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शराब है विजया भारती और ओंकारेश्‍वर के बीच विवाद की जड़?

 

प्रख्यात गायिका मालिनी अवस्थी बहुत हलकान हैं। दरअसल, भोजपुरी गीतों में ऐसे कोई प्रसंग उन्हें बहुत खोजने के बावजूद नहीं मिल पा रहे हैं, जिसमें पति-पत्नी के बीच में कोई बहुत बड़े विवाद को पूरी तरह व्यक्त किया जा सके। लेकिन यही मालिनी अवस्‍थी की यह समस्‍या ही तो उनकी सबसे बड़ी प्रसन्नता है। कारण यह कि भोजपुरी समाज की व्यवस्था में ऐसे विवादों की तो कभी गुंजाइश कभी रही ही नहीं। ऐसी हालत में जब विवाद ही न हो तो उसे व्यक्त करने के लिए गीत-छंद की आवश्यकता कभी खोजी ही नहीं गयी। मालिनी बताती हैं कि इस समाज में पति-पत्नी के बीच हल्की–फुल्की दिखावा जैसी छेड़खानी जरूर मौजूद है, लेकिन उसका मकसद केवल परस्‍पर स्नेह-भाव बढ़ाने के लिए प्यार-लाड़ के साथ मनुहार तक सीमित है। मकसद है कि पारिवारिक रिश्तों को लगातार मजबूती दिलाना। दुखांत प्रकरणों की जमीन से परे भोजपुरी ने कभी काम ही नहीं किया और भविष्य में शायद कभी हो भी नहीं।

 

प्रख्यात गायिका मालिनी अवस्थी बहुत हलकान हैं। दरअसल, भोजपुरी गीतों में ऐसे कोई प्रसंग उन्हें बहुत खोजने के बावजूद नहीं मिल पा रहे हैं, जिसमें पति-पत्नी के बीच में कोई बहुत बड़े विवाद को पूरी तरह व्यक्त किया जा सके। लेकिन यही मालिनी अवस्‍थी की यह समस्‍या ही तो उनकी सबसे बड़ी प्रसन्नता है। कारण यह कि भोजपुरी समाज की व्यवस्था में ऐसे विवादों की तो कभी गुंजाइश कभी रही ही नहीं। ऐसी हालत में जब विवाद ही न हो तो उसे व्यक्त करने के लिए गीत-छंद की आवश्यकता कभी खोजी ही नहीं गयी। मालिनी बताती हैं कि इस समाज में पति-पत्नी के बीच हल्की–फुल्की दिखावा जैसी छेड़खानी जरूर मौजूद है, लेकिन उसका मकसद केवल परस्‍पर स्नेह-भाव बढ़ाने के लिए प्यार-लाड़ के साथ मनुहार तक सीमित है। मकसद है कि पारिवारिक रिश्तों को लगातार मजबूती दिलाना। दुखांत प्रकरणों की जमीन से परे भोजपुरी ने कभी काम ही नहीं किया और भविष्य में शायद कभी हो भी नहीं।
 
मालिनी अवस्थी के तर्क अपनी जगह सही हो सकते हैं, लेकिन शायद भोजपुरी गीतों में ऐसा पहलू अब जुड़ने की जरूरत देखी-पहचानी लगी है। कम से कम विजया भारती के मामले में। मामला है भारती और उनके पति ओंकारेश्वर पाण्डे के बीच भड़का परस्पर ताजा विवाद। विजया भारती लगातार अपने पति पर रोज-ब-रोज आरोप थोप रही हैं, लेकिन उधर ओंकारेश्वर पांडेय किसी आरोप की नहीं, केवल सफाई और खंडन के शब्दों को पिरोने की जुटे हैं। सोशल साइटों में विजया भारती की पैरवी करने की होड़ लगी है। उनकी बातें कभी मोबाइल फोन से रिकार्ड कर सुनाई जा रही हैं। कुलमिला कर विजया भारती चंद समय में ही इतनी मशहूर हो चुकी हैं, उतनी बीसियों बरसों में अपने गीतों और गायन में नहीं पहचान बना पायीं थीं।
 
