एक दौर में वे देहरादून में हिंदी के चौथे नम्बर के अखबार के संपादक हुआ करते थे. बाद में संपादक बनाकर बनारस भेजे गए. वहां भी प्रबंधन की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे तो नोएडा बुला लिए गए. इन पूर्व संपादक महोदय की शिकायत देहरादून के एक जाने माने स्कूल ने अखबार प्रबंधन से की है कि यह अपनी बेटी को लंबे अर्से से दबाव डालकर, डरा धमकाकर फ्री में पढ़वा रहे हैं. प्रबंधन ने मामले की जांच कराया और तय पाया कि स्कूल की शिकायत सही है.
सूत्रों का कहना है कि देहरादून में स्थित समरवैली स्कूल ने इस अखबार के प्रबंधन से पूर्व संपादक की शिकायत की है. इनकी पुत्री इस स्कूल में पढ़ती है. इनका पुत्र भी दून इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ चुका है. समरवैली स्कूल प्रबंधन ने आरोप लगाया है कि पूर्व संपादक डरा-धमकाकर अपनी पुत्री को फ्री में पढ़वा रहे हैं. वो फीस नहीं देते हैं. फीस मांगी जाती है तो तमाम तरीकों की धमकियां देने-दिलवाने लगते हैं. प्रबंधन ने कुछ साल पहले संपादक महोदय को बनारस का संपादक बनाकर भेजा था, पर वहां भी उन्होंने इसी तरह के खेल शुरू किए. इसकी शिकायत जब प्रबंधन को मिली तो उसने इनकी जगह भास्कर समूह के वरिष्ठ पत्रकार को संपादक बनाकर बनारस भेज दिया तथा इन्हें नोएडा बुला लिया. आजकल नोएडा में ही हैं, लेकिन जलवा देहरादून में अब तक कायम किए हुए हैं.
अब देखना है कि स्कूल प्रबंधन की शिकायत पर अखबार इन पर क्या कार्रवाई करता है. स्कूल को पैसे दिलवाता है या इनके खिलाफ कोई कार्रवाई करता है. हां, इस बात के चर्चे देहरादून में हर जगह होने शुरू हो चुके हैं, जिससे अखबार की भी भद्द पिट रही है.






