आदरणीय कार्तिकेय शर्मा जी मैं मदन मोहन तंवर आपके इंडिया न्यूज़ में रिपोर्टर हूँ. मैंने आपसे अपनी बात पहले भी कही थी कि मैंने चैनल के लिए अपनी जान तक की परवाह नहीं की मगर चैनल के लोग सिर्फ अपनी ही गलतियों की वजह से टीआरपी को शून्य पर ले आये हैं और किसी भी फील्ड रिपोर्टर को तीन साल से पैसा भी नहीं दिया गया है. पांच लाख दस हजार तो मेरा ही बनता है, अगर मैं अपनी भेजी गयी हर एक खबर का पैसा जोड़ता हूं.
एक आग की खबर के के कवरेज के दौरान मैं तीन महीने तक घायल भी रहा मगर कोई भी मुझे मिलने नहीं आया, न ही मेरी किसी तरह की कोई सहायता की. उस बात को भी दो साल से ज्यादा हो गये जब कि सहारा समय के रिपोर्टर को सब कुछ मिला, आज उस पत्रकार की पत्नी आराम की जिन्दगी गुजार रही है. मुझे अगर कुछ हो जाता तो आपकी तरफ जो हुआ इससे तो मेरी बीबी की सड़कों पर भीख मांगने जैसी हालत हो जाती. मेरे तो कोई औलाद भी नहीं है, जो मेरे बाद मेरे पीछे घर को संभाल लेते.
आपको तो सिर्फ खबर चाहिए. कौ कैसे जीता हे इसकी चिंता कौन करेगा. राम कौशिक जी को फिर आप को मैंने अपनी पूरी दास्ताँ पहले भी बताई थी और अब भी बता रहा हूँ कि अब मेरी हालत किसी भिखारी जैसी हो गयी है. क्यों कि मुझे तीन साल से मेरा पैसा नहीं मिला. मेरे पास मेरे नाम से चली हुई तीन सौ से ज्यादा खबरों का रिकार्ड है, जिनका आप इस्तेमाल भी कर सकते हैं. आप अपने राम कौशिक से पूछिए कि हमे हमारे पैसे क्यों नहीं दिए जा रहे हैं और चैनल की टीआरपी का जिम्मेदार कौन है?
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सर, कृपया हमारी मदद कर मेरे चैनल की टीआरपी के बारे में ध्यान दें. जितना पैसा खर्च कर आप चैनल चला रहे हैं, उतने में तो क्या उस से भी कम खर्च में भी दूसरों की टीआरपी हम से ज्यादा है, लेकिन किसी को भी चैनल की परवाह नहीं सिर्फ अपनी सैलरी की चिंता है. बदल डालो इस सिस्टम को, अगर कुछ मुनाफा चाहिए. आशा करता हुं कि आप हमारे बारे में भी सोचेंगे ही नहीं, कुछ करेंगे भी. हम सब आप के जवाब के इंतजार में हैं. आज फिर भूखे मरते हुए इंडिया न्यूज़ के एमडी से गुजारिश करता हूँ कि मेरा मेहनताना मुझे देकर मेरी जिंदगी को बचा लीजिए वर्ना मुझे अब आत्म हत्या के अलावा कोई और रास्ता नजर नहीं आ रहा. अगर मुझे इस रास्ते पर चलना पड़ा तो मैं आज ही यानी इकतीस दस दो हजार बारह को ही पुलिस और आला अधिकारियों को यह बात बता देता हूँ कि आज मेरी हालत यह है कि मैं अपनी बीबी को करवा चौथ पर एक रुमाल भी खरीद कर नहीं दे सकता और कुछ खरीद लेना तो एक सपना बन कर रह गया है.
जिस क्राइम रिपोर्टर से पुलिस भी खौफ खाती थी, जिस ने इंडिया न्यूज में आने के बाद लगातार पुलिस वालों को सस्पेंड करवाया हो और अपने ऊपर चार केस बनवा लिए हों, कि क्या चैनल कोई मदद करेगा. जब कि इलाके के रिपोर्टर मेरे बीमार होने पर अपने पैसे से मेरा इलाज करवाकर मुझे घर देखने आते रहते हैं मगर इंडिया न्यूज का कोई नहीं आता और मेरा पैसा क्यों नहीं दिया जा रहा. क्या आपको मेरी मौत का इंतजार है. मैं यह मेल सभी अधिकारियों को कर रहा हूं और आप पर भी. मेरा पैसा नहीं दिए जाने की वजह से मेरे भूखे मरने की नौबत आ गई. अब मैं कितना दिन भूखा रह सकता हूं यह ऊपर वाले कोपता है. लेकिन इंडिया न्यूज के कार्तिकेय शर्मा ने मेरा तीन साल का पैसा नहीं दिया, जिस से मेरे घर की हालत बिगड़ गई और आत्महत्या करने की मुसीबत पैदा हो गई. आज 31.10.12 दिनांक बुधवार रातके आठ बजकर चालीस मिनट हुए हैं आपको मेल कर आपको हकीकत की जानकारी दूसरी और आखिरी बार दे रहा हूं. मेरी मौत के जिम्मेवार कार्तिक शर्मा एमडी इंडिया न्यूज और एसाइनमेंट हेड राम कुमार कौशिक होंगे. गुड इवनिंग.. जय रामजी की.
मनमोहन तंवर
मो- 9716219676