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समागम पत्रिका के बारह साल पूरे, हिंदी दिवस और सिनेमा पर आधारित होंगे अगले अंक

भोपाल. मीडिया एवं सिनेमा की पूर्णकालिक शोध पत्रिका समागम जनवरी 2013 में बारह वर्ष का सफर तय कर तेरहवें वर्ष में प्रवेश करेगी. मीडिया एवं सिनेमा के साथ ही सामाजिक संदर्भों के क्षेत्र में  गंभीर किस्म के शोध को बढ़ावा देने के लिये समागम एक प्रकल्प है जहां समूचे हिन्दुस्तान से गंभीर शोधार्थी एवं मीडिया एवं सिनेमा के विशेषज्ञ निरंतर अपना सहयोग दे रहे हैं. समागम का जनवरी-13 का अंक अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी दिवस पर केन्द्रित होगा जबकि फरवरी-13 का अंक भारतीय सिनेमा के सौ वर्ष पर होगा. इस आशय की जानकारी समागम के संपादक श्री मनोज कुमार ने दी है।

भोपाल. मीडिया एवं सिनेमा की पूर्णकालिक शोध पत्रिका समागम जनवरी 2013 में बारह वर्ष का सफर तय कर तेरहवें वर्ष में प्रवेश करेगी. मीडिया एवं सिनेमा के साथ ही सामाजिक संदर्भों के क्षेत्र में  गंभीर किस्म के शोध को बढ़ावा देने के लिये समागम एक प्रकल्प है जहां समूचे हिन्दुस्तान से गंभीर शोधार्थी एवं मीडिया एवं सिनेमा के विशेषज्ञ निरंतर अपना सहयोग दे रहे हैं. समागम का जनवरी-13 का अंक अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी दिवस पर केन्द्रित होगा जबकि फरवरी-13 का अंक भारतीय सिनेमा के सौ वर्ष पर होगा. इस आशय की जानकारी समागम के संपादक श्री मनोज कुमार ने दी है।

ज्ञात रहे कि फरवरी-2012 में जब भारतीय सिनेमा ने सौ वर्षों में प्रवेश किया था तब से लगातार एक वर्ष तक समागम ने भारतीय सिनेमा पर विभिन्न कोणों से सामग्री का प्रकाशन किया है. मुख्यधारा की सिनेमा के साथ साथ आंचलिक सिनेमा के विषय-वस्तु को लेकर विविध सामग्री का प्रकाशन किया गया है. आंचलिक सिनेमा में जिन अंचलों को शामिल किया गया उनमें बंगला, मराठी, गुजराती, भोजपुरी, उत्तराखंडी, छत्तीसगढ़ी, मध्यप्रदेशीय, सिंधी एवं दक्षिण भारतीय प्रमुख हैं. समागम के विशेषांक में भारतीय सिनेमा के कुछ विशिष्ठ आयामों पर अनछुये पहलुओं को शामिल कर संग्रहणीय अंक बनाने का प्रयास किया जा रहा है.  

समागम अपने सालगिरह के अवसर पर एक किताब का प्रकाशन भी करने जा रहा है. इस किताब में भारतीय सिनेमा के सौ सालों का सफर एवं आंचलिक सिनेमा की चुनौतियां, उपलब्धियों को रेखांकित किया गया है. दो सौ पृष्ठों की यह किताब शोध आलेखों की निधि है. समागम बीते दो वर्ष से इस किताब का प्रकाशन कर रहा है. समागम की योजना है कि आने वाले समय में वह पत्रकारिता पाठ्यक्रम की किताबों का प्रकाशन भी करे.

समागम का हर अंक विशेषांक होता है. किसी विषय विशेष का चयन कर समागम पूरा अंक इसी विषय पर केन्द्रि करता है. अब तक प्रकाशित अंकों को सराहा गया है. समागम की इस कामयाबी के लिये उन विशेषज्ञों की भूमिका अहम हैं जिनके मार्गदर्शन एवं सलाह से समागम शोध की गंभीर पत्रिका बन चुकी है. समागम के इस नेचर की तारीफ देश की सबसे बड़ी समाचार पत्रिका इंडिया टुडे, शुक्रवार सहित अनेक साहित्यअनुरागी पत्रिकाओं ने की है.

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