शाम के तकरीबन ५ बजे थे …आफिस के फोन की घंटी फिर बजी और दूसरे छोर से दीपक भाई की आवाज़ आई, "बाबा एक बार फिर सोचो ….एक बार कोशिश करो …बात करो," मैं उस वक्त तय नहीं कर पाया लेकिन अगले दिन इरादा बदला और दीपक के कहने पर दिल्ली के निक्को होटल में आजतक के इनपुट एडिटर अजय उपाध्याय से मिला.. उपाध्यायजी ने कहा कि वो मेरी खोजी ख़बरें अखबार में पढ़ते रहते हैं पर उन्हें टीवी में स्क्रीन टेस्ट तो लेना होगा. मैं फिर पीछे हटा लेकिन दीपक…जी हां दीपक चौरसिया ने जोर दिया कि बाबा टेस्ट दे दो मुश्किल चीज़ नहीं है…दो-तीन दिन बाद कैमरामैन वाल्टर ने टेस्ट लिया और मेरी पीटीसी पास हो गयी. हफ्ते भर में मुझे आजतक में विशेष संवादाता का पत्र मिल गया. फिर स्टूडियो में दीपक चौरसिया और संजय बरागटा ने मुझे प्रिंट और टीवी का अंतर समझाया. ये बात अक्टूबर २००२ की है.
मित्रों सच यही है कि मेरे टीवी करियर के उस्ताद दीपक चौरसिया ही हैं और इस बात को मैं गर्व से स्वीकार करता हूँ. नौकरी के अगले दिन ही मेरी पहली खबर मुलायम सिंह यादव का इंटरव्यू था और ये आईडिया भी दीपक ने ही दिया. लोग पीछे मुड़कर नही देखते. लोग अपने पैर जमने के बाद नीव भूल जाते हैं. लेकिन मैं जिनका अहसानमंद रहा हूँ उनकी यादों को साथ लेकर चलता हूँ. लखनऊ में मेरे गुरु हेमंत तिवारी और हेमंत शर्मा (इंडिया टीवी) रहे और दिल्ली में दीपक चौरसिया. बाद में एंकरिंग का ब्रेक सुप्रिया प्रसाद जी ने दिया. लेकिन मैं एंकर की जगह इन्वेस्टीगेटिव रिपोर्टर बन गया.
मित्रों आज लिखने का मकसद दीपक चौरसिया को बधाई देना है. वो टीवी में फिर एक इतिहास रच रहे हैं. एक गुमनाम सा इंडिया न्यूज़ चैनल दीपक की रोशनी में महताब बन गया है. कई स्थापित चैनलों को पीछे छोड़ता हुआ ये चैनल हिंदी न्यूज़ सेगमेंट में भूचाल ला रहा है. मुझे लगता है कि दीपक के साथ राणा यशवंत की जोड़ी भी इस नए चैनल की उड़ान में गज़ब ढा रही है. दीपकजी और राणाजी को बधाई.
वरिष्ठ पत्रकार दीपक शर्मा के एफबी वॉल से साभार.






