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निर्मल बाबा मुकदमें में जानबूझकर की गई गलत विवेचना, डीएसपी से विवेचना की मांग

 

मेरे बच्चों तनया और आदित्य ठाकुर ने थाना गोमतीनगर, जनपद लखनऊ में निर्मलजीत सिंह नरूला उर्फ निर्मल बाबा के विरुद्ध अत्यंत सरलीकृत बातें और समाधान प्रस्तुत कर ईश्वरीय नाराजगी का भय दिखा कर पूरे देश की गरीब, अनपढ़ जनता को ठगने के सम्बन्ध में एक एफआईआर दिया था. थाने पर एफआईआर दर्ज नहीं होने पर उन्होंने सीजेएम, लखनऊ के पास प्रार्थना पत्र दिया, जिसके आधार पर 12 मई 2012 को गोमतीनगर थाने में मु०अ०स० 202/12 धारा 417/419/420/508 आईपीसी दर्ज हुआ. 

 

मेरे बच्चों तनया और आदित्य ठाकुर ने थाना गोमतीनगर, जनपद लखनऊ में निर्मलजीत सिंह नरूला उर्फ निर्मल बाबा के विरुद्ध अत्यंत सरलीकृत बातें और समाधान प्रस्तुत कर ईश्वरीय नाराजगी का भय दिखा कर पूरे देश की गरीब, अनपढ़ जनता को ठगने के सम्बन्ध में एक एफआईआर दिया था. थाने पर एफआईआर दर्ज नहीं होने पर उन्होंने सीजेएम, लखनऊ के पास प्रार्थना पत्र दिया, जिसके आधार पर 12 मई 2012 को गोमतीनगर थाने में मु०अ०स० 202/12 धारा 417/419/420/508 आईपीसी दर्ज हुआ. 
 
इस मुक़दमा में मेरे और बच्चों के बयान होने के बाद जब कोई प्रगति नहीं दिखी तो मैंने डीजीपी, यूपी को 19 सितम्बर 2012 को पत्र लिख कर दिल्ली हाई कोर्ट में दायर सीएस (ओएस) 1518/2012 के 14 सितम्बर के आदेश, जिसके द्वारा निर्मल बाबा के सरलीकृत समाधानों की आलोचना की गयी थी, को उद्धृत करते हुए यथाशीघ्र निष्पक्ष विवेचना कराने का अनुरोध किया. 
 
 
इस बीच मैंने विवेचक राजेश कुमार सिंह, सबइंस्पेक्टर, गोमतीनगर से संपर्क किया तो वे कहते रहे कि विवेचना जारी है. बाद में थाने से पूछताछ से ज्ञात हुआ कि राजेश सिंह ने 02 अगस्त 2012 को पांचवे पर्चे में ही यह कहते हुए फाइनल रिपोर्ट लगा दिया था कि वादी पक्ष द्वारा कोई भी पीड़ित एफआईआर के समर्थन में नहीं लाया गया और कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया. तफ्तीश के नाम पर उन्होंने मात्र दूसरे पर्चे में मेरा और बच्चों का बयान, तीसरे पर्चे में निर्मल बाबा की गिरफ़्तारी पर रोक का हाई कोर्ट का आदेश और चौथे पर्चे में 31 जुलाई को निर्मल बाबा और उनके कुछ लोगों के बयान अंकित किये. गनीमत है कि क्षेत्राधिकारी, गोमतीनगर ने 17 अक्टूबर के आदेश द्वारा अन्तिम रिपोर्ट रोक कर विवेचना बीआर निर्मल को दे दी है.
 
सीजेएम, लखनऊ के आदेश से दर्ज इस मुकदमे में लखनऊ पुलिस ने ना तो किसी पीड़ित से पूछताछ करने की कोशिश की और ना मुझसे इस संबंध में संपर्क किया. सबसे गंभीर बात यह है कि विवेचक ने 16 मई को निर्मल बाबा को धारा 160 सीआरपीसी के अंतर्गत एक नोटिस भेजा था जिसमे बयान देने और 9 बिंदुओं पर सूचना देने के आदेश निर्गत किये थे, जिनमे संस्था की नियमावली, स्मृतिपत्र, विगत 10 वर्षों के आयकर भुगतान, बैंक खातों के पासबुक आदि की जानकारी शामिल थे. लेकिन इस विवेचना की केस डायरी में ना तो उस नोटिस का कोई जिक्र है और ना ही वह नोटिस केस डायरी में शामिल किया गया है.
स्पष्ट दिखता है कि लखनऊ पुलिस द्वारा जानबूझ कर गलत विवेचना की गयी है. मैंने इस सम्बन्ध में 01 नवंबर को डीजीपी, यूपी को पत्र लिख कर पूर्व विवेचक के विरुद्ध कार्यवाही करने और इसकी विवेचना किसी क्षेत्राधिकारी से डीआईजी, लखनऊ के व्यक्तिगत पर्यवेक्षण में करवाने का अनुरोध किया है. 
 
डॉ. नूतन ठाकुर
 
कन्वेनर, आईआरडीएस 
 
लखनऊ # 94155-34525
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