18 भाषाओं-बोलियों में अपनी कूहू-कूहू जैसी सुरीली आवाज वाकई चमकृत करने वाली रही है। देश-विदेश में विजया ने एक हजार से ज्यादा मंच-कार्यक्रम किये और उनके गीतों के करीब एक सौ अलबम जारी हो चुके हैं। भोजपुरी संस्‍‍कृति को पुख्ता करने के प्रयास ने गायन के साथ ही पारिवारिक रिश्तों को मजबूती के लिए उन्होंने भउजी विषय को अपनाया और महुआ न्यूज चैनल में रंगीली, छबीली और रसीली भौजी की बाकायदा प्रतियोगिता तक आयोजित करा लिया। ओहिजा एक से एक भउजी लोग जीते के होड़ में आखिरी दौर में चहुँपिये गइलीं। कुल मिलाकर विजया भारती का कद भोजपुरी गायन में शारदा सिन्हा, मालिनी अवस्थी और कल्पना के कद तक पहुंच गया, जो इस संस्कृति में शीर्ष और सम्मानजनक मुकाम तक पहुंचीं हैं।
 
भोजपुरी समाज उस समय तब स्तब्ध रह गया जब लोगों ने विजया भारती की आवाज सुनी :- मेरे पति ओंकारेश्वर पाण्डेय ने दो दिन पहले 4-5 लोगों के साथ मुझे जबरदस्ती लाकर यहाँ पागलखाने में भर्ती करवा दिया है। मुझे जबरन रोजाना 3-4 इंजेक्शन दिये जा रहे हैं, मुझे पागल घोषित करने की तैयारी की जा रही है। विजया ने यह भी बताया कि उन्हें इस बात की भी सूचना दी जा रही है कि मुझे किस इलाके या अस्पताल में भर्ती कराया गया है। खैर, खबरी पोर्टलों से पता चला कि विजया भारती दिल्ली के एक पागलखाने में भर्ती हैं। पता चला कि विजया का पता करने के लिए जब पत्रकारों ने फोन किया तो खुद विजया भारती ने बात की। मोहल्ला और भोजपुरिया डॉट कॉम ने विजया की आवाज फोन में टेप कर प्रसारित कर दिया। विजया का आरोप तो यह है कि उनके पति ओंकारेश्वर पांडे ने उनकी हत्या के लिए साजिशें रची हैं और एक बार तो उन्हें एक ऊंची इमारत से धकेल दे दिया गया था। इस हादसे में उनकी छह हड्डियां टूट गयी थीं। विजया भारती की हालत के बारे में बात करने पर पता चला कि विजया भारती में अल्कोहल बड़ी तादात में थी और इसी चलते वे ब्लडप्रेशर की चपेट में आ गयी। यह भी बताया गया कि अल्कोहल से निजात यानी डिटोक्सिफिकेशन के लिये अस्पताल लाया गया है। वे अस्पताल में भती हैं और विजया भारती की मानसिक स्थिति सही नहीं है।
 
लेकिन इसके बाद से ही फिर एक नया विवाद शुरू हो गया। अरिंदम चौधरी की द संडे इंडियन पत्रिका के सम्पादक ओंकारेश्वर पांडे ने ऐसी खबरों के खिलाफ उन संस्थानों को वकील की तरफ से बाकायदा लीगल नोटिस जारी करा दिया। यह कार्रवाई पिछले 27 अक्तूबर की है। जवाब में पत्रकारों ने उल्टे सवाल कर दिये कि क्या ब्लडप्रेशर के इलाज के लिये किसी को पागलखाने में भर्ती कराया जाता है? मोहल्ला लाइव के अविनाश दास बोले कि इतनी दुविधा पहले कभी नहीं रही, जितनी कि अब। फोन आया विजया भारती का। कांपती हुई आवाज में। उन्होंने पहली बार फोन किया था। घरेलू हिंसा से पीड़ित विजया जी ने बताया कि उन्हें उनके पति रोज पीटते हैं और पिछले छह महीनों में दो बार पीट-पीट कर उनकी हड्डी तोड़ चुके हैं। अभी उनका एसएमएस आया कि “आपने कोई रेस्पांस नहीं दिया। मेरी जान चली जाएगी। बाद में पता चला कि विजया महिला आयोग में भी पहुंचीं। मामला पुलिस तक भी पहुंचा और काफी देर तक ओंकारेश्वर पांडे से पूछताछ की गयी।
 
