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सहारा मामले में वेरिफिकेशन की नीलामी डेडलाइन बढ़ी

नई दिल्ली। मार्केट रेग्युलेटर सेबी ने सहारा के हाई-प्रोफाइल मामले में इन्वेस्टर्स की आमने-सामने की पहचान (इन-पर्सन वेरिफिकेशन) करने के लिए पब्लिक सेक्टर बैंकों और केवाईसी रजिस्ट्रेशन एजेंसियों यानी केआरए से बोली मंगाने की समय-सीमा दूसरी बार बढ़ाई है। सेबी ने नोटिस जारी करके कहा है कि जो बैंक और एजेंसियां वेरिफिकेशन का काम करने में इंटरेस्टेड हैं, वो अपनी बिड अब 15 जनवरी तक जमा करा सकते हैं।

नई दिल्ली। मार्केट रेग्युलेटर सेबी ने सहारा के हाई-प्रोफाइल मामले में इन्वेस्टर्स की आमने-सामने की पहचान (इन-पर्सन वेरिफिकेशन) करने के लिए पब्लिक सेक्टर बैंकों और केवाईसी रजिस्ट्रेशन एजेंसियों यानी केआरए से बोली मंगाने की समय-सीमा दूसरी बार बढ़ाई है। सेबी ने नोटिस जारी करके कहा है कि जो बैंक और एजेंसियां वेरिफिकेशन का काम करने में इंटरेस्टेड हैं, वो अपनी बिड अब 15 जनवरी तक जमा करा सकते हैं।

सेबी ने 'इन-पर्सन वेरिफिकेशन' टेंडर पहली बार 02 नवंबर को जारी किया था। उसने पब्लिक सेक्टर बैंकों और केआरए से अपनी बोली 22 नवंबर तक जमा कराने के लिए कहा था। बाद में सेबी ने डेडलाइन को बढ़ाकर 21 दिसंबर कर दिया। अब इसे 15 जनवरी कर दिया गया है। सेबी के नोटिस के मुताबिक, 'टेंडर जमा करने की अंतिम तारीख और समय सीमा 15 जनवरी 2013 दोपहर 2.30 बजे तय की गई है। टेक्निकल बिड इसी दिन दोपहर 3.30 बजे खोली जाएगी। टेंडर के बाकी दूसरे टर्म ऐंड कंडिशंस में कोई बदलाव नहीं किया गया है।'

सेबी ने इंटरेस्टेड पार्टी के साथ 7 नवंबर को प्री-बिड मीटिंग की थी। इसमें कार्वी, सीएएमएस, एनएसडीएल और सीडीएसएल ने दिलचस्पी दिखाई थी। इन-पर्सन वेरिफिकेशन के लिए जिस एजेंसी या बैंक का चुनाव किया जाएगा उसको सहारा मामले में यह पता लगाने के लिए सभी इन्वेस्टर्स से फेस टू फेस होना होगा कि वो सही इन्वेस्टर हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सेबी को सहारा की दो कंपनियों के बॉन्डहोल्डर्स की असलियत का पता लगाकर उनको 15 फीसदी इंटरेस्ट के साथ इन्वेस्टमेंट वापस दिलाने की जिम्मेदारी दी है। कोर्ट ने 31 अगस्त के आदेश में सेबी से यह पता लगाने के लिए कहा था कि सहारा ग्रुप की दो कंपनियों के ऑप्शनली फुली कनवर्टिबल डिबेंचर (ओएफसीडी) के तीन करोड़ बॉन्डहोल्डर्स सचमुच हैं या नहीं। कंपनियों के नाम सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड और सहारा रियल एस्टेट कॉरपोरेशन हैं।

सेबी को इन्वेस्टर्स के असल में होने की बात का पता लगाने के बाद इन्वेस्टमेंट की रकम को ब्याज सहित इन्वेस्टर्स को दिलाने का जिम्मा दिया गया था। सेबी ने सुप्रीम कोर्ट का आदेश मिलने के बाद बॉन्डहोल्डर्स का 'इन-पर्सन वेरिफिकेशन' कराने का फैसला किया। इसके लिए वह पब्लिक सेक्टर बैंकों और केआरए की सर्विस लेगा। तब से सुप्रीम कोर्ट एक और ऑर्डर जारी कर चुका है। इसमें सहारा ग्रुप को फरवरी के पहले हफ्ते तक इन्वेस्टर्स का पैसा तीन किस्तों में रिफंड करने की इजाजत दी गई है। पहले सुप्रीम कोर्ट ने सहारा को इन्वेस्टर्स का पैसा वापस करने के लिए तीन महीने का वक्त दिया था। (एनबीटी)

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