उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन की बयार के साथ ही जन्संदेश चैनल से न्यूज टाइम के नाम चोला ओढ़ने वाले चैनल की हालत अब बद से बदतर हो चुकी है। उत्तर प्रदेश की पिछली सरकार के चुनिन्दा नेताओं के रहमोकरम पर संचालित होने वाले इस न्यूज चैनल को अब ग्रहण लग चुका है। बहुजन समाज पार्टी का तमगा लिए यह चैनल नाम परिवर्तन के बावजूद अपने कर्मों को छुपा न सका। नतीजा यह रहा कि समाजवादी सरकार के सत्ता में आने के बाद से इस चैनल को अब तक एक भी सरकारी विज्ञापन नहीं जारी किया गया।
सूत्रों की माने तो मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का सूचना विभाग को सख्त निर्देश है कि छोटे से छोटे चैनल को भले ही विज्ञापन दिया जाए पर गलती से भी न्यूज टाइम को कोई विज्ञापन जारी न हो। सरकारी तो छोडिए चैनल पर निजी कंपनियों के विज्ञापनों का भी टोटा है। कहते हैं न जब गीदड़ की मौत आती है तो वह शहर की तरफ भागता है ..कुछ ऐसा ही है न्यूज टाइम के साथ। एक तो चैनल की ऐसी दुर्दशा ऊपर से चैनल में जी जान से काम करने वाले लोगों को चैनल के चीफ एडिटर सैयेदेन जैदी बाहर का रास्ता दिखा रहे हैं, जबकि उनसे ताल्लुक रखने वाले लोगों को मोटी तनख्वाह पर रखा जा रहा है।
ऐसा ही देखने को मिला चैनल के लखनऊ स्थित ब्यूरो दफ्तर में जहाँ दिवाली के बोनस का इंतज़ार कर रहे चैनल के पुराने कर्मियों को अचानक बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। चीफ एडिटर साहब ने बीते एक नवम्बर को एक मेल भिजवा कर चैनल में काफी समय से काम कर रहे कैमरामैन संजय यादव, नदीम और रिपोर्टर योगेश सिंह को कास्ट कटिंग के नाम पर बहार निकाल दिया, जबकि लखनऊ से रिपोर्टर योगेश जी जान लगाकर सभी खबरों पर बराबर नजर रख कर उसे भेजने का काम कर रहे थे। पर चीफ एडिटर साहब ने उनके स्थान पर एक साथ दो-दो नौकरिया करने वाले और बिन बुलाए प्रेस कांफ्रेंस में डगगेमारी करने वाले अपने एक करीबी पर नजरे इनायत बरकरार रखी।
यही नहीं चैनल के नॉएडा आफिस से जुड़े लोग भी चीफ एडिटर के इस करीबी रिपोर्टर की गलतियों की सजा किसी और को देने से नहीं चूकते। अब भला यह कहाँ का इन्साफ है कि खर्चे कम करने के लिए जिस कामचोर महंगे रिपोर्टर को हटाना चाहिए था उसे कंपनी गोद में बैठा कर मलाई खिला रही है, जबकि कम तनख्वाह में जी जान से काम करने वाले लोगों को बाहर किया जा रहा है। बरहाल कुछ भी हो निकले गए लोगों को तो कहीं न कहीं तो दूसरी नौकरी मिल ही जाएगी, पर डूबती नाव की सवारी कर रहा चैनल का अन्य स्टाफ अपने कंपनी के अधिकारियों द्वारा नाव मे खुद छेद किये जाने से हैरान है …सभी को यह पूरा विश्वास है कि चैनल में काम करने वाले कर्मचारी इस चैनल में रहते हुए 2014 के लोकसभा चुनावों की सूरत नहीं देख पाएँगे।
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.