बनारस-इलाहाबाद के कई अखबारों के पीडि़तों एवं प्रताडि़तों से तैयार जनसंदेश टाइम्स की टीम की गलतियां पाठकों के लिए मुश्किल का सबब बन रही हैं. टीम ही ऐसी है कि अपनी पूरी ताकत लगाने के बाद भी ढंग से त्रुटिहीन अखबार नहीं निकाल पा रही है. न्यूज सेंस की बात अगर छोड़ भी दें तो एक दिन भी ढंग का अखबार पाठकों को नहीं मिल रहा है. आशीष बागची के संपादकत्व में चल रहा यह अखबार रोज कुछ ना कुछ नया कर रहा है, जिससे अखबार की किरकिरी हो रही है. ताजा मामला इसी यूनिट से जुड़े इलाहाबाद का है.
अखबार ने अपने पहले पेज पर सिंगल कॉलम में पीसीएस के रिजल्ट के बारे में खबर प्रकाशित की है. पहले पेज पर खबर का कुछ भाग देने के बाद शेष के 13 नम्बर पेज पर लिखा गया है. पर जब पाठक 13 नम्बर पेज पर जाता है तो इस हेडिंग के नीचे कोई और खबर मिलती है. इलाहाबाद प्रशासनिक परीक्षाओं की तैयारी का हब माना जाता है, लिहाजा पीसीएस की परीक्षा देने वाले तमाम लोग अखबार में प्रकाशित आधी अधूरी सूचना को लेकर परेशान हुए. अखबार की जमकर किरकिरी हुई.
जाहिर है कि जो भी पाठक वर्ग होगा, अखबार की ऐसी गलती को देखकर इससे दूर ही होगा. सूत्रों का कहना है कि बनारस में भांग खाकर बैठे संपादकीय के लोगों से आए दिन इस तरह की गलतियां होती ही रहती हैं. इलाहाबाद एडिशन भी बनारस से ही प्रकाशित होता है और ऐसा कोई भी दिन नहीं जाता है जब अखबार बिना किसी गलती के प्रकाशित हो जाए. इसका सीधा सा कारण है कि यहां क्वालिटी के लोगों को रखे जाने की बजाय नातेदारों, रिश्तेदारों, परिचितों, पीडि़तों और प्रताडि़तों को रखा गया है. हिंदुस्तान अखबार का ज्यादातर कूड़ा कचरा ही जनसंदेश टाइम्स का हिस्सा बन गया, जिससे हिंदुस्तान की स्थिति तो सुधर गई, पर जनसंदेश टाइम्स का बंटाधार हो गया. आप भी देखिए खबर…








