महाशिवरात्रि के स्नान के बाद विश्व के सबसे बड़े धार्मिक मेला महाकुंभ का समापन हो गया। पर आखिरी वक्त में कई सवाल भी छोड़ गया। पचपन दिनों तक चले इस महाकुंभ में दस करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने पुण्य की डुबकी लगाई। मकर संक्रांति से लेकर महाशिवरात्रि तक चले इक्कीसवीं सदी के इस मानव महामिलन के महापर्व यानि महाकुंभ अब बारह साल बाद आएगा।
धार्मिक आध्यात्मिक संगठनों और धर्मगुरुओं से लेकर लाखों कल्पवासियों के लिए नई ऊर्जा का यह महापर्व धार्मिक श्रेष्ठता और भव्यता के दर्शन का भी अवसर बना। नागा से लेकर साधुओं, शास्त्र और शस्त्रों के अलग-अलग दर्शन कराने वाले लोग महाकुंभ से कौन सा अमृत पाते हैं, इसे समझना आसान नहीं है। इसे सिर्फ संगम की रेती पर आकर ही समझा व महसूस किया जा सकता है।
मोक्ष की उम्मीद में प्रयाग महाकुंभ में डुबकी लगाने देश विदेश के कई करोड़ महिला-पुरूश यहां आए। यह सिर्फ धार्मिक मेला ही नहीं था बल्कि नई चेतना, नई उमंग प्रदान करने वाला लोक उत्सव भी साबित हुआ। जन कल्याण के लिए लगातार कई बड़े अनुष्ठान हुए। बेटी, गाय, गंगा, यमुना समेत कई अन्य छोटी नदियों के अस्तित्व बचाने के विचार धाराओं के संगम का भी साक्षी बना प्रयाग का महाकुंभ। विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक मेला सकुशल संपन्न कराना भी एक बड़ी चुनौती थी। कई बार व्यवस्था लड़खड़ाई। टेंटों में अग्निकांड की दो बड़ी दुर्घटनाएं हुईं। रेलवे स्टेशन और मेला परिसर में भगदड़ से 52 से ज्यादा लोग मौत के मुंह में चले गए।
शुरू से आखिर तक छाया रहा विवाद : महाकुंभ में मेला प्रशासन ने भूमि आंवटन को लेकर पेंच फंसाया तो असली-नकली शंकराचार्य और चतुष्पद का विवाद गहरा गया। बात इतनी ज्यादा बढ़ गई कि कई बड़े संत-महात्माओं को नाराज होकर मेला छोड़ना पड़ा। अनशन पर बैठे लापता स्वामी परिपूर्णानंद का पता नहीं चल सका। कोर्ट का आदेश और पुलिस टीम भी लापता स्वामी को तलाश नहीं पाई। चर्चित संन्यासिन राधे मां सुर्खियों में रहीं तो सेक्स स्कैंडल से कुख्यात हुए स्वामी नित्यानंद यहां आकर महामंडलेश्वर बन गए। कई अखाड़ों के विरोध के बावजूद उन्हें यह महत्वपूर्ण पदवी यहां आकर हासिल हो गई। महामंडलेश्वर की बर्खास्तगी भी चर्चा में रही। लंबी चली कवायदों के बाद भी अखाड़ा परिषद का गठन नहीं हो सका। भाजपा नेता नरेंद्र मोदी की जमकर ब्रांडिंग हुई। एक बार तो ऐसा लगने लगा कि जैसे महाकुंभ मेला ही प्रधानमंत्री तय कर देगा। धर्म संसद के नाम पर जमकर राजनीति का खेल खेला गया।
बहरहाल, महाकुंभ से लौटते चेहरों में तृप्ति का भाव दिखा। आस्था की डुबकी लगाकर घर लौटने वाले श्रद्धालुओं में अपने साथ गंगाजल ले जाने की उत्सुकता देखने लायक रही। अब बारह साल बाद महाकुंभ का साक्षी बनेगा तीर्थराज प्रयाग।
इलाहाबाद से शिवाशंकर पांडेय की रिपोर्ट. इनसे संपर्क मोबाइल नंबर 09565694757 के जरिए किया जा सकता है.






