: कई मुकदमें दर्ज हैं इस पत्रकार के खिलाफ : जी हां, यह सौ फीसदी सच है। इस हिस्ट्रीशीटर पर हत्या तक का आरोप है। बताते हैं कि पुलिस इतनी आजिज हो गई थी कि इसके इनकाउंटर तक के आदेश हो गए थे। प्रहलाद सिंह नाम के एक सहकारिता माफिया के सौजन्य से दैनिक जागरण में बतौर स्ट्रिंगर इसका प्रवेश हुआ। मालिकान तक लगातार इसकी शिकायतें जाती रही। अखबार की नौकरी का लाभ लेकर इस शख्स ने सिंचाई विभाग, लोनिवि के कई इंजीनियरों से लाखों दुहा। कई तो इतने त्रस्त हुए कि गोरखपुर और महराजगंज से अपना स्थानांतरण करा लिया।
जागरण में एक साल पूर्व जब शैलेन्द्र मणि हटाओ अभियान शुरू हुआ तो इस शख्स ने स्टेट हेड रामेश्वर पांडेय को पकड़ लिया। बडहलगंज स्थित उनके गांव पर पंखे से लेकर कुर्सी का इंतजाम करने तक का काम संभाल लिया। यहां गोरखपुर में इसे जिम्मेदारी मिली कि पांडेय जी द्वारा बिहार से लाए गए केके शुक्ला को मजबूत करें। उनके अंगरक्षक के बतौर रहे। इस चक्कर में इस शख्स ने गोरखपुर कार्यालय के अंदर कई वरिष्ठों को बेइज्जत किया। आतंक बनाया। यह शख्स कार्यालय में रिवाल्वर लगाकर आता है।
एक बार किसी बात पर तत्कालीन सर्कुलेशन मैनेजर श्रीपाल पांडेय को खुलेआम कालर पकड़कर बेइज्जत किया। जिसकी शिकायत हुई। मगर पांडेय जी ने बचा लिया। इसे इसी साल केके शुक्ला के रिकमेंडेशन पर पांडेय जी ने परमानेंट करा दिया। अभी एक महीने पहले इसका प्रमोशन जूनियर रिपोर्टर से रिपोर्टर पद पर कर दिया गया। आइए इनकी हिस्ट्रीशीट देखें-
नाम- अरुण राय, हिस्ट्रीसीट नंबर 134 ए
मुकदमा तफसील
1- मुकदमा संख्या- 63, 1990, थाना कैंट, गोरखपुर, धारा 302
2-मुकदमा संख्या-273, 1991, थाना बेलीपार, धारा 392
3-मुकदमा संख्या-301, 1991, थाना बडहलगंज, धारा 392
4-मुकदमा संख्या-563, 2001 थाना बड़हलगंज, धारा 323, 504, 506
5-मुकदमा संख्या-385, 2003 थाना बड़हलगंज, धारा 419, 420, 467, 468, 471
वर्ष 2003 में जिस समय मुकदमा हुआ उस समय यह शख्स जागरण से जुड़ चुका था। बाद में अखबार के प्रभाव के चलते मुकदमे कायम नहीं हो पाए। हालांकि इसकी रंगदारी, वसूली और बंधक बनाकर संपत्ति लिखवाने, मकान खाली कराने, कब्जा कराने की गतिविधियां जारी रहीं। इस समय यह रामेश्वर पांडेय का एक नंबर लेफि्टनेंट है। उनके लिए भय बनाने से लेकर वसूली तक का काम करता है।
एक पत्रकार द्वारा भेजा गया पत्र.






