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साईं प्रसाद ग्रुप के पूर्व सीईओ एसएल श्रीवास्‍तव का एक बड़ा फर्जीवाड़ा

एसएल श्रीवास्तव साईं प्रसाद ग्रुप के पूर्व सीईओ थे। इन्हें कुछ महीनों पहले कंपनी द्वारा निकाल दिया गया था। अब इन्होंने साईं प्रसाद ग्रुप को बदनाम करने का तानाबाना बुन डाला और इस कंपनी से मिलते हुए नाम से चार कंपनी बना डाली-  1. श्री साईं स्पेसेस क्रियेसन लिमिटेड, 2. श्री साईं ऑटो प्राइवेट लिमिटेड, 3. श्री साईं नॉन कोन्वेंसनल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड, .4. श्री साईं सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड। अब आप सोच रहे होंगे कि कंपनी बनाने में क्या फर्जीवाड़ा है? ये हम बताते हैं। श्रीवास्तव ने अपने शैतान दिमाग से साईं प्रसाद ग्रुप को बदनाम करने का तानाबाना बुना है और इस कड़ी में साईं प्रसाद ग्रुप से निकाले गए कर्मचारियों की भर्ती की जा रही है। 

एसएल श्रीवास्तव साईं प्रसाद ग्रुप के पूर्व सीईओ थे। इन्हें कुछ महीनों पहले कंपनी द्वारा निकाल दिया गया था। अब इन्होंने साईं प्रसाद ग्रुप को बदनाम करने का तानाबाना बुन डाला और इस कंपनी से मिलते हुए नाम से चार कंपनी बना डाली-  1. श्री साईं स्पेसेस क्रियेसन लिमिटेड, 2. श्री साईं ऑटो प्राइवेट लिमिटेड, 3. श्री साईं नॉन कोन्वेंसनल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड, .4. श्री साईं सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड। अब आप सोच रहे होंगे कि कंपनी बनाने में क्या फर्जीवाड़ा है? ये हम बताते हैं। श्रीवास्तव ने अपने शैतान दिमाग से साईं प्रसाद ग्रुप को बदनाम करने का तानाबाना बुना है और इस कड़ी में साईं प्रसाद ग्रुप से निकाले गए कर्मचारियों की भर्ती की जा रही है। 

लखनऊ के 238 – A इन्द्रानगर में एक ऑफिस खोला गया। जब मैं कुछ दिन पहले वहां से निकल रहा था तो मैंने न्यूज़ एक्सप्रेस की एक्सयूवी गाड़ी खड़ी देखी। नंबर महाराष्ट्र का था। मेरे मन में जिज्ञासा हुई कि मैं भी इस चैनल के किसी बड़े अधिकारी से मिलूं, सो मैं वहां पहुँच गया। मैंने वहां मौजूद व्यक्ति, जिसका नाम धर्मेन्द्र सिंह था, से अपना परिचय दिया और पूछा कि ये न्यूज़ एक्सप्रेस चैनल का ऑफिस है? तो उसने कहा हां, ये उसी का ऑफिस है पर यहाँ से चैनल नहीं ग्रुप के दूसरे काम होते हैं जैसे कि चिट-फण्ड, एनर्जी, आईटी से सम्बंधित।

मुझे कभी भी साईं प्रसाद ग्रुप के बारे में इतनी जानकारी थी नहीं थी, सो मैंने जिज्ञासु बनकर सवाल पूछने शुरू कर दिए। वहा मौजूद धर्मेन्द्र ने जब मुझसे पूछा कि आप किस काम से आये हैं तो मैंने हाजिर जवाब होकर कहा कि मैं एक निवेशक हूँ। इतना सुनते ही चाय और बिस्कुट आर्डर कर दिए गए। जब वहां मौजूद तथाकथित सिंह ने मुझसे पूछा कि आप कितना निवेश करेंगे, तो मैंने कहा एक लाख। उसने तुरंत एक ब्रोसर मेरे सामने रखकर स्कीम बतानी शुरू कर दी और बोला हमारी कंपनी पांच साल में आपका पैसा दुगना कर देगी।

