद उनका जमीर मर चुका है। ऐसा ही लगा संसद में राजीव शुक्ला को हंसते देखकर।
राज्यसभा में सांसद गैंग रेप कांड पर चर्चा कर रहे थे। इस चर्चा पर सपा की सांसद जया बच्चन रो रही थीं। पर केन्द्रीय संसदीय कार्य मंत्री राजीव शुक्ला हंस रहे थे। शुक्ला की हंसी कैमरे में कैद हो गयी। उनकी हंसी से साफ था कि वे रेप कांड को लेकर हो रही चर्चा उनके लिए किसी मायने में गंभीर नहीं थी। उनके लिए शायद यह जघन्य बस एक रुटीन था। सोचने पर यह स्थिति और तकलीफ देती है जब आपको पता होता है कि राजीव शुक्ला केवल मंत्री, सांसद ही नहीं हैं वरन पत्रकार भी रहे हैं।

दरअसल भाजपा सांसद माया सिंह ने राज्यसभा में गैंप रेप का मामला उठाया था। उन्होंने इस घटना को लेकर कई सवाल खड़े किये। इन सवालों का जवाब देने के लिए राजीव शुक्ला खड़े हुए। इस दौरान विपक्षी सदस्य कानून व्यस्था को लेकर हंगामा करने लगे। इस पर राजीव शुक्ला हंस पड़े। पर शुक्ला शायद भूल गए कि उनकी यह बेशर्म हंसी सारा देश टीवी पर देख रहा है। शायद शुक्ला को इस घटना से कोई फर्क भी न पड़ा हो क्योंकि वो अब नेता हो गए हैं, ऐसे नेता जिनके सीने में दिल नहीं होता, जिसकी संवेदना मर गई हो और शरीर में बस स्वार्थ का लहू बहता है।






