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वरिष्‍ठ पत्रकार ओम थानवी एवं कवि नरेश सक्‍सेना को ‘शमशेर सम्‍मान’

नयी दिल्ली : वर्ष 2012 का प्रतिष्ठित 'शमशेर सम्मान' कविता के लिए नरेश सक्सेना और सृजनात्मक गद्य के लिए जनसत्ता के संपादक ओम थानवी को देने की शनिवार को घोषणा की गई। सम्मान समिति के संयोजक डॉ. प्रतापराव कदम ने बताया कि ज्ञानरंजन, विष्णु नागर, लीलाधर मंलोई, मदन कश्यप, अनिल मिश्र और राजेन्द्र शर्मा को लेकर गठित चयन समिति ने सक्सेना और थानवी को इस बार 'शमशेर सम्मान' के पात्र पाया।

नयी दिल्ली : वर्ष 2012 का प्रतिष्ठित 'शमशेर सम्मान' कविता के लिए नरेश सक्सेना और सृजनात्मक गद्य के लिए जनसत्ता के संपादक ओम थानवी को देने की शनिवार को घोषणा की गई। सम्मान समिति के संयोजक डॉ. प्रतापराव कदम ने बताया कि ज्ञानरंजन, विष्णु नागर, लीलाधर मंलोई, मदन कश्यप, अनिल मिश्र और राजेन्द्र शर्मा को लेकर गठित चयन समिति ने सक्सेना और थानवी को इस बार 'शमशेर सम्मान' के पात्र पाया।

शमशेर बहादुरसिंह की पुण्यतिथि के अवसर पर 12 मई को लखनऊ में आयोजित सम्मान समारोह में इन दोनों को सम्मानित किया जाएगा। सम्मान के अंतर्गत प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह और सम्मान निधि प्रदान की जाएगी। इसके अलावा सम्मानित रचनाकारों के अवदान पर भी चर्चा होगी।वर्तमान समय के सबसे महत्वपूर्ण कवियों में से एक, ग्वालियर में जन्मे नरेश सक्सेना के अब तक दो कविता संग्रह- समुद्र पर हो रही है बारिश, सुनो चारूशीला व प्रेत प्रकाशित हुए हैं। इन्होंने महत्वपूर्ण कला फिल्मों का संपादन, निर्देशन और महत्वपूर्ण कला, संस्कृति एवं साहित्य केन्द्रित पत्रिकाओं का संपादन भी किया है।

सक्सेना को अपनी ही कविता आधारित फिल्म के निर्देशन के लिए 1991 में राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। लेखक एवं वर्तमान में जनसत्ता के संपादक ओम थानवी का जन्म राजस्थान के रेगिस्तानी कस्बे फलोदी जिला जोधपुर में हुआ। उनका रंगमंच से भी गहरा जुड़ाव रहा है। उन्होंने कई नाटक लिखे, अभिनय किया और कई का निर्देशन भी। थानवी ने साप्ताहिक 'इतवारी' से जयपुर से पत्रकारिता की शुरुआत की, फिर राजस्थान पत्रिका के संपादन से जुड़े। देश में आतंकवाद जब चरम पर था तब उन्होंने बिना समझौता किए चंडीगढ़ जनसता का 10 साल तक संपादन किया। वे पिछले 12 साल से जनसत्ता दिल्ली के संपादक हैं।

साहित्य, संस्कृति, कला, सिनेमा, नाटक, संगीत, पर्यावरण, वास्तुकला, पुरातत्व और भ्रमण में विशेष रुचि रखने वाले ओम थानवी अपने यात्रा संस्मरणों पर केन्द्रित पुस्तक 'मोहन जोदड़ो' से विशेष चर्चा में रहे। इसके अलावा यात्रा संस्मरणों पर ही आधारित उनकी दो खंडों में संपादित 'अपने-अपने अज्ञेय' व 'सिंधुघाटी की सभ्‍यता' तथा इतावली विद्वान एलपी तैस्सीतौरी और आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के अंतर्विरोध पर लिखी लेखमाला भी काफी चर्चित रहीं। (भाषा)

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