किसी प्रतिष्ठित समाचार पत्र की दुर्दशा देखनी हो तो आपको ग्वालियर, भोपाल, जबलपुर, इंदौर, रायपुर व बिलासपुर में से किसी भी शहर जाना होगा. इन शहरों में पिछले कई महीनों से पत्रिका की लाखों प्रतियाँ प्रतिदिन रद्दी की जा रही हैं. प्रसार विभाग के सूत्रों के अनुसार रायपुर, भोपाल व जयपुर में उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों के आदेश पर ऐसा किया जा रहा है. इन उच्चाधिकारियों का भी कहना है कि इसकी सारी जानकारी मालिकों को भी है. ABC में ज्यादा सर्कुलेशन दिखाने के लिए यह किया जा रहा है. खासियत इस बात की है कि इनमें से अधिकांश प्रतियाँ दैनिक भास्कर द्वारा हाकरों से खरीदी जा रही हैं.
इन शहरों में सैकड़ों हाकर भास्कर के अधिकारियों के निर्देश पर रोजाना पत्रिका की एक्स्ट्रा कापियां उठाते हैं और उन्हें भास्कर वालों को दस पैसा ज्यादा लेकर बेच देते हैं. पत्रिका का बिक्री मूल्य कम होने के कारण उन्हें रद्दी करने में कोई खास नुकसान नहीं होता है. पत्रिका वाले भी सब कुछ जानते हुए अपनी सर्कुलेशन बढ़ने से खुश हैं. कोठारी परिवार भी मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ में भास्कर की तुलना में अपने बढ़ते सर्कुलेशन से खुश है और लगातार प्रसार प्रमुख बीआर सिंह व अन्य प्रसार प्रबंधकों की पीठ थपथपाता रहता है. शायद उन्हें भी यह महसूस नहीं है कि उनकी ही आस्तीन में अनेक सांप पले हुए हैं.