लखनऊ : यूपी के कई जिलों में पत्रकारों की पुलिस पिटाई और प्रदेश भर में बलात्कारों की ताबड़तोड़ भरमार के माहौल में लखनऊ के नामचीन पत्रकारों ने जमकर जश्न मनाया। बीते साल की विदाई और नये साल के पावन मौके के नाम पर इन पत्रकारों ने अपने-अपने गले में शराब की दरिया बहाया और मुर्गों की अंत्येष्टि का जश्न मनाया। इसी दौर फोटो-सेशन भी हुआ। जाहिर है कि बात खुली और फिर शुरू हो गया आलोचनाओं और निंदाओं का दौर। पार्टी में कुछ बड़े पुलिस और प्रशासनिक अफसरों ने भी शिरकत की। हालांकि करीब एक सैकड़ा पत्रकारों की इस पार्टी के आयोजकों का दावा है कि यह इन-हाउस मामला था।
खुद को संवेदनशील, भावुक और सरोकारों से जुड़े होने का दावा करने लखनऊ के नामचीन पत्रकारों की एक बड़ी पार्टी 30 दिसम्बर को सम्पन्न हुई। शाम से हुए इस जमावड़े ने इस मौके पर देर रात तक मौज की। खाली होने के बाद दर्जनों बोतलों को कोने में लुढ़का दिया गया। शाकाहारी और मांसाहारी भोजन के थाल के थाल खाली किये गये। हालांकि कई पत्रकारों ने ऐसे आयोजन से खुद को अलग करने की कोशिश की थी, लेकिन बड़े स्तर पर पड़े दबावों के बाद वे इस पार्टी में शामिल हो भी गये। जबकि कई लोगों ने केवल अपनी उपस्थिति भर जतायी और फिर निकल गये।
हैरत की बात है कि जब एक तरफ पूरा देश दामिनी-कांड पर आक्रोश और दु:ख प्रकट कर रहा था और प्रधानमंत्री जैसी शख्सियतों ने नये साल के जश्न से खुद को सरकारी तौर पर भी अलग कर दिया था। और तो और देश के पत्रकारों की शीर्ष संस्था भारतीय प्रेस क्लब में ऐसे किसी आयोजन न करने का फैसला किया था। इतना ही नहीं, बाराबंकी और रायबरेली समेत कई जिलों में पत्रकारों को पुलिस ने अपनी लाठियां अपनी पीठ पर महसूस करायी थीं, शासकीय प्रताड़ना का सामना करना पड़ा है। ऐसी हालत में अपनी जमात में अगुआ होने का दावा करने वाले आला-दर्जे के पत्रकारों का अपने लिए यह पार्टी आयोजित करना कई पत्रकारों को बहुत अखर गया।
पत्रकारों का कहना है कि इस तरह की रंगारंग पार्टी आयोजित करने के बजाय अगर यह पत्रकार अपने साथियों के साथ कई जिलों में हुए प्रशासनिक प्रताड़ना पर चर्चा करते तो उनका सम्मान होता, लेकिन केवल पार्टी आयोजित करने तो इन पत्रकारों ने अपने ही समाज की नाक कटवा लिया है। खासकर तब जब रायबरेली के पत्रकार खुद पर पुलिस अधीक्षक द्वारा की गयी लाठीचार्ज से क्षुब्ध होकर पिछले 19 दिसम्बर से अनिश्चितकालीन धरना पर बैठे हैं। 27 दिसम्बर को ही 55 से अधिक संगठनों ने पूरा जिला में अभूतपूर्व बंदी आयोजित कर डाली थी।
हालांकि इस पार्टी के बारे में आयोजकों का कहना है कि यह केवल इन-हाउस पार्टी थी तथा एक संस्थान द्वारा दिया गया था, किसी पत्रकार संगठन से इसका कोई लेना-देना नहीं था। आयोजक पत्रकार का कहना है कि यह नये साल का जश्न नहीं, बल्कि इस संस्थान का कार्यक्रम था जो वार्षिक और अमूमन अक्तूबर मास में तहरी-भोज की तरह होता है। लेकिन इस बार आयोजन में विलंब हो गया, इसलिए उसे 30 दिसम्बर को आयोजित किया गया। खैर, निहार लीजिए अब इस आयोजन की चंद फोटो-



कुमार सौवीर






