बड़े-बड़े माफियाओं से लेकर भ्रष्टाचारी नेताओं की कलई खोलने का काम हम पत्रकारों का है। गैरसंवैधानिक रूप से ही सही, लोग जब हमें लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहते हैं तो हम अपने आपको गौरवान्वित महसूस करते हैं, पर चंद घटिया सोच रखने वाले और चाटुकार पत्रकारों की ओछी हरकतें पत्रकारिता के लिए शर्मनाक बन जाती है। ऐसे लोग चंद मिनटों के निजी फायदे के लिए पत्रकार शब्द को कौड़ियों के भाव बेच देते हैं। मै बात कर रहा हूँ दरभंगा, बिहार में हो रहे प्रमंडल स्तरीय मीडिया कप क्रिकेट टूर्नामेंट का।
नाम तो मिडिया कप है, पर मीडियाकर्मियों को यहाँ खेलने का मौका नही मिल रहा है। इस खेल में मीडियाकर्मियों के वेश में कुछ पेशेवर क्रिकेटर खेल रहे हैं जिन्हें कुछ पत्रकारों ने सह दे रखा है। इसकी जानकारी मीडिया स्पोर्ट क्लब दरभंगा को भी है, परन्तु उनके भी कुछ लोग अपने चंद निजी फायदे के लिए इसे नजर अंदाज कर रहे हैं। मेरा सीधा सवाल है मिडिया स्पोर्ट क्लब दरभंगा से कि अगर गैर मीडियाकर्मियों को ही खेलवाना है तो इस आयोजन का नाम मिडिया कप क्यों रखा गया है? जब एक बार किसी टीम पर पेशेवर खिलाड़ी लाने का आरोप लगा है तो फिर दुबारा उस टीम के सभी खिलाडियों के नाम और पेशे की जांच क्यूँ नही की गयी? जिस शख्स को पिछली बार मीडिया स्पोर्ट क्लब ने काली सूची में डाला था, फिर इस बार उसे कैसे खेलने दिया गया।
ऐसे ढेर सारे सवाल है जिसका जवाब मीडिया स्पोर्ट क्लब दरभंगा नही दे पा रहा है। इन्ही बातों को लेकर आज मीडिया स्पोर्ट क्लब के एक सदस्य और पत्रकार विजय श्रीवास्तव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इससे ये साफ़ प्रतीत होता है की मीडिया स्पोर्ट क्लब और इस आयोजन में भाग लेने वाली कुछ टीमें इस आयोजन के बहाने सिर्फ फण्ड का बंदरबांट कर रही है। अगर ऐसा नही है तो मीडिया स्पोर्ट क्लब स्वच्छ आयोजन करके दिखाए।
-अभिजीत कुमार की रिपोर्ट






