दैनिक जागरण, मुजफ्फरपुर में रविवार का दिन काफी तनाव भरा रहा. साप्ताहिक मीटिंग में दो वरिष्ठों के भिड़ने से पूरा रिपोर्टिंग स्टाफ हक्का बक्का रह गया. यहां तक कि कुर्सियां चलने की नौबत आ गई, पर बीच बचाव कर मामले को किसी तरह सुलझाया गया. इसके बावजूद माहौल में गरमी बनी हुई है. और अगर मौसम विज्ञान की भाषा में बात करें तो किसी भी समय गरज के साथ छींटे पड़ने या बूंदाबांदी होने की संभावना यूनिट में बराबर बनी हुई है.
सूत्रों का कहना है कि रविवार को इनपुट तथा आउटपुट की साप्ताहिक बैठक चल रही थी कि किसी बात को लेकर इनपुट के वरिष्ठ तथा आउटपुट के एक वरिष्ठ के बीच तू तू-मैं मैं शुरू हो गया. इसके बाद नौबत देख लेने व समझ लेने तक पहुंची. इसके बाद बात इतनी बढ़ गई कि दोनों वरिष्ठ एक दूसरे पर कुर्सी फेंकने की कोशिश शुरू कर दी. वो तो भला हो वहां मौजूद अन्य पत्रकारों का जिन्होंने दोनों लोगों के बीच में आकर कुर्सी फेंकने से रोक दिया, जिससे एक बड़ी घटना होने से बच गई. हालांकि इस घटना से हर कोई हतप्रभ रह गया.
हालांकि इस मामले को लेकर यूनिट में तनाव बना हुआ है. सूत्रों का कहना है कि इस घटना की जानकारी के बाद रविवार को संपादकीय प्रभारी भी कार्यालय नहीं आए. बताया जा रहा है कि इस विवाद का कारण काम से ज्यादा जाति वचर्स्व का है. अभी हाल ही में संस्थान से जुड़े एक संवाद सूत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आउटपुट के वरिष्ठ ने अपनी आपत्ति जताई और किसी दूसरे साथ को रेलवे बीट देने की बात कही. अपने स्वजातीय संवाद सूत्र की बात आते ही इनपुट के वरिष्ठ महोदय आपे से बाहर हो गए और जागरण के ही स्वास्थ्य बीट देख रहे एक अन्य संवाददाता को निकालने की बात करने लगे. जबकि ये संवाददाता आउटपुट के वरिष्ठ और संपादकीय प्रभारी का स्वाजातीय है. घटना के बाद संपादकीय प्रभारी डैमेज कंट्रोल में लगे हुए हैं, लेकिन दोनों वरिष्ठ मानने को तैयार नहीं है. इसको लेकर संस्थान के अंदर गुटबाजी शुरू हो गई है. मामला कभी भी बिगड़ सकता है.