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भ्रष्‍टाचार के आरोपी अधिकारी राजीव कुमार के खिलाफ पत्रकार संजय शर्मा ने पीआईएल दाखिल किया

उत्तर प्रदेश में खुद को बड़े से बड़ा अखबार होने का दावा करने वाले संस्‍थान जहां अखिलेश सरकार की परिक्रमा में लगे रहते हैं। तो दूसरी ओर कुछ ऐसे अखबार भी हैं जो अपनी निष्पक्षता के चलते आम आदमी के मन में जगह तो बना ही रहे हैं साथ ही सरकार को यह आईना भी दिखा रहे हैं कि उसके गलत कृत्यों के खिलाफ बोलने का साहस भी अभी बचा है। कुछ ऐसा ही शुक्रवार को वीकएंड टाइम्स ने फिर करके दिखा दिया।

उत्तर प्रदेश में खुद को बड़े से बड़ा अखबार होने का दावा करने वाले संस्‍थान जहां अखिलेश सरकार की परिक्रमा में लगे रहते हैं। तो दूसरी ओर कुछ ऐसे अखबार भी हैं जो अपनी निष्पक्षता के चलते आम आदमी के मन में जगह तो बना ही रहे हैं साथ ही सरकार को यह आईना भी दिखा रहे हैं कि उसके गलत कृत्यों के खिलाफ बोलने का साहस भी अभी बचा है। कुछ ऐसा ही शुक्रवार को वीकएंड टाइम्स ने फिर करके दिखा दिया।

वीकएंड टाइम्स के संपादक संजय शर्मा ने आज उच्च न्यायालय में याचिका दायर करके प्रमुख सचिव नियुक्ति को निलंबित करने संबंधी पीआईएल दाखिल कर दी। इस याचिका पर बुधवार को सुनवाई होनी है। मगर याचिका दायर होते ही सरकार में हडकंप मच गया है। राजीव कुमार सरकार के दुलारे अफसरों में माने जाते हैं। उल्लेखनीय है नोयडा में भूमि घोटाले में नीरा यादव के साथ राजीव कुमार को तीन साल की सजा हुई थी तथा एक लाख रुपये जुर्माना लगाया गया था। इस सजा के होने के समय राजीव कुमार प्रमुख सचिव नियुक्ति के पद पर तैनात थे। इस सजा के बाद राजीव कुमार को उनके पद से हटा दिया गया था। सजा के बाद राजीव कुमार ने हाईकोर्ट की शरण ली थी जहां उन्हें स्टे मिला। इसके तुरंत बाद सरकार नें राजीव कुमार को फिर प्रमुख सचिव नियुक्ति के पद पर तैनात कर दिया।

सरकार बनते ही जब राजीव कुमार को इस पद पर तैनात किया गया तो केवल वीकएंड टाइम्स ने ही खबर छापी थी कि किसी दागी व्यक्ति को इस पद पर तैनात नहीं किया जाना चाहिए। हाईकोर्ट के स्टे के बाद जब सरकार ने दुबारा यह तैनाती की तो वीकएंड टाइम्स के संपादक संजय शर्मा ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर करके कहा कि राजीव कुमार की सजा को उच्च न्यायालय ने समाप्त नहीं किया है बल्कि उन्हें स्टे दिया है। प्रमुख सचिव नियुक्ति सबसे महत्वपूर्ण पद होता है और वह ही प्रदेश के सभी पीसीएस और आईएएस अफसरों की तैनाती का प्रस्ताव तैयार करता है। ऐसे पद पर किसी दागी अफसर की तैनाती उचित नहीं है।

याचिका में कहा गया है कि जब दो साल की सजा होने पर विधायकों, सांसदों को चुनाव लडने के अधिकार से वंचित कर दिया जाता है तो फिर किसी आईएएस अफसर को तीन साल की सजा होने पर नौकरी करने का अधिकार कैसे दिया जा सकता है। उन्होंने याचिका में राजीव कुमार को नौकरी से बर्खास्त करने की मांग की है। वीकएंड टाइम्स के संपादक संजय शर्मा की इस साहसिक कार्रवाई को कई सामाजिक संगठनों ने सराहा है।

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