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बनारस में दो दिनों से नहीं बंट रहा दैनिक जागरण, हिंदुस्‍तान और अमर उजाला

: कमीशन खतम करने को लेकर हॉकरों की हड़ताल : बनारस में हॉकरों और तीन बड़े अखबार के प्रबंधन में कमीशन को लेकर घमासान मचा हुआ है. इसका असर है कि शनिवार और रविवार को बनारस में हॉकरों ने दैनिक जागरण, हिंदुस्‍तान तथा अमर उजाला की एक भी प्रति नहीं उठाई. अखबार प्रबंधन खुद ही अखबार का वितरण अपने संसाधनों से करा रहा है. खबर है कि कुछ हॉकरों के खिलाफ अखबार प्रबंधन ने एनसीआर भी करा दिया है.

: कमीशन खतम करने को लेकर हॉकरों की हड़ताल : बनारस में हॉकरों और तीन बड़े अखबार के प्रबंधन में कमीशन को लेकर घमासान मचा हुआ है. इसका असर है कि शनिवार और रविवार को बनारस में हॉकरों ने दैनिक जागरण, हिंदुस्‍तान तथा अमर उजाला की एक भी प्रति नहीं उठाई. अखबार प्रबंधन खुद ही अखबार का वितरण अपने संसाधनों से करा रहा है. खबर है कि कुछ हॉकरों के खिलाफ अखबार प्रबंधन ने एनसीआर भी करा दिया है.

जानकारी के अनुसार राष्‍ट्रीय सहारा और जनसंदेश टाइम्‍स के आने के दौर में दैनिक जागरण, हिंदुस्‍तान तथा अमर उजाला सर्कुलेशन प्रभावित होने से रोकने के लिए हॉकरों को पचीस पैसा बोनस के रूप में दे रहे थे. यह दौर लंबे समय से चल रहा था. हॉकरों ने बोनस के चक्‍कर में इन अखबारों का सर्कुलेशन बनाए रखा. जब प्रबंधन को यकीन हो गया कि अब सर्कुलेशन कम नहीं होने वाला है तो तीनों अखबारों ने पचीस पैसे का बोनस खतम कर दिया.

इससे नाराज हॉकरों ने हड़ताल शुरू कर दी. शनिवार को हॉकरों ने इन तीनों अखबारों का वितरण ठप कर दिया. अखबार प्रबंधकों से हॉकरों की कई राउंड बात हुई, इसके बाद भी मामला सुलझ नहीं पाया. इसके बाद हॉकरों का एक समूह अपनी मांग लेकर जागरण के डाइरेक्‍टर वीरेंद्र कुमार के घर तक भी गया, लेकिन वहां भी कोई बात नहीं बनी. इसके बाद अखबार प्रबंधन ने पुलिस को अर्दब में लेते हुए कुछ हॉकरों के खिलाफ थाने में एनसीआर दर्ज करा दिया.

खबर है कि पुलिस ने अखबार प्रबंधन के दबाव में तीन-चार हॉकरों को बंद भी किया. अखबार रविवार को भी नहीं बंटा है. हॉकरों का कहना है कि महंगाई रोज रोज बढ़ रही है. अखबार प्रबंधन उनका कमीशन बढ़ाने की बजाय जो पैसे दे रहा था, अब उसमें भी कटौती कर रहा है. खबर है कि पुलिस की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच बातचीत हो रही है. समझौता का रास्‍ता निकालने की कोशिश चल रही है. वैसे अखबारों के विज्ञापन और कमाई रोज बढ़ रहा है, लेकिन किसी भी अखबार की रीढ़ समझे जाने वाले हॉकरों की कमाई प्रबंधकों को अखरने लगती है. 

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