मेरे मन में कई सवाल उठने लगे कि ये कैसे हो सकता है? फिर मैंने भी सवाल दागने शुरू कर दिए? मेरे सवाल से परेशान होकर धर्मेन्द्र ने अपने मोबाइल फ़ोन से किसी रविन्द्र को फ़ोन किया और वहां आने को बोला। मैंने पूछा कि कौन आ रहा है तो उसने बोला हमारे रीजनल मैनेजर हैं, मुझे ज्यादा कंपनी के बारे में पता नहीं है उनको सब मालूम है। मैंने उससे पूछा कि आप के चैनल का ऑफिस कहां पर है? तो उसने हकलाती जवान से बताया कि हमारी कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर एसएल श्रीवास्तव जी हैं और हम साईं प्रसाद ग्रुप में अब नहीं हैं। हमारे डायरेक्टर साहब साईं ग्रुप में पहले पार्टनर थे, अब उनसे अलग होकर अपनी चार कंपनी बना ली है और भारत के पांच राज्यों में हमारा काम चल रहा है। मैंने सोचा कि ये जरुर कोई फर्जीवाड़ा है। मैंने समय न होने का बहाना बनाकर उनसे अलविदा कहा और कल आने की बात कहकर चलता बना।    

मेरे मन में कई सवाल कौंध रहे थे कि धर्मेन्द्र ने पहले मुझसे झूठ क्यों बोला और बाद में सच क्यों बोला? पर मैंने भी ठान ली कि मैं भी पूरा मामला पता कर के रहूँगा। मैंने भी सबसे बड़े खोजी नारद गूगल बाबा का सहारा लिया और उनके द्वारा दिए गए ब्रोसर पर उपलब्ध जानकारी को खोजने में लग गया और काफी मेहनत के बाद मैंने पूरी रात जग कर एक बड़े घोटाले की बू सुंघ ली।

पूरा घटनाक्रम इस प्रकार है कि …जब आप गूगल पर जा कर श्री साईं कंपनी टाइप करेंगे तो साईं प्रसाद ग्रुप की वेबसाइट खुल जाएगी और एक बड़ा ग्रुप सामने होगा और हो जायेगा खेल। दूसरा जब आप मिनिस्ट्री आफ कॉरपोरेट की वेबसाइट पर जायेंगे तो श्री साईं स्पेसेस क्रियेशन लिमिटेड, 2. श्री साईं ऑटो प्राइवेट लिमिटेड, 3. श्री साईं नॉन कोन्वेंसनल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड, 4. श्री साईं सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड का पूरा चिट्टा देख सकते है। मैंने भी वही किया और उपलब्ध जानकारी के आधार पर लग गया उनकी पड़ताल करने। फिलहाल ये पता चला कि एसएल श्रीवास्तव को साईं प्रसाद ग्रुप से गबन के चलते निकाल दिया गया था और निकले जाने के दो महीने बाद उन्होंने तीन कंपनिया बनाई, वो भी उसके मिलते जुलते नाम से।

पर मेरे मन में कई सवाल है जिनका जवाब आना बाकी है :

1- एसएल श्रीवास्तव की कंपनी लोगों का बीमा किस आधार पर कर रही है?

2- श्री साईं कंपनी पांच वर्ष में आपका धन दुगना कैसे कर रही है?

3- ज्‍वाइंट वेंचर के नाम पर लोगों से रुपए लेने की परमीसन इस कंपनी को किसने दी? क्या ये कंपनी को भारत सरकार ने कोई परमीसन दी है?

4- मात्र 500000/-, 100000/- और 1600000/- रुपए की पूंजी वाली कंपनी करोड़ों रुपए लोगों से किस आधार पर उगाह रही है? ये मैं नहीं कह रहा जो दस्तावेज मुझे एमसीए की वेबसाइट से प्राप्त हुए हैं वो कह रहे हैं और जो ब्रोसर श्री साईं कंपनी द्वारा छपाए गए है उसमे धन को दुगना करने और बीमा करने की बात लिखी है। पाठकों मैं पेशे से पत्रकार हूँ और जिज्ञासु भी, एक साधारण सा वाकया कभी कभी कहानी बना देता है। फिलहाल दीगर बात ये है कि शातिर आदमी घोटाले करते हैं पर हर एक घोटालेबाजों के तरीके अलग-अलग होते हैं। अभी में पूरी घटना की तह में जाने में लगा हूँ।

ये हैं कुछ डाक्यूमेंट्स–

डाक्यूमेंट एक

डाक्यूमेंट दो

डाक्यूमेंट तीन

डाक्यूमेंट चार

डाक्यूमेंट पांच

डाक्यूमेंट छह

डाक्यूमेंट सात

अमित की रिपोर्ट.


इसे भी पढ़ें- धन दोगुना करने का फर्जीवाड़ा कर रहा है एसएल श्रीवास्तव

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