हिस्ट्री टीवी 18 में भाषा प्रबंधक निखिल आनंद गिरी भी विजया भारती के पक्ष में हैं। वे कहते हैं कि दोनों का प्रेम विवाह हुआ था लेकिन इसके बाद से ही प्रेम कहीं नहीं रहा। उन्होंने ओंकारेश्वरर पांडेय के अनैतिक संबंधों के आरोप लगाये। विजया ने अपने लोकगीतों से जो इज़्ज़त बनाई थी, उसे बचाने के लिए सब कुछ सहती रहीं। ओंकारेश्वर कई महीनों से बार-बार धमकी दे चुके हैं कि तुम्हें पागल घोषित कर दूंगा। विजया भारती देवघर जिले के संग्रामपुर गांव की रहने वाले झा परिवार में पैदा हुई। सुरीली आवाज और भावुक अंदाज। बचपन से ही कुछ नया करने का जज्बा रहा। गीत लिखना और गाना। आज भी वे खुद लिखे गीत गाती हैं। उनके कुछ गीत कुछ इस तरह हैं:- 'जइसन तोहरे टोपिया दारोगा बाबू, वैइसन हमरी ओढ़नियां, ' मांगे ला माई भजनमा में दुनिया कए लोगबा अनढ़नवा, विजया कए इतनै निहोरा बा मां भ्रष्टाचार नाश करि तो खूब चर्चित रहा। कई टीवी चैनलों में कार्यक्रम प्रस्तुत कर चुकी विजया कई देशों में भी स्टेज शो कर चुकी है। हालांकि उनका जन्मं मैथिलि समाज में हुआ था, लेकिन जो मौजूदा पहचान और कद मिला, वह भोजपुरी से। विजया भारती भोजपुरी में अश्लील गानों के सख्त खिलाफ रही हैं। क्योंकि अश्लीलता किसी गंदे धब्बे की तरह है जो बस कुछ दिन का है। अपनी शर्तों के चलते ही विजया भारती फिल्मों से दूर रही हैं। लेकिन भोजपुरी समाज में प्रतिभाओं को निखारने के लिए वे भोजपुरी फिल्म उद्योग की स्थापना की कोशिश और वकालत करती हैं।
 
ओंकारेश्वेर पांडेय से विजया भारती की मुलाकात गुवाहाटी में हुई जब वे अपने एक कार्यक्रम में पहुंची थीं। आरा जिला के ओंकारेश्वर पांडे तब गुवाहाटी से प्रकाशित एक अखबार में रिपोर्टर थे। यह बात है सन 90 के आसपास की। जल्दी ही यह पहचान प्रेम में बदल गयी और सन 94 में इन दोनों ने विवाह कर लिया। परिवारी लोगों ने दोनों को ही खूब अपनाया। फिर एक बेटी और एक बेटा हुआ। परिवार बढ़ता रहा और इसी अनुपात में विजया की सफलताएं भीं। महुआ के बिहाने-बिहाने और भउजी नम्बर वन से तो वे प्रसिद्धि के चरम तक पहुंच गयीं। कई देशों में घूमीं और प्रदर्शन किया। भारती के प्रति ओंकारेश्वर पांडे पूरी तरह समर्पित थे। भारती के एक करीबी मित्र बताते हैं कि इसी बीच उन्हें शराब की लत पड़ गयी। महुआ के बिहाने-बिहाने से हटाये जाने से भारती दिमागी तौर पर परेशान थीं। निजात पाने के लिए उन्होंने जमकर शराब पीना शुरू कर दिया। नतीजा सामने है। नोएडा में भारती के साथ काम कर चुकी एक पत्रकार का कहना है कि जिस घटना में उनकी हड्डी टूटने की बात की जा रही है, दरअसल वह उनकी शराब की लत के चलते हुई थी। हां, ओंकारेश्वर ने मौके पर पहुंच कर उन्हें अस्पताल जरूर पहुंचाया था। कहा तो यह भी गया 

कि शराब के चलते ही एक बार मंच पर मनोज तिवारी से उनकी जमकर कहासुनी हुई थी। कुछ भी हो, इस पूरे विवाद में अब तक किसी भी पक्ष ने तलाक देने की बात नहीं की। मैथिली बोली में एक कहावत है कि सांय बहु के झगरा, पंच भेल लबरा। मतलब यह कि पति-पत्नी के विवाद में आखिरकार मध्यस्थ ही बुरे बन जाते हैं।
 
लेखक कुमार सौवीर यूपी के वरिष्ठ पत्रकार हैं. उनसे संपर्क [email protected] या 09415302520 के जरिए किया जा सकता है. यह लेख डीएनए में प्रकाशित हो चुका है.


 

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