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सुख-दुख...

पांच दिनों से शराब छोड़े एक शराबी का सुबह के वक्त संक्षिप्त प्रवचन

मेरे एक मित्र हैं. नाम नहीं बताऊंगा. बस इतना बताऊंगा कि वे भी मेरी तरह दर्जनों बार मदिरा त्याग करने की कसम खा चुके हैं. और, वे भी मेरी तरह मदिरा पान करते हुए पीने की मात्रा का अक्सर आकलन नहीं कर पाते जिस वजह से वह 'अति मदिरा सेवन' नामक बीमारी से ग्रस्त हो जाते और इसके कारण तरल पदार्थ भारी मात्रा में उदरस्थ करते हुए काफी देर बाद खुद बिस्तर पर अस्त हो जाते.

मेरे एक मित्र हैं. नाम नहीं बताऊंगा. बस इतना बताऊंगा कि वे भी मेरी तरह दर्जनों बार मदिरा त्याग करने की कसम खा चुके हैं. और, वे भी मेरी तरह मदिरा पान करते हुए पीने की मात्रा का अक्सर आकलन नहीं कर पाते जिस वजह से वह 'अति मदिरा सेवन' नामक बीमारी से ग्रस्त हो जाते और इसके कारण तरल पदार्थ भारी मात्रा में उदरस्थ करते हुए काफी देर बाद खुद बिस्तर पर अस्त हो जाते.

इन दिनों जाने किन वजहों से मदिरा का त्याग कर रखा है. हालांकि वे इसको त्यागने के पक्ष में बड़ी बड़ी बातें करते हैं पर मुझे लगता है कि अगर बड़ी बड़ी बातों के कारण ही लोग मदिरा त्यागने में सफल हो जाते तो मैं भी हो गया होता. खैर, फिलहाल उनकी बातों पर मुझे तो भरोसा नहीं है लेकिन वे बढ़-चढ़कर हांकने पर उतारू हैं. आज देर रात काम करने के कारण मैं अभी-अभी अपने लैपटाप को बंद कर सोने जाने को हुआ तो मुझे जीमेल पर वो आनलाइन दिखे तो मैंने उन्हें जय जय किया. तब उन्होंने जवाब में मेरे पास एक पत्र भेजा. बता दूं, कि तीन दिनों से मैंने भी छोड़ रखी है. उनके जवाबी पत्र का पूरा प्रकाशन नीचे किया जा रहा है. आनंद लें. -यशवंत, भड़ास4मीडिया


किसकी जय हो भइया। आज सुबह-सुबह ही उठ गये। कोई खास बात। लगता है कि शराब छोड़ ही दी है आपने। बहुत अच्‍छा किया। मुझे तो अब यह लगने लगा है कि कम से कम शराब के मामले में हम लोगों का चल रहा अतिवाद हमारी ऊर्जा को चाट डालेगा। वैसे भी कितना पैसा खर्च कर देते हैं हम लोग इस चूतियापंथी पर। नतीजा क्‍या मिलता है, केवल भोपाल में बवाल और खुद अपना ही नुकसान। लानत है। शराब का मुझ पर कुछ ज्‍यादा ही असर होता है। नींद के बाद शरीर चुसा हुआ लगता है। लगता है जैसे किसी ने निचोड़ दिया और अब ताकत ही नहीं रही। मैं तो पिछले पांच दिनों से शराब को देख तक नहीं रहा हूं। हां, छोड़ने का प्रभाव दिख रहा है। लेकिन सुबह जब भी नींद खुलती है, टहलने निकल लेता हूं।

लेकिन एक फर्क दिख रहा है शराब छोड़ने का। वह यह कि नींद बहुत आ रही है। आठ दस घंटे के बाद बिस्‍तर पूरे आग्रह के साथ अपने पास बुलाने लगता है। और जाते ही दबोच लेता है। कुछ खास प्रयास नहीं करना पड़ता, लेटते ही नींद। कम से कम ढाई-तीन घंटे की। इससे दिक्‍कत केवल इतनी ही है कि बच्‍चे, परिजन, शुभचिंतक, सहायक आदि इत्यादि यह समझते हैं, शायद, कि मैं आलसी होता जा रहा हूं। लेकिन कितने दिनों तक चलेगा यह। मैं समझता हूं कि कुछ ही दिनों में यह सारा कुछ अपनी वही पुरानी सहज रफ्तार पकड़ लेगा जो शराब से पहले थी। यह सब लिखने के बादअब निकल रहा हूं सुबह की सैर को। बाय-बाय।

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