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मीडिया और माफियाओं की जकड़ में है देश

: प्रेस क्‍लब में 'शील पर बयानों के शूल’ टॉक शो का आयोजन : इंदौर। इंदौर प्रेस क्लब में टॉक शो ‘शील पर बयानों के शूल’ का आयोजन किया गया। टॉक शो में तमाम वक्ताओं ने देश के नेताओं से मर्यादित आचरण रखने और सोच-समझकर बोलने का आग्रह किया। यह तथ्य भी सामने आया कि सुनियोजित तरीके से देश की युवा पीढ़ी को भ्रष्ट करने का काम किया जा रहा है।

: प्रेस क्‍लब में 'शील पर बयानों के शूल’ टॉक शो का आयोजन : इंदौर। इंदौर प्रेस क्लब में टॉक शो ‘शील पर बयानों के शूल’ का आयोजन किया गया। टॉक शो में तमाम वक्ताओं ने देश के नेताओं से मर्यादित आचरण रखने और सोच-समझकर बोलने का आग्रह किया। यह तथ्य भी सामने आया कि सुनियोजित तरीके से देश की युवा पीढ़ी को भ्रष्ट करने का काम किया जा रहा है।

वरिष्‍ठ साहित्‍यकार प्रभु जोशी ने कहा कि भारत को बर्बाद करने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार द्वारा सुनियोजित कार्यक्रम चलाया जा रहा है। लाइफ स्टाइल बदलने के साथ-साथ यह विदेशी शक्तियां हमारी नई पीढ़ी की सोच एवं दिशा भी बदल रही है। हमारे प्रधानमंत्री, वित्तमंत्री, योजना आयोग के उपाध्यक्ष विदेशी संस्थाओं से प्रभावित है, यही वजह है हमारा देश आज नायकविहीन हो गया है। आज देश में राजनीति की संस्कृति ही समाप्त हो चुकी है, जिसकी वजह से हमारा देश मीडिया और माफियाओं की जकड़ में आ चुका है। मीडिया सच नहीं दिखाता, बल्कि अपने दृष्टिकोण से सच का निर्माण कर रहा है। देश के मौजूदा आंदोलन मोमबत्तियों से नहीं मीडिया कैमरों से चल रहे हैं। ये आंदोलन देश और युवा दोनों को छल रहे हैं। अब मोमबत्ती आंदोलनों से कुछ नहीं होने वाला, हमें अब मशानों की और प्रश्न खड़े करने की जरूरत है।

डॉ. दिव्या गुप्ता ने कहा कि जवाहरलाल नेहरू और डॉ. भीमराव आम्बेडकर ने कहा है कि जिस देश में स्त्री का सम्मान होता है वहीं देश प्रगति करता है। आज हमारे देश में विपरीत हालात पैदा हो गए है। अगर हमारी सोच में बदलाव नहीं आया तो सारे प्रयास व्यर्थ है। सीताहरण में सीताजी ने कोई मर्यादा नहीं लांघी थी, उन्होंने तो भीक्षा देने के लिए कदम उठाए थे। गंदी सोच तो रावण के दिमाग में थी। आज महिलाओं को मर्यादा सिखाने के साथ-साथ पुरुषों को भी मर्यादित आचरण में रहने की जरूरत है।

अनिल त्रिवेदी ने कहा कि वर्ष २०१२ में ऐसा लगा जैसे हम भ्रष्टतम देश के नागरिक है और अब कुछ दिनों से लग रहा है जैसे हम लोग बलात्कारियों से घिर गए हैं। अब खुला दौर आ गया है और समाज में बंद दिनांग के साथ जिंदा नहीं रह सकते। आज हर चीज पर प्रतिक्रियाओं का जो दौर चल रहा है उससे परिलक्षित होता है कि हमारा सोया हुआ समाज जाग रहा है। आज की राजनीतिक पीढ़ी में विचारशीलता का नितांत अभाव है क्योंकि आज के राजनैतिक कार्यकर्ताओं ने स्वयं को जनता से दूर कर लिया है और नेता कमांडो की कैद में सिमट गए हैं। आज तो माहौल पैदा हुआ है उससे एक ही शिक्षा मिलती है कि हम अच्छे नागरिक बने और आत्मविश्वास बढ़ाकर सच की राह पर चलें।

अर्चना जायसवाल ने कहा कि नारी का सम्मान देश का सम्मान है यदि हम विषम परिस्थितियों में भी नारियों के सम्मान की रक्षा नहीं कर सकते तो हम मुंह बंद रख ही सकते हैं। हालात बदलने के लिए समाज, न्यायपालिका, मीडिया और प्रशासन के लिए महिला कांग्रेस कमेटी की ओर से मुख्यमंत्री को कई सुझाव भी प्रेषित किए हैं। जबकि वर्षा शर्मा ने कहा कि राजनेताओं के बयान अचरज भरे हैं, देश का युवा इन बयानों को देखकर शर्मसार हो रहा है और सोच रहा है कि हमने अपना देश किन हाथों में सौंप दिया है। नेताओं को चाहिए कि यदि वह पीड़ितों के घांवों पर मरहम नहीं लगा सकते तो कम से कम अपना मुंह बंद रखें।

टॉक शो के अंतिम दौर में उपस्थित श्रोताओं और मीडियाकर्मियों ने प्रश्नकाल में हिस्सा लिया। प्रारंभ में अध्यक्ष प्रवीण कुमार खारीवाल ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि देश में एक तरफ नारियों की सुरक्षा की बात की जा रही है और हमारे नेता उल-जलूल बयानबाजी कर मुद्दे को दिशाहीन करने का प्रयास कर रहे हैं। अतिथियों का स्वागत महासचिव अरविंद तिवारी, सचिव संजय लाहोटी, कोषाध्यक्ष कमल कस्तूरी, रचना जौहरी, अतुल लागू ने किया। आभार सचिव संजय लाहोटी ने व्यक्त किया।

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