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सहारा ने कोर्ट के आदेशों का उड़ाया मजाक, सेबी से भी झूठ बोला

नई दिल्ली। पूंजी बाजार नियामक सेबी सहारा समूह के खिलाफ शिकायत लेकर फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सहारा की तरफ की जा रही कार्रवाई पर कोर्ट ने नाराजगी जताई है। नियामक ने आरोप लगाया है कि समूह ने अपनी संपत्तियों का मूल्य बढ़ा-चढ़ा कर बताया है और 20 हजार करोड़ रुपये की संपत्तियों के सभी मूल दस्तावेज अब नहीं सौंपे हैं। शीर्ष अदालत ने 28 अक्टूबर को आदेश दिया था कि सहारा ये दस्तावेज सेबी को सौंप दे।

नई दिल्ली। पूंजी बाजार नियामक सेबी सहारा समूह के खिलाफ शिकायत लेकर फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सहारा की तरफ की जा रही कार्रवाई पर कोर्ट ने नाराजगी जताई है। नियामक ने आरोप लगाया है कि समूह ने अपनी संपत्तियों का मूल्य बढ़ा-चढ़ा कर बताया है और 20 हजार करोड़ रुपये की संपत्तियों के सभी मूल दस्तावेज अब नहीं सौंपे हैं। शीर्ष अदालत ने 28 अक्टूबर को आदेश दिया था कि सहारा ये दस्तावेज सेबी को सौंप दे।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने बुधवार को शीर्ष अदालत में बताया कि सहारा ने सिर्फ जमीन के दो प्लाटों की संपत्ति के मालिकाना हक के दस्तावेज उसे दिए हैं। इनमें से 106 एकड़ का एक प्लॉट मुंबई के वर्सोवा में है। समूह ने इसकी कीमत 19,000 करोड़ रुपये बताई है। दूसरा प्लॉट ठाणो के पास वसई इलाके में है। समूह के अनुसार दो सौ एकड़ के इस प्लॉट का मूल्य एक हजार करोड़ रुपये के करीब है।

जस्टिस केएस राधाकृष्णन और जेएस खेहर की खंडपीठ ने आदेश पालन नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई। खंडपीठ ने कहा कि अगर हमारे आदेश का पालन इस तरह किया जाता है तो यह निरा मजाक है। हालांकि कोर्ट ने कोई आदेश जारी नहीं किया, क्योंकि सहारा के वकील बहस के लिए अदालत में मौजूद नहीं थे। इसके बाद पीठ ने मामले की अगली सुनवाई गुरुवार के लिए टाल दी। कोर्ट ने नाराजगी दिखाते हुए कहा कि सुनवाई के वक्‍त कोई बहाना नहीं सुना जाएगा।

गौरतलब है कि समूह की दो कंपनियों ने बिना मंजूरी के डिबेंचर जारी कर लोगों से 24 हजार करोड़ जुटाए थे। इसी रकम को लौटाने के लिए सेबी की याचिका पर बीते साल सुप्रीम कोर्ट ने सहारा के खिलाफ फैसला सुनाया था। इसमें निवेशकों की रकम सूद समेत लौटाने की जिम्मेदारी सेबी पर डाली थी। नियामक इन संपत्तियों की नीलामी कर समूह की दो कंपनियों द्वारा निवेशकों से वसूली गई रकम लौटाएगा। समूह की ओर से नियामक के पास पांच हजार करोड़ से कुछ अधिक का बैंक ड्राफ्ट जमा कराया गया था। इसके बाद सेबी ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना की याचिका दाखिल की थी